भारत ने वित्त वर्ष 2025-26 में अपनी आर्थिक वृद्धि के लिए जो अनुमान पेश किया है, वह यह दर्शाता है कि देश की अर्थव्यवस्था वैश्विक दबावों और नीतिगत चुनौतियों के बावजूद मजबूत बनी हुई है। राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO) ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए वास्तविक जीडीपी वृद्धि को 7.4 प्रतिशत तक बढ़ा दिया है, जो पिछले वित्त वर्ष के 6.5 प्रतिशत से उल्लेखनीय वृद्धि है। यह वृद्धि भारत की आर्थिक नीतियों की प्रभावशीलता और सेवा क्षेत्र के मजबूत प्रदर्शन का परिणाम मानी जा रही है।

सेवा क्षेत्र की भूमिका
अर्थशास्त्रियों का मानना है कि भारत की इस तेज रफ्तार में सबसे बड़ा योगदान सेवा क्षेत्र का रहा है। बीते कुछ वर्षों में सूचना प्रौद्योगिकी, वित्तीय सेवाएं, ई-कॉमर्स और हेल्थकेयर जैसे सेक्टरों में निवेश और विस्तार हुआ है। इसके अलावा, डिजिटल सेवाओं और स्टार्टअप इकोसिस्टम ने भी अर्थव्यवस्था में नई ऊर्जा प्रदान की है। इन सेक्टरों की बढ़त ने न केवल रोजगार के अवसर बढ़ाए हैं, बल्कि जीडीपी पर भी सकारात्मक प्रभाव डाला है।
निवेश और खपत में मजबूती
राष्ट्रीय आर्थिक रिपोर्ट के अनुसार निवेश और घरेलू खपत में भी मजबूत संकेत दिखाई दे रहे हैं। उपभोक्ता खर्च में बढ़ोतरी, शहरों में खरीद क्षमता में वृद्धि और ग्रामीण क्षेत्रों में उपभोक्ता विश्वास की बहाली ने अर्थव्यवस्था को तेजी से आगे बढ़ाया है। सार्वजनिक और निजी निवेश दोनों क्षेत्रों में विस्तार होने से उद्योग और उत्पादन क्षेत्र में सकारात्मक बदलाव दिख रहे हैं।
वैश्विक दबावों और टैरिफ की चुनौती
पिछले साल अमेरिका द्वारा लगाए गए टैरिफ़ ने विश्व स्तर पर व्यापार और निवेश पर असर डाला था। हालांकि, भारत ने इस चुनौती को अवसर में बदलते हुए निर्यात और घरेलू उत्पादन में मजबूती दिखाई। उद्योगपतियों और निवेशकों की रणनीतिक तैयारी और सरकार की आर्थिक नीतियों ने टैरिफ़ के दुष्प्रभाव को काफी हद तक कम कर दिया। इस प्रकार, भारत की जीडीपी वृद्धि वैश्विक दबावों के बावजूद ऊंचाई पर बनी रही।
वास्तविक और नॉमिनल जीडीपी में वृद्धि
रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 में भारत की वास्तविक जीडीपी 201.90 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचने का अनुमान है। वहीं, नॉमिनल जीडीपी 357.14 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचने की उम्मीद है। यह आंकड़े न केवल आर्थिक विकास की दिशा में प्रगति दर्शाते हैं, बल्कि देश की वित्तीय स्थिरता और निवेश आकर्षण का भी संकेत हैं।
रोजगार सृजन और आर्थिक अवसर
तेज आर्थिक वृद्धि का सकारात्मक असर रोजगार पर भी दिख रहा है। सेवा क्षेत्र, विनिर्माण और स्टार्टअप्स ने नए रोजगार सृजन में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि और ग्रामीण उद्योगों के विकास ने भी रोजगार के अवसर बढ़ाए हैं। रोजगार में बढ़ोतरी से उपभोक्ता विश्वास और घरेलू खपत में भी वृद्धि हुई है।
डिजिटल और स्टार्टअप इकोसिस्टम का प्रभाव
भारत में डिजिटल अर्थव्यवस्था और स्टार्टअप इकोसिस्टम ने पिछले कुछ वर्षों में अभूतपूर्व वृद्धि दर्ज की है। ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स, फिनटेक और डिजिटल मार्केटिंग में निवेश ने न केवल वित्तीय वृद्धि को बढ़ावा दिया, बल्कि रोजगार के नए अवसर भी पैदा किए। इन क्षेत्रों में निरंतर नवाचार और निवेश ने सेवा क्षेत्र की जीडीपी योगदान को मजबूत किया है।
आर्थिक सुधार और नीतिगत समर्थन
सरकार द्वारा किए गए आर्थिक सुधार जैसे इन्वेस्टमेंट फ्रेंडली नीतियां, टैक्स सुधार, डिजिटल पेमेंट्स को बढ़ावा और स्टार्टअप्स के लिए अनुकूल माहौल ने निवेश को आकर्षित किया। इन उपायों ने निवेशकों के विश्वास को मजबूत किया और उत्पादन क्षेत्र में वृद्धि सुनिश्चित की।
ग्रामीण और अर्ध-शहरी अर्थव्यवस्था की बढ़त
ग्रामीण अर्थव्यवस्था में हाल के वर्षों में बढ़ोतरी हुई है। कृषि उत्पादकता में सुधार, ग्रामीण बुनियादी ढांचे का विकास और कृषि पर आधारित उद्योगों में निवेश ने ग्रामीण खपत को बढ़ावा दिया। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था ने देश की जीडीपी में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।
निर्यात में मजबूती और वैश्विक व्यापार
भारत के निर्यात में भी वृद्धि देखने को मिली है। वैश्विक बाजार में भारतीय वस्तुओं की मांग बढ़ी है। टेक्नोलॉजी, फार्मास्यूटिकल्स, आईटी सेवाओं और कृषि उत्पादों के निर्यात में तेजी आई है। निर्यात में यह मजबूती विदेशी मुद्रा अर्जन और विदेशी निवेश को भी प्रोत्साहित कर रही है।
वित्तीय स्थिरता और मुद्रास्फीति नियंत्रण
सरकार की वित्तीय नीतियों और केंद्रीय बैंक की निगरानी ने मुद्रास्फीति को नियंत्रित रखा है। महंगाई दर को स्थिर रखने और ब्याज दरों को संतुलित बनाए रखने से निवेशकों और उपभोक्ताओं का विश्वास बना रहा।
भारत की आर्थिक शक्ति और वैश्विक प्रभाव
इस विकास दर के साथ भारत दुनिया के बड़े आर्थिक शक्ति केंद्रों में अपनी जगह मजबूत कर रहा है। आर्थिक वृद्धि न केवल देश की वित्तीय स्थिति को मजबूत करती है, बल्कि वैश्विक आर्थिक मंच पर भारत की भूमिका और प्रभाव को भी बढ़ाती है।
भविष्य के लिए उम्मीदें
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर निवेश और खपत में यह रफ्तार बनी रहती है, तो भारत वित्त वर्ष 2026-27 में भी 7% से अधिक की वृद्धि दर हासिल कर सकता है। सेवा क्षेत्र, डिजिटल अर्थव्यवस्था और ग्रामीण विकास में निरंतर सुधार से यह लक्ष्य संभव लगता है।
