नर्मदापुरम के इटारसी वन परिक्षेत्र में 2.04 करोड़ रुपए की बेस कीमत वाले सागौन की अवैध कटाई के मामले ने पूरे प्रदेश में चर्चा का विषय बना दिया। यह कांड वन संरक्षण और पर्यावरण सुरक्षा के लिहाज से गंभीर माना जा रहा है। इस विवाद के बीच वन विभाग ने तत्काल प्रभाव से डीएफओ मयंक गुर्जर और एसडीओ का तबादला कर दिया।

मयंक गुर्जर को अब प्रधान मुख्य वन संरक्षक और वन बल प्रमुख मुख्यालय में स्थानांतरित किया गया है। यह तबादला एक तरफ़ उनके अनुभव और सेवा को ध्यान में रखते हुए प्रमोशन के रूप में भी देखा जा रहा है, वहीं दूसरी तरफ़ इसे सागौन अवैध कटाई मामले के संदर्भ में प्रशासनिक कदम के तौर पर भी देखा जा रहा है।
एसडीओ का तबादला भी उसी दिशा में किया गया, जिससे यह संकेत मिलता है कि वन विभाग अवैध कटाई के मामलों में जवाबदेही तय करने के साथ-साथ भविष्य में निगरानी और संरक्षण को भी मज़बूत करना चाहता है। अधिकारियों के अनुसार, इन तबादलों के बाद वन क्षेत्र की निगरानी और नियंत्रण प्रणाली में सुधार की उम्मीद की जा रही है।
अवैध सागौन कटाई की पृष्ठभूमि
इटारसी वन परिक्षेत्र में हाल ही में सामने आया यह मामला सागौन की अवैध कटाई का था, जिसकी अनुमानित मूल्य राशि 2.04 करोड़ रुपए बताई जा रही है। यह घटना न केवल वन विभाग के अंदर सुशासन और निगरानी प्रणाली की कमजोरियों को उजागर करती है, बल्कि इसे पर्यावरण और आर्थिक दृष्टि से भी गंभीर माना जा रहा है।
सागौन की लकड़ी की अवैध कटाई वन क्षेत्र की जैव विविधता, स्थानीय जलवायु और वन्य जीवों के लिए गंभीर खतरा पैदा करती है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की घटनाएं वन विभाग में भ्रष्टाचार और प्रशासनिक लापरवाही के कारण बढ़ रही हैं।
वन विभाग की प्रतिक्रिया और अधिकारियों का तबादला
वन विभाग ने अवैध कटाई मामले की गहन जांच शुरू कर दी थी। जांच के दौरान यह सामने आया कि कटाई में क्षेत्रीय अधिकारी और वन कर्मियों की निगरानी प्रणाली में कमज़ोरी रही। इसी को देखते हुए डीएफओ मयंक गुर्जर को प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख मुख्यालय में प्रमोट करते हुए स्थानांतरित किया गया।
एसडीओ का तबादला भी उसी दिशा में किया गया, ताकि वन क्षेत्र में निगरानी और नियंत्रण मजबूत हो सके। विभाग का मानना है कि उच्च पदस्थ अधिकारियों का तबादला और प्रमोशन उनके अनुभव और योग्यता को मान्यता देने के साथ-साथ प्रशासनिक सुधार का एक महत्वपूर्ण कदम है।
सागौन की महत्वता और अवैध कटाई का प्रभाव
सागौन की लकड़ी भारतीय वन क्षेत्र की सबसे मूल्यवान और टिकाऊ लकड़ी मानी जाती है। इसकी लकड़ी की मांग न केवल देश में बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी अधिक है। अवैध कटाई के कारण वन क्षेत्र का आर्थिक और पर्यावरणीय संतुलन बिगड़ता है।
वन विशेषज्ञों का कहना है कि यदि अवैध कटाई पर रोक नहीं लगाई गई, तो इससे वन क्षेत्र में जैव विविधता पर गंभीर प्रभाव पड़ेगा। इसके अलावा, स्थानीय लोगों की आजीविका और वन्य जीव संरक्षण भी खतरे में आ सकता है।
प्रशासनिक सुधार और निगरानी के उपाय
वन विभाग ने कहा है कि अधिकारियों के तबादले के बाद नई निगरानी प्रणाली लागू की जाएगी। इसमें सैटेलाइट मॉनिटरिंग, नियमित फील्ड निरीक्षण और स्थानीय वन संरक्षकों की रिपोर्टिंग प्रणाली को अधिक प्रभावी बनाया जाएगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए सिर्फ़ पदस्थापना और प्रमोशन ही पर्याप्त नहीं हैं। इसके लिए वन विभाग को पारदर्शिता, जवाबदेही और टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करते हुए अवैध कटाई की रोकथाम करनी होगी।
सामाजिक और कानूनी दृष्टिकोण
सागौन की अवैध कटाई केवल प्रशासनिक या आर्थिक मामला नहीं है। यह पर्यावरण और समाज के लिए भी गंभीर चुनौती है। स्थानीय लोग और वन्यजीव इस कटाई से प्रत्यक्ष प्रभावित होते हैं। कानूनी दृष्टि से, अवैध कटाई वन संरक्षण कानूनों और वन्य जीव संरक्षण अधिनियम के तहत गंभीर अपराध माना जाता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि अधिकारियों के तबादले से वन क्षेत्र में नियम-कानून का पालन सुनिश्चित किया जा सकेगा और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने में मदद मिलेगी।
