दिल्ली के लक्ष्मी नगर इलाके में सामने आया ट्रिपल मर्डर का मामला न सिर्फ राजधानी, बल्कि पूरे देश को झकझोर देने वाला है। जिस घर में मां, बहन और भाई को सबसे सुरक्षित महसूस करना चाहिए था, वही घर उनके लिए मौत की आखिरी जगह बन गया। रिश्तों की गर्माहट, भरोसे की डोर और पारिवारिक अपनापन एक ही दोपहर में इस कदर टूट जाएगा, इसकी किसी ने कल्पना भी नहीं की थी।

इस हत्याकांड ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या इंसान के भीतर छिपा अंधेरा इतना गहरा हो सकता है कि वह अपने ही खून के रिश्तों को बेरहमी से खत्म कर दे। पुलिस की शुरुआती जांच में सामने आए तथ्य जितने चौंकाने वाले हैं, उतने ही भयावह भी। यह कहानी सिर्फ एक अपराध की नहीं है, बल्कि टूटते रिश्तों, मानसिक उलझनों और अनकहे तनावों की भी है।
लक्ष्मी नगर की वह दोपहर, जो कभी भुलाई नहीं जा सकेगी
घटना वाले दिन सब कुछ सामान्य सा था। घर में रोजमर्रा की हलचल थी। मां कविता, बेटी मेघना और छोटा बेटा मुकुल किसी अनहोनी की आशंका के बिना अपने ही घर में मौजूद थे। किसी को यह अंदाजा नहीं था कि जिस बेटे और भाई पर उन्होंने भरोसा किया, वही उनकी जिंदगी छीनने वाला है।
पुलिस जांच में सामने आया कि आरोपी यशवीर ने पूरी योजना के साथ इस वारदात को अंजाम दिया। यह कोई अचानक हुआ गुस्से का विस्फोट नहीं था, बल्कि पहले से सोचा-समझा कदम था। उसने ऐसा तरीका चुना, जिसमें शोर भी न हो और किसी को मदद मांगने का मौका भी न मिले।
मंदिर से शुरू हुई साजिश की पहली कड़ी
जांच के दौरान यह तथ्य सामने आया कि आरोपी यशवीर मंदिर से धतूरा लेकर आया था। आमतौर पर पूजा-पाठ और आस्था से जुड़ा यह पौधा इस मामले में मौत का जरिया बन गया। यशवीर ने धतूरे को पीसकर लड्डुओं में मिलाया और पूरे इत्मीनान से आठ लड्डू तैयार किए।
ये लड्डू कोई साधारण मिठाई नहीं थे, बल्कि उनमें मौत छिपी हुई थी। आरोपी ने बड़ी चालाकी से परिवार के सभी सदस्यों को ये लड्डू खिलाए। मां, बहन और भाई को दो-दो लड्डू दिए गए। भरोसे के रिश्ते में किसी को यह शक भी नहीं हुआ कि मिठास के साथ जहर भी निगल लिया गया है।
बेहोशी और मौत के बीच की खामोशी
लड्डू खाने के कुछ ही समय बाद बहन मेघना और छोटा भाई मुकुल बेहोश हो गए। धतूरे का असर तेजी से दिखने लगा। दोनों को संभलने या विरोध करने का कोई मौका नहीं मिला। लेकिन मां कविता पर इसका असर उतना जल्दी नहीं हुआ। वह पूरी तरह बेहोश नहीं हुईं।
यह वही पल था, जब आरोपी ने एक और खौफनाक कदम उठाया। उसने मां को सल्फास की गोली खिलाई। सल्फास, जिसे आमतौर पर जहर के रूप में जाना जाता है, इस साजिश का दूसरा हथियार बना। पुलिस को बाद में आरोपी के पास से सल्फास की गोलियों के दो पैकेट भी बरामद हुए।
मफलर बना मौत का औजार
जब मां, बहन और भाई पूरी तरह असहाय स्थिति में थे, तब आरोपी ने एक-एक कर तीनों का गला मफलर से घोंट दिया। यह हत्या दिनदहाड़े हुई, लेकिन घर के अंदर इतनी खामोशी थी कि किसी को भनक तक नहीं लगी। दोपहर करीब एक बजे के आसपास यह खौफनाक वारदात पूरी कर ली गई।
जिस मफलर का इस्तेमाल ठंड से बचने के लिए किया जाता है, वही यहां मौत का औजार बना। यह सोचकर ही सिहरन होती है कि एक ही परिवार के तीन लोगों को इतने निर्मम तरीके से खत्म कर दिया गया।
खुदकुशी का दावा और अधूरी हिम्मत
पुलिस पूछताछ में आरोपी यशवीर ने दावा किया कि परिवार वालों की हत्या करने के बाद वह खुद भी सल्फास खाकर आत्महत्या करना चाहता था। लेकिन उसने यह भी स्वीकार किया कि वह खुदकुशी की हिम्मत नहीं जुटा सका।
यह बयान अपने आप में कई सवाल खड़े करता है। अगर वह खुद भी मरना चाहता था, तो फिर इतनी सुनियोजित योजना क्यों बनाई गई। क्या यह सिर्फ एक बहाना है, या फिर अपराध के बाद उपजी डर और पश्चाताप की स्थिति। इन सभी पहलुओं की जांच अभी जारी है।
पोस्टमॉर्टम और अंतिम विदाई
घटना के बाद पुलिस ने तीनों शवों को पोस्टमॉर्टम के लिए मौलाना आजाद मेडिकल कॉलेज की मोर्चरी भेजा। मेडिकल बोर्ड द्वारा पोस्टमॉर्टम किया गया, ताकि मौत के कारणों को वैज्ञानिक रूप से स्पष्ट किया जा सके।
पोस्टमॉर्टम के बाद शव परिवार के अन्य सदस्यों को सौंप दिए गए। इसके बाद परिजन शवों को लेकर करनाल रवाना हो गए, जहां गांव में ही तीनों का अंतिम संस्कार किया गया। जिस घर में कुछ दिन पहले तक हंसी-खुशी थी, वहां अब मातम और सन्नाटा पसरा हुआ है।
पुलिस जांच और मानसिक स्थिति पर सवाल
पुलिस अधिकारियों के अनुसार शुरुआती जांच में आरोपी का व्यवहार सामान्य नहीं लग रहा है। डीसीपी स्तर के अधिकारियों का कहना है कि यशवीर की मानसिक स्थिति की भी गहराई से जांच की जा रही है। फिलहाल उससे लगातार पूछताछ हो रही है और कोर्ट से रिमांड लेकर मामले की हर कड़ी जोड़ी जा रही है।
पुलिस आरोपी को घटनास्थल पर ले जाकर क्राइम सीन को रीक्रिएट करने की तैयारी में है। इससे यह समझने में मदद मिलेगी कि किस क्रम में पूरी वारदात को अंजाम दिया गया और कहीं इसमें किसी और की भूमिका तो नहीं है।
आर्थिक तंगी नहीं, फिर क्या थी वजह
इस हत्याकांड को लेकर शुरुआत में कई तरह की अटकलें लगाई गईं। लेकिन परिवार के करीबी रिश्तेदारों ने साफ किया कि परिवार किसी भी तरह की आर्थिक तंगी से नहीं जूझ रहा था। आरोपी के साले जसपाल सिंह ने बताया कि परिवार आर्थिक रूप से ठीक-ठाक था।
परिवार के पास संसाधनों की कमी नहीं थी और रोजमर्रा की जरूरतें आराम से पूरी हो रही थीं। ऐसे में यह सवाल और गहरा हो जाता है कि आखिर ऐसा क्या हुआ, जिसने आरोपी को इतना बड़ा कदम उठाने पर मजबूर कर दिया।
पिता का आरोप और पत्नी पर शक
आरोपी के पिता धर्मवीर सिंह ने इस मामले में एक और चौंकाने वाला दावा किया है। उनका कहना है कि इस ट्रिपल मर्डर में अकेले यशवीर का हाथ नहीं हो सकता। उन्होंने अपने बेटे की पत्नी सोनी पर भी इस हत्याकांड में शामिल होने का आरोप लगाया है।
धर्मवीर सिंह के अनुसार, यशवीर ने परिवार की मर्जी के खिलाफ शादी की थी और उसी के बाद से परिवार में तनाव की स्थिति बनी हुई थी। पिता का यह भी कहना है कि शादी के समय 60 लाख रुपये की जमीन बेची गई थी, जिससे परिवार के भीतर मतभेद और गहरे हो गए।
परिवार की मर्जी के खिलाफ प्रेम विवाह
यशवीर ने साल 2019 में परिवार की इच्छा के विरुद्ध गैर बिरादरी की लड़की सोनी से प्रेम विवाह किया था। यह फैसला परिवार के कई सदस्यों को स्वीकार नहीं था। इसके बावजूद यशवीर अपने फैसले पर अडिग रहा।
शादी के बाद 2020 में वह पूरे परिवार को लेकर दिल्ली आ गया और लक्ष्मी नगर में किराए के मकान में रहने लगा। यहां उसने बाउंसर की नौकरी की और कभी-कभी किसी की कार भी चलाता था। बाहरी तौर पर जिंदगी सामान्य दिख रही थी, लेकिन भीतर ही भीतर रिश्तों में दरारें बढ़ती जा रही थीं।
पिता का दूरी बनाना, लेकिन संपर्क कायम
बेटे के प्रेम विवाह से नाराज होकर पिता धर्मवीर सिंह घर पर कम ही आते थे। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं था कि उन्होंने परिवार से पूरी तरह नाता तोड़ लिया था। वह लगातार फोन पर बातचीत करते रहते थे और आर्थिक मदद भी भेजते थे।
हत्याकांड से ठीक एक दिन पहले भी उन्होंने अपनी पत्नी कविता, बेटी मेघना और बेटे मुकुल से बातचीत की थी। उस बातचीत में किसी तरह की परेशानी या तनाव का संकेत नहीं मिला। सभी खुश नजर आ रहे थे। यही बात इस पूरे मामले को और रहस्यमय बना देती है।
रिश्तों की उलझन और अनकहा तनाव
जांच से यह साफ होता जा रहा है कि यह मामला सिर्फ एक अपराध नहीं, बल्कि लंबे समय से चल रहे पारिवारिक तनाव और मानसिक दबाव का परिणाम हो सकता है। प्रेम विवाह, परिवार की नाराजगी, पत्नी और परिवार के बीच संतुलन बनाने की कोशिश, ये सभी चीजें मिलकर एक विस्फोटक स्थिति बना सकती हैं।
हालांकि, यह भी सच है कि किसी भी हालात में इस तरह की हिंसा को सही नहीं ठहराया जा सकता। तीन निर्दोष लोगों की जान लेना किसी भी कारण से जायज नहीं हो सकता।
समाज के लिए चेतावनी
लक्ष्मी नगर का यह ट्रिपल मर्डर केस समाज के लिए एक गंभीर चेतावनी है। यह दिखाता है कि अगर मानसिक स्वास्थ्य, पारिवारिक संवाद और भावनात्मक तनाव को समय रहते नहीं समझा गया, तो इसके परिणाम कितने भयावह हो सकते हैं।
यह मामला यह भी सवाल उठाता है कि क्या हम अपने आसपास के लोगों के मानसिक हालात को समझने में चूक रहे हैं। क्या हम रिश्तों में संवाद की कमी को नजरअंदाज कर रहे हैं। शायद अगर समय रहते इन बातों पर ध्यान दिया जाता, तो यह दर्दनाक घटना टाली जा सकती थी।
आगे की जांच और इंतजार
फिलहाल पुलिस हर एंगल से जांच कर रही है। आरोपी की मानसिक स्थिति, पारिवारिक संबंध, पत्नी की भूमिका और घटनाक्रम की टाइमलाइन, सभी बिंदुओं पर बारीकी से पड़ताल की जा रही है। आने वाले दिनों में इस मामले से जुड़े और भी तथ्य सामने आ सकते हैं।
लेकिन जो सच अब कभी नहीं बदलेगा, वह यह है कि एक ही परिवार के तीन लोगों की जिंदगी एक झटके में खत्म हो गई। उनके पीछे रह गया है एक ऐसा सवाल, जिसका जवाब शायद कभी पूरी तरह नहीं मिल पाएगा कि आखिर अपनों को मारने की वजह क्या थी।
