वैश्विक टेक इंडस्ट्री में साल 2026 की शुरुआत एक बड़े बदलाव के साथ हुई है। जिन कंपनियों को वर्षों से मार्केट वैल्यूएशन की दौड़ में स्थिर देखा जा रहा था, वहां अचानक बड़ा उलटफेर देखने को मिला है। दुनिया की सबसे प्रभावशाली और ताकतवर टेक कंपनियों में शामिल अल्फाबेट इंक ने एक ऐसा मुकाम हासिल किया है, जिसने निवेशकों से लेकर टेक एक्सपर्ट्स तक सभी को चौंका दिया है।

गूगल की पैरेंट कंपनी अल्फाबेट इंक अब दुनिया की दूसरी सबसे मूल्यवान कंपनी बन गई है। इस उपलब्धि की खास बात यह है कि अल्फाबेट ने सात साल बाद पहली बार आईफोन बनाने वाली दिग्गज कंपनी ऐपल को पीछे छोड़ा है। इससे पहले साल 2019 में ऐसा देखने को मिला था, जब अल्फाबेट ने ऐपल से ज्यादा वैल्यू हासिल की थी।
मार्केट वैल्यूएशन में कैसे बदली तस्वीर
हालिया आंकड़ों के अनुसार अल्फाबेट का कुल मार्केट कैप बढ़कर 3.892 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच गया है। वहीं दूसरी ओर ऐपल की वैल्यू घटकर 3.863 ट्रिलियन डॉलर रह गई है। दोनों कंपनियों के बीच यह अंतर भले ही देखने में कम लगे, लेकिन टेक इंडस्ट्री के लिहाज से इसका प्रतीकात्मक महत्व बहुत बड़ा है।
इस रेस में अभी भी पहला स्थान एनवीडिया के पास बना हुआ है, जिसकी मार्केट वैल्यू 4.604 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच चुकी है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और सेमीकंडक्टर टेक्नोलॉजी में एनवीडिया की मजबूत पकड़ ने उसे इस सूची में शीर्ष पर बनाए रखा है।
सात साल का इंतजार और अल्फाबेट की वापसी
साल 2019 के बाद से ऐपल लगातार अल्फाबेट से आगे बना हुआ था। आईफोन, मैकबुक, आईपैड और अन्य प्रोडक्ट्स की मजबूत बिक्री के चलते ऐपल की मार्केट वैल्यू लंबे समय तक स्थिर रही। लेकिन बीते एक साल में तस्वीर तेजी से बदली है।
अल्फाबेट ने न सिर्फ अपने पुराने बिजनेस मॉडल को मजबूत किया, बल्कि नई तकनीकों में आक्रामक निवेश कर खुद को भविष्य की कंपनी के रूप में स्थापित किया। यही वजह है कि सात साल बाद पहली बार उसने ऐपल को पछाड़ने में सफलता हासिल की।
शेयर बाजार में अल्फाबेट की शानदार छलांग
बुधवार को अल्फाबेट के शेयर में जबरदस्त तेजी देखने को मिली। कंपनी का शेयर 2.51 फीसदी की बढ़त के साथ 322.43 डॉलर पर बंद हुआ। अगर पिछले एक साल की बात करें तो अल्फाबेट के शेयर ने निवेशकों को करीब 64.73 फीसदी का रिटर्न दिया है।
यह रिटर्न टेक सेक्टर में किसी भी बड़ी कंपनी के लिए बेहद प्रभावशाली माना जाता है। इससे साफ है कि निवेशकों का भरोसा अल्फाबेट के बिजनेस मॉडल और भविष्य की योजनाओं पर लगातार बढ़ रहा है।
ऐपल की धीमी रफ्तार बनी अंतर की वजह
दूसरी ओर ऐपल के शेयर में हाल के महीनों में अपेक्षाकृत सुस्ती देखने को मिली है। बुधवार को ऐपल का शेयर 0.77 फीसदी की गिरावट के साथ 260.33 डॉलर पर बंद हुआ। पिछले एक साल में ऐपल के शेयर में केवल 7.49 फीसदी की ही बढ़त दर्ज की गई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि ऐपल का बिजनेस अभी भी मजबूत है, लेकिन नए इनोवेशन और ग्रोथ के मामले में कंपनी को कुछ चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। यही कारण है कि निवेशकों का रुझान फिलहाल अल्फाबेट और एनवीडिया जैसी कंपनियों की ओर ज्यादा दिखाई दे रहा है।
एनवीडिया की बादशाहत बरकरार
मार्केट वैल्यू के मामले में एनवीडिया अभी भी सबसे आगे है। बीते एक साल में उसके शेयर में 25.32 फीसदी की तेजी दर्ज की गई है। एआई चिप्स, डेटा सेंटर्स और हाई-परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग के क्षेत्र में एनवीडिया की पकड़ उसे बाकी कंपनियों से अलग बनाती है।
हालांकि इस खबर का केंद्र एनवीडिया नहीं, बल्कि अल्फाबेट की वह छलांग है, जिसने ऐपल को पीछे छोड़ दिया है और टेक इंडस्ट्री में एक नई बहस को जन्म दिया है।
अल्फाबेट की सफलता के पीछे सबसे बड़ा कारण
अल्फाबेट की मार्केट वैल्यू में आई इस तेजी के पीछे कई कारण हैं, लेकिन सबसे अहम वजह उसका जनरेटिव आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस प्लेटफॉर्म Gemini माना जा रहा है।
Gemini के जरिए अल्फाबेट ने एआई की दुनिया में अपनी स्थिति को और मजबूत किया है। सर्च, क्लाउड, विज्ञापन और प्रोडक्टिविटी टूल्स में Gemini का बढ़ता इस्तेमाल कंपनी की आय और भविष्य की संभावनाओं को नई ऊंचाई दे रहा है।
Waymo और भविष्य की मोबिलिटी
अल्फाबेट के पास Waymo जैसी कंपनी भी है, जो अमेरिका में रोबोटैक्सी मार्केट की प्रमुख खिलाड़ी बन चुकी है। Waymo पहले से ही फीनिक्स, सैन फ्रांसिस्को बे एरिया, लॉस एंजेलिस, अटलांटा और ऑस्टिन जैसे बड़े शहरों में आम लोगों के लिए कमर्शियल रोबोटैक्सी सेवाएं चला रही है।
ड्राइवरलेस टेक्नोलॉजी को लेकर जिस तरह का भरोसा Waymo ने हासिल किया है, उसने अल्फाबेट के भविष्य को और मजबूत बनाया है। निवेशक इसे आने वाले वर्षों में बड़ा रेवेन्यू जनरेटर मान रहे हैं।
सुंदर पिचाई की भूमिका और नेतृत्व
अल्फाबेट की इस ऐतिहासिक उपलब्धि के पीछे भारतीय मूल के सुंदर पिचाई की भूमिका को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। सुंदर पिचाई अल्फाबेट के सीईओ हैं और उनकी रणनीतियों ने कंपनी को नई दिशा दी है।
आईआईटी खड़गपुर से इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने के बाद सुंदर पिचाई ने अमेरिका के स्टैनफोर्ड विश्वविद्यालय से आगे की शिक्षा हासिल की। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत मटेरियल इंजीनियर के रूप में की थी।
गूगल से अल्फाबेट तक का सफर
साल 2004 में सुंदर पिचाई एक मैनेजमेंट एक्जीक्यूटिव के रूप में गूगल से जुड़े। धीरे-धीरे उन्होंने अपने काम से नेतृत्व की क्षमता साबित की।
साल 2015 में गूगल के सह-संस्थापक लैरी पेज ने उन्हें गूगल का सीईओ बनाया। इसके बाद साल 2019 में उन्हें अल्फाबेट के सीईओ की जिम्मेदारी भी सौंपी गई।
उनके नेतृत्व में अल्फाबेट ने एआई, क्लाउड कंप्यूटिंग, ऑटोमेशन और भविष्य की तकनीकों में बड़े निवेश किए, जिसका नतीजा आज दुनिया देख रही है।
निवेशकों का भरोसा और भविष्य की उम्मीदें
अल्फाबेट की मौजूदा स्थिति यह दिखाती है कि निवेशक कंपनी के दीर्घकालिक विजन पर भरोसा कर रहे हैं। एआई, रोबोटैक्सी और क्लाउड जैसे सेक्टर आने वाले समय में टेक इंडस्ट्री की दिशा तय करेंगे और अल्फाबेट इन सभी क्षेत्रों में मजबूत मौजूदगी रखता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यही रफ्तार बनी रही, तो आने वाले समय में अल्फाबेट और भी बड़े रिकॉर्ड बना सकता है।
निष्कर्ष
सात साल बाद अल्फाबेट का ऐपल से आगे निकलना सिर्फ एक आंकड़ा नहीं है, बल्कि यह टेक इंडस्ट्री में बदलते ट्रेंड्स का संकेत है। सुंदर पिचाई के नेतृत्व में अल्फाबेट ने यह साबित कर दिया है कि सही रणनीति, इनोवेशन और भविष्य पर फोकस के साथ कोई भी कंपनी खुद को नई ऊंचाइयों तक पहुंचा सकती है।
यह उपलब्धि न सिर्फ अल्फाबेट के लिए, बल्कि पूरी टेक दुनिया के लिए एक नया अध्याय है।
