डिजिटल दौर में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म केवल संवाद का माध्यम नहीं रह गए हैं, बल्कि वे समाज की सोच, संस्कृति और सुरक्षा से भी सीधे तौर पर जुड़े हुए हैं। ऐसे में जब इन प्लेटफॉर्म्स पर नई तकनीक, खासकर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का इस्तेमाल होता है, तो उसकी जिम्मेदारी और भी बढ़ जाती है। हाल ही में ऐसा ही एक बड़ा मामला सामने आया, जिसमें सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X को सरकार के कड़े रुख के आगे झुकना पड़ा और उसे सार्वजनिक रूप से अपनी गलती स्वीकार करनी पड़ी।

एआई टूल Grok बना विवाद की जड़
इस पूरे विवाद की जड़ बना X का एआई टूल Grok, जिसे उपयोगकर्ताओं के अनुभव को बेहतर बनाने के उद्देश्य से पेश किया गया था। हालांकि, समय के साथ यह सामने आया कि Grok का इस्तेमाल कुछ लोग आपत्तिजनक और अश्लील सामग्री बनाने के लिए कर रहे हैं। खासतौर पर महिलाओं और नाबालिगों की अभद्र तस्वीरें एआई की मदद से तैयार कर सोशल मीडिया पर साझा की जा रही थीं।
यह मामला केवल नैतिकता का नहीं था, बल्कि कानून और सामाजिक सुरक्षा से भी जुड़ा हुआ था। जैसे-जैसे इस तरह की सामग्री की संख्या बढ़ती गई, वैसे-वैसे सरकार की चिंता भी गहराती गई।
भारत सरकार का सख्त रुख
भारत सरकार ने इस मामले को बेहद गंभीरता से लिया। आईटी से जुड़े नियमों के तहत सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर यह जिम्मेदारी होती है कि वे अपने प्लेटफॉर्म पर मौजूद कंटेंट की निगरानी करें और गैरकानूनी या आपत्तिजनक सामग्री को समय रहते हटाएं। जब यह पाया गया कि X अपने एआई से बने कंटेंट को प्रभावी ढंग से मॉडरेट नहीं कर पा रहा है, तो सरकार ने कड़ा रुख अपनाया।
सरकार की ओर से X को एक औपचारिक नोटिस भेजा गया, जिसमें साफ शब्दों में कहा गया कि प्लेटफॉर्म पर एआई जनरेटेड कंटेंट की निगरानी में गंभीर खामियां हैं। इसके साथ ही 72 घंटे का अल्टीमेटम भी दिया गया, ताकि आपत्तिजनक सामग्री पर तत्काल कार्रवाई की जा सके।
X का जवाब और सरकार की नाराजगी
सरकार के नोटिस के बाद X की ओर से जवाब जरूर दिया गया, लेकिन उसे पर्याप्त नहीं माना गया। अधिकारियों का मानना था कि कंपनी समस्या की गंभीरता को समझने में नाकाम रही है और सिर्फ औपचारिक जवाब देकर अपनी जिम्मेदारी से बचना चाहती है।
इस बीच, सोशल मीडिया और डिजिटल अधिकारों से जुड़े विशेषज्ञों ने भी इस मुद्दे पर खुलकर बात की। कई लोगों का कहना था कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के नाम पर इस तरह की सामग्री को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता, खासकर जब वह महिलाओं और बच्चों की गरिमा को ठेस पहुंचा रही हो।
आखिरकार X ने मानी गलती
सरकारी दबाव और बढ़ते अंतरराष्ट्रीय विरोध के बाद आखिरकार X को अपनी गलती स्वीकार करनी पड़ी। कंपनी ने यह माना कि उसके एआई टूल Grok का दुरुपयोग हुआ और प्लेटफॉर्म पर आपत्तिजनक कंटेंट फैलाया गया।
इसके बाद X ने भारतीय कानूनों का पालन करने की प्रतिबद्धता जताई और ठोस कार्रवाई करते हुए हजारों पोस्ट और सैकड़ों अकाउंट्स को प्लेटफॉर्म से हटा दिया। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, करीब 3,500 आपत्तिजनक पोस्ट ब्लॉक की गईं और 600 से अधिक अकाउंट्स को पूरी तरह डिलीट कर दिया गया।
एआई और कंटेंट मॉडरेशन की चुनौती
यह मामला एक बार फिर यह सवाल खड़ा करता है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के तेजी से बढ़ते उपयोग के साथ कंटेंट मॉडरेशन कितनी बड़ी चुनौती बन चुका है। एआई जहां एक ओर रचनात्मकता और सुविधा बढ़ाता है, वहीं दूसरी ओर इसके दुरुपयोग की आशंका भी उतनी ही बढ़ जाती है।
Grok के मामले में यह देखा गया कि एआई मॉडल ने उन सीमाओं का पालन नहीं किया, जिन्हें आमतौर पर दूसरे एआई प्लेटफॉर्म सख्ती से लागू करते हैं। यही वजह है कि यह विवाद इतना बड़ा रूप ले सका।
अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता बनाम सामाजिक जिम्मेदारी
X के मालिक एलन मस्क अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के प्रबल समर्थक माने जाते हैं। उनका मानना रहा है कि सोशल मीडिया पर विचारों को खुलकर व्यक्त करने की आज़ादी होनी चाहिए। हालांकि, इस मामले ने यह स्पष्ट कर दिया कि आज़ादी और जिम्मेदारी के बीच संतुलन बेहद जरूरी है।
जब अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता किसी की गरिमा, सुरक्षा और कानून का उल्लंघन करने लगे, तो उस पर रोक लगाना अनिवार्य हो जाता है। यही कारण है कि सरकारों को इस तरह के मामलों में हस्तक्षेप करना पड़ता है।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी बढ़ा दबाव
यह विवाद केवल भारत तक सीमित नहीं रहा। Grok के चलते X को लेकर दुनियाभर में सवाल उठने लगे। कई देशों ने इस प्लेटफॉर्म पर सख्ती करने के संकेत दिए। यूके और इंडोनेशिया जैसे देशों में X को लेकर ब्लॉक करने तक की चर्चा शुरू हो गई।
अंतरराष्ट्रीय दबाव ने भी X को अपने रुख में नरमी लाने के लिए मजबूर किया। कंपनी समझ चुकी थी कि अगर उसने समय रहते कदम नहीं उठाए, तो उसे वैश्विक स्तर पर बड़े नुकसान का सामना करना पड़ सकता है।
महिलाओं और नाबालिगों की सुरक्षा पर बड़ा सवाल
इस पूरे मामले में सबसे गंभीर पहलू महिलाओं और नाबालिगों की सुरक्षा से जुड़ा है। एआई की मदद से किसी की तस्वीर को डिजिटल रूप से बदलना और उसे आपत्तिजनक रूप में पेश करना न केवल अनैतिक है, बल्कि कई देशों में यह अपराध की श्रेणी में आता है।
सरकार और समाज दोनों के लिए यह चिंता का विषय है कि तकनीक का इस्तेमाल किस दिशा में हो रहा है। इस मामले ने यह दिखा दिया कि बिना सख्त नियमों और निगरानी के एआई किस तरह नुकसान पहुंचा सकता है।
भविष्य में क्या बदलेगा
X द्वारा की गई कार्रवाई के बाद यह उम्मीद की जा रही है कि कंपनी अपने एआई टूल और कंटेंट मॉडरेशन सिस्टम में बड़े बदलाव करेगी। आने वाले समय में एआई जनरेटेड कंटेंट पर ज्यादा सख्त नियंत्रण और स्पष्ट गाइडलाइंस लागू की जा सकती हैं।
harigeet pravaah के अनुसार, यह मामला भविष्य में सोशल मीडिया और एआई से जुड़े कानूनों को और मजबूत करने की दिशा में एक अहम मोड़ साबित हो सकता है।
सरकार का संदेश साफ
इस पूरे घटनाक्रम से सरकार का संदेश बिल्कुल साफ है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म्स को कानून से ऊपर नहीं समझा जाएगा। तकनीक चाहे कितनी भी उन्नत क्यों न हो, उसे सामाजिक जिम्मेदारी और कानूनी दायरे में रहकर ही काम करना होगा।
X के मामले में की गई कार्रवाई आने वाले समय में दूसरे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के लिए भी एक चेतावनी के रूप में देखी जा रही है।
निष्कर्ष
X और उसके एआई टूल Grok से जुड़ा यह विवाद सिर्फ एक प्लेटफॉर्म की गलती नहीं, बल्कि डिजिटल युग की बड़ी चुनौती को उजागर करता है। यह दिखाता है कि तकनीक के साथ-साथ मजबूत नियम, सख्त निगरानी और सामाजिक जिम्मेदारी कितनी जरूरी है। सरकार की सख्ती के बाद X का झुकना इस बात का संकेत है कि कानून और समाज की सीमाओं को नजरअंदाज करना किसी भी वैश्विक कंपनी के लिए आसान नहीं है।
