मध्य प्रदेश के सागर जिले में भ्रष्टाचार के खिलाफ एक बड़ी कार्रवाई सामने आई है, जिसने सरकारी योजनाओं की जमीनी सच्चाई को फिर से उजागर कर दिया है। जल जीवन मिशन जैसी महत्वाकांक्षी योजना, जिसका उद्देश्य हर घर तक शुद्ध पेयजल पहुंचाना है, उसी योजना के नाम पर कमीशनखोरी का खेल खेला जा रहा था। लोकायुक्त की टीम ने इस खेल पर पर्दा उठाते हुए लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के अधीक्षण यंत्री एसएल बाथम को डेढ़ लाख रुपये की रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया।

यह कार्रवाई केवल एक गिरफ्तारी नहीं है, बल्कि यह उस सिस्टम पर सवाल है, जहां जनकल्याण की योजनाएं भी भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ जाती हैं। ठेकेदार की शिकायत के बाद लोकायुक्त ने योजनाबद्ध तरीके से जाल बिछाया और आरोपी इंजीनियर को उसी वक्त पकड़ा, जब वह रिश्वत की रकम स्वीकार कर रहा था।
शिकायत से कार्रवाई तक का पूरा घटनाक्रम
इस पूरे मामले की शुरुआत एक ठेकेदार की शिकायत से हुई, जिसने रिश्वत न देने पर काम रुकवाने और भुगतान अटकाने के दबाव का सामना किया। बिहार निवासी ठेकेदार शैलेष कुमार ने लोकायुक्त कार्यालय में पहुंचकर बताया कि वह वर्ष 2022 से सागर और केसली विकासखंड के कई गांवों में जल जीवन मिशन के तहत नल-जल योजना का कार्य कर रहे हैं।
इन कार्यों में गांवों में पाइपलाइन बिछाना, पानी की टंकियों का निर्माण और घर-घर नल कनेक्शन देना शामिल था। प्रारंभिक दौर में कार्य सामान्य रूप से चलता रहा, लेकिन बाद में शासन स्तर पर जब इन कार्यों का पुनः निरीक्षण हुआ तो कुछ कार्यों को अधूरा बताया गया।
अधूरे काम का बहाना, रिश्वत का दबाव
शिकायतकर्ता के अनुसार, निरीक्षण के बाद अधीक्षण यंत्री एसएल बाथम ने उन्हें अपने कार्यालय बुलाया और साफ शब्दों में कहा कि अगर अधूरे बताए गए कार्यों को दोबारा शुरू कराना है और पहले किए गए कार्यों के बिलों का भुगतान चाहिए, तो इसके लिए मोटी रकम देनी होगी।
आरोप है कि इंजीनियर ने कुल छह लाख रुपये की रिश्वत की मांग की। यह रकम अलग-अलग किस्तों में देने का दबाव बनाया गया। ठेकेदार के सामने स्थिति यह थी कि यदि वह रकम नहीं देता तो न केवल उसका भुगतान अटक जाता, बल्कि आगे के कार्य भी ठप कर दिए जाते।
लोकायुक्त का जाल और रंगे हाथ गिरफ्तारी
काफी सोच-विचार के बाद ठेकेदार ने रिश्वत देने के बजाय कानून का सहारा लेने का फैसला किया। उसने लोकायुक्त कार्यालय में लिखित शिकायत दर्ज कराई और पूरे मामले की जानकारी दी। शिकायत की प्राथमिक जांच में आरोप सही पाए गए, जिसके बाद लोकायुक्त की टीम ने ट्रैप की योजना बनाई।
योजना के अनुसार, आरोपी इंजीनियर को डेढ़ लाख रुपये की पहली किस्त देने की बात तय हुई। तय दिन और स्थान पर जैसे ही एसएल बाथम ने ठेकेदार से रिश्वत की रकम ली, लोकायुक्त की टीम ने उसे रंगे हाथ पकड़ लिया। मौके पर ही नोटों की जांच की गई और कानूनी प्रक्रिया पूरी करते हुए गिरफ्तारी की गई।
जल जीवन मिशन पर उठे गंभीर सवाल
इस कार्रवाई के बाद जल जीवन मिशन के क्रियान्वयन पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। यह योजना देश और राज्य सरकार की प्राथमिक योजनाओं में शामिल है, जिसका उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छ पेयजल की उपलब्धता सुनिश्चित करना है।
लेकिन जब इसी योजना के तहत काम करने वाले अधिकारी कमीशन मांगने लगें, तो इसका सीधा असर आम जनता पर पड़ता है। गांवों में रहने वाले लोग वर्षों से पानी की समस्या से जूझ रहे हैं और ऐसे में भ्रष्टाचार उनकी परेशानी को और बढ़ा देता है।
2022 से चल रहे थे काम, तभी से बना दबाव
शिकायतकर्ता ठेकेदार ने बताया कि वह पिछले तीन वर्षों से इन परियोजनाओं पर काम कर रहे थे। शुरुआत में प्रशासनिक सहयोग ठीक रहा, लेकिन जैसे-जैसे भुगतान की प्रक्रिया आई, वैसे-वैसे दबाव बढ़ने लगा।
अधूरे काम का हवाला देकर भुगतान रोका गया, जबकि कई जगह कार्य तकनीकी कारणों और प्रशासनिक निर्देशों के चलते रुका था। इसके बावजूद जिम्मेदारी ठेकेदार पर डाल दी गई और इसे रिश्वत वसूली का जरिया बना लिया गया।
लोकायुक्त की कार्रवाई से प्रशासन में हलचल
एसएल बाथम की गिरफ्तारी के बाद पीएचई विभाग में हड़कंप मच गया है। अधिकारी-कर्मचारी इस कार्रवाई को लेकर चर्चा में हैं। लोकायुक्त की इस कार्रवाई को भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त संदेश के रूप में देखा जा रहा है।
यह भी माना जा रहा है कि इस मामले के बाद अन्य लंबित परियोजनाओं और भुगतानों की भी जांच हो सकती है। यदि जांच का दायरा बढ़ता है, तो और भी बड़े खुलासे सामने आ सकते हैं।
कानून की नजर में अपराध और संभावित सजा
लोकायुक्त द्वारा दर्ज किए गए मामले में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धाराएं लागू की गई हैं। यदि आरोप सिद्ध होते हैं, तो आरोपी को लंबी जेल की सजा के साथ आर्थिक दंड का भी सामना करना पड़ सकता है।
इसके अलावा, सरकारी सेवा से निलंबन और बर्खास्तगी जैसी विभागीय कार्रवाई भी संभव है। इस तरह की कार्रवाई न केवल एक व्यक्ति को सजा देती है, बल्कि पूरे सिस्टम के लिए चेतावनी बनती है।
आम लोगों में नाराजगी और उम्मीद
इस मामले के सामने आने के बाद आम लोगों में नाराजगी भी है और उम्मीद भी। नाराजगी इसलिए कि जनकल्याण की योजनाओं में भी भ्रष्टाचार हो रहा है, और उम्मीद इसलिए कि लोकायुक्त जैसी संस्थाएं अभी भी सक्रिय हैं और कार्रवाई कर रही हैं।
ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों का कहना है कि यदि ऐसे अधिकारियों पर समय रहते कार्रवाई होती रहे, तो योजनाओं का लाभ सही मायने में जरूरतमंदों तक पहुंच सकेगा।
निष्कर्ष: भ्रष्टाचार के खिलाफ एक मजबूत संकेत
सागर में हुई यह कार्रवाई केवल एक गिरफ्तारी नहीं है, बल्कि यह एक मजबूत संकेत है कि भ्रष्टाचार चाहे किसी भी स्तर पर हो, वह छिपा नहीं रह सकता। जल जीवन मिशन जैसी योजना में रिश्वत मांगना न केवल कानूनन अपराध है, बल्कि नैतिक रूप से भी गंभीर अपराध है।
लोकायुक्त की यह कार्रवाई आने वाले समय में अन्य अधिकारियों के लिए भी चेतावनी है कि सरकारी पद का दुरुपयोग अब भारी पड़ सकता है।
