भारत के दिग्गज कांग्रेस नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री सुरेश कलमाड़ी का मंगलवार को पुणे में निधन हो गया। 82 वर्ष की उम्र में उन्होंने पुणे के एक प्राइवेट अस्पताल में अंतिम सांस ली। लंबे समय से बीमार चल रहे कलमाड़ी के निधन की खबर ने न केवल पुणे बल्कि पूरे देश के राजनीति और खेल जगत को शोक में डुबो दिया। उनका अंतिम संस्कार आज शाम वैकुंठ धाम श्मशान घाट में किया जाएगा।

शुरुआती जीवन और भारतीय वायु सेना से जुड़ाव
सुरेश कलमाड़ी का जन्म 1 मई 1944 को हुआ था। उन्होंने राजनीति में कदम रखने से पहले भारतीय वायु सेना में पायलट के रूप में छह साल से अधिक समय तक सेवा दी। वायु सेना में सेवा के दौरान उनकी नेतृत्व क्षमता और अनुशासन का स्तर इतना उच्च था कि राजनीति में कदम रखते ही उनका प्रभाव स्पष्ट हो गया। वायु सेना से सेवानिवृत्त होने के बाद उन्होंने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस से अपने राजनीतिक सफर की शुरुआत की।
राजनीतिक सफर की शुरुआत और इंडियन यूथ कांग्रेस
कलमाड़ी को 1977 में इंडियन यूथ कांग्रेस, पुणे का प्रेसिडेंट बनाया गया। अगले ही वर्ष वह महाराष्ट्र यूथ कांग्रेस के प्रेसिडेंट बने और 1980 तक इस पद को संभाला। इसके दौरान उन्होंने युवाओं और खेल गतिविधियों को प्रोत्साहित करने का काम किया। उनके नेतृत्व में पुणे में अंतर्राष्ट्रीय मैराथन की शुरुआत हुई।
1981 से 1986 तक वे इंडियन यूथ कांग्रेस (सोशलिस्ट) के प्रेसिडेंट बने रहे। इस दौरान उन्होंने युवाओं में राजनीति और खेल के प्रति जागरूकता फैलाने का काम किया। उनका राजनीतिक करियर 1982 से सक्रिय रूप से शुरू हुआ और 1982 से 1996 तक वे तीन बार पुणे से सांसद रहे। इसके बाद 1998 में वह राज्यसभा के सदस्य भी बने।
केंद्रीय मंत्री और रेल राज्य मंत्री के रूप में कार्य
सुरेश कलमाड़ी ने पी.वी. नरसिम्हा राव सरकार में रेल राज्य मंत्री के रूप में कार्य किया। उनके कार्यकाल में रेल बजट पेश करने वाले वे एकमात्र राज्य मंत्री थे। उन्होंने रेल नेटवर्क के विस्तार और सुधार में महत्वपूर्ण योगदान दिया। उनकी दूरदर्शिता और प्रशासनिक कौशल के कारण उन्हें पुणे का ‘प्रबंधक’ कहा जाने लगा।
पुणे शहर के विकास में योगदान
कलमाड़ी ने पुणे शहर के विकास में भी अहम भूमिका निभाई। उन्होंने पुणे हवाई अड्डे के विस्तार, मेट्रो परियोजना और बुनियादी ढांचे के विकास में महत्वपूर्ण कदम उठाए। उनके प्रयासों से पुणे शहर ने नई पहचान बनाई।
सिर्फ प्रशासनिक कार्यों तक ही सीमित नहीं रहे, कलमाड़ी ने पुणे महोत्सव और पुणे अंतर्राष्ट्रीय मैराथन जैसी पहलें भी शुरू कीं, जिससे शहर का सांस्कृतिक और खेल वातावरण और भी समृद्ध हुआ।
खेल प्रशासन में योगदान और राष्ट्रमंडल खेलों का आयोजन
सुरेश कलमाड़ी की पहचान केवल राजनीति तक सीमित नहीं रही। उन्होंने भारतीय ओलंपिक संघ (आईओए) के अध्यक्ष के रूप में 1996 से 2012 तक कार्य किया। इसके अलावा 2000 से 2013 तक वह एशियाई एथलेटिक्स संघ के अध्यक्ष भी रहे। 2015 में उन्हें इसका आजीवन अध्यक्ष नामित किया गया। उनके कार्यकाल में भारत ने राष्ट्रमंडल खेलों का आयोजन किया। हालांकि इससे जुड़े कुछ विवाद भी चर्चा में रहे।
व्यक्तिगत जीवन और निधन
सुरेश कलमाड़ी पिछले कुछ समय से स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे थे। उनके परिवार के अनुसार, उनकी मृत्यु मुख्य रूप से उम्र और लंबी बीमारी के कारण हुई। उनका निधन राजनीति, खेल और प्रशासनिक क्षेत्र में एक युग का अंत है। आज शाम उनका अंतिम संस्कार वैकुंठ श्मशान घाट, पुणे में किया जाएगा।
उनके निधन से राजनीति और खेल जगत में शोक की लहर है। पुणे और देश के लोग उन्हें उनके योगदान और उपलब्धियों के लिए हमेशा याद रखेंगे। उनके प्रयासों और नेतृत्व ने युवाओं, खेल खिलाड़ियों और प्रशासनिक सुधारों को एक नई दिशा दी।
