मध्य प्रदेश में हाल के दिनों में दूषित पेयजल से हुई मौतों ने प्रशासन और सरकार दोनों को गहरी चिंता में डाल दिया है। इंदौर से सामने आई घटनाओं ने यह स्पष्ट कर दिया कि अगर जल आपूर्ति व्यवस्था में जरा-सी भी लापरवाही होती है तो उसका खामियाजा आम नागरिकों को अपनी जान देकर चुकाना पड़ सकता है। इसी पृष्ठभूमि में राज्य सरकार ने एक व्यापक और सख्त पहल करते हुए “स्वच्छ जल अभियान” की शुरुआत की है, जिसका उद्देश्य केवल तात्कालिक समस्या का समाधान नहीं बल्कि भविष्य में ऐसी किसी भी त्रासदी को रोकना है।

मुख्यमंत्री ने किया अभियान का शुभारंभ
राज्य के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से इस अभियान का औपचारिक शुभारंभ किया। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि स्वच्छ पेयजल नागरिकों का बुनियादी अधिकार है और इसमें किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि सरकार की जिम्मेदारी केवल योजनाएं बनाने तक सीमित नहीं है, बल्कि उनके प्रभावी क्रियान्वयन को सुनिश्चित करना भी उतना ही आवश्यक है।
इंदौर की घटना बनी चेतावनी
इंदौर में दूषित पानी के कारण कई लोगों की मौत ने पूरे प्रदेश को झकझोर कर रख दिया। यह घटना केवल एक शहर तक सीमित नहीं थी, बल्कि इसने राज्यभर की जल आपूर्ति व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए। जांच में सामने आया कि पाइपलाइनों में गंदगी, लीकेज और निगरानी की कमी ने स्थिति को और गंभीर बना दिया। इसी अनुभव से सीख लेते हुए सरकार ने पूरे प्रदेश में एक समान और सख्त नीति लागू करने का निर्णय लिया।
दो चरणों में चलेगा स्वच्छ जल अभियान
मुख्यमंत्री ने उच्च स्तरीय बैठक में जानकारी दी कि यह अभियान दो चरणों में संचालित किया जाएगा। पहला चरण 10 जनवरी से 28 फरवरी तक चलेगा, जिसमें जल आपूर्ति व्यवस्था की गहन समीक्षा, सुधार और निगरानी की जाएगी। दूसरा चरण 1 मार्च से 31 मार्च तक चलेगा, जिसमें पहले चरण के निष्कर्षों के आधार पर आवश्यक सुधारों को अंतिम रूप दिया जाएगा। इन दोनों चरणों का उद्देश्य केवल तात्कालिक समाधान नहीं, बल्कि स्थायी व्यवस्था खड़ी करना है।
हर मंगलवार होगी जल सुनवाई
इस अभियान की सबसे अहम विशेषता यह है कि अब प्रदेशभर में हर मंगलवार पेयजल संबंधी जनसुनवाई आयोजित की जाएगी। इन सुनवाइयों में आम नागरिक सीधे अपनी शिकायतें और समस्याएं प्रशासन के सामने रख सकेंगे। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे इन शिकायतों को गंभीरता से लें और समयबद्ध समाधान सुनिश्चित करें। मुख्यमंत्री का मानना है कि जब तक जनता की आवाज सीधे प्रशासन तक नहीं पहुंचेगी, तब तक व्यवस्था में वास्तविक सुधार संभव नहीं है।
अधिकारियों की जवाबदेही तय
सरकार ने साफ कर दिया है कि यदि किसी भी स्तर पर लापरवाही पाई गई तो संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। जल आपूर्ति से जुड़े विभागों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि वे नियमित निरीक्षण करें, पानी की गुणवत्ता की जांच कराएं और किसी भी शिकायत को नजरअंदाज न करें। यह संदेश भी दिया गया है कि अब केवल फाइलों में रिपोर्ट तैयार करना पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि जमीन पर सुधार दिखना चाहिए।
तकनीक का सहारा लेकर होगी निगरानी
स्वच्छ जल अभियान के तहत आधुनिक तकनीक का भी व्यापक उपयोग किया जाएगा। पाइपलाइनों की जांच के लिए रोबोटिक सिस्टम का इस्तेमाल किया जाएगा ताकि यह पता लगाया जा सके कि कहां लीकेज है या गंदगी मिल रही है। इसके अलावा पानी की गुणवत्ता जांचने के लिए वैज्ञानिक तरीकों और आधुनिक उपकरणों का प्रयोग किया जाएगा। इससे यह सुनिश्चित किया जा सकेगा कि लोगों तक पहुंचने वाला पानी वास्तव में सुरक्षित है।
जल सुरक्षा को लेकर उच्च स्तरीय समीक्षा
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों के साथ बैठक कर जल सुरक्षा की विस्तृत समीक्षा की। उन्होंने कहा कि जल संकट केवल एक विभाग की समस्या नहीं है, बल्कि यह समन्वित प्रयास से ही हल हो सकता है। नगर निगम, पंचायत, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग और अन्य संबंधित एजेंसियों को एक साथ मिलकर काम करने के निर्देश दिए गए हैं।
ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों पर फोकस
स्वच्छ जल अभियान केवल शहरी क्षेत्रों तक सीमित नहीं रहेगा। ग्रामीण इलाकों में भी पानी की गुणवत्ता को लेकर विशेष ध्यान दिया जाएगा। कई बार ग्रामीण क्षेत्रों में संसाधनों की कमी के कारण समस्या और गंभीर हो जाती है। सरकार ने आश्वासन दिया है कि गांवों में भी नियमित जांच, पाइपलाइन सुधार और जनसुनवाई की व्यवस्था की जाएगी।
नागरिकों की भागीदारी पर जोर
मुख्यमंत्री ने नागरिकों से भी अपील की है कि वे जल संरक्षण और स्वच्छता के प्रति जागरूक रहें। यदि कहीं गंदा पानी आ रहा हो या पाइपलाइन में कोई समस्या दिखे तो तुरंत शिकायत दर्ज कराएं। सरकार का मानना है कि जब प्रशासन और जनता मिलकर काम करते हैं, तभी किसी अभियान को वास्तविक सफलता मिलती है।
भविष्य की योजना और स्थायी समाधान
इस अभियान को केवल एक अस्थायी कदम नहीं माना जा रहा है। सरकार इसे एक दीर्घकालिक रणनीति के रूप में देख रही है, ताकि आने वाले वर्षों में मध्य प्रदेश में जल जनित बीमारियों और दूषित पानी से होने वाली घटनाओं को पूरी तरह रोका जा सके। इसके लिए बजट, तकनीक और मानव संसाधन तीनों स्तर पर तैयारी की जा रही है।
निष्कर्ष
स्वच्छ जल अभियान राज्य सरकार की उस प्रतिबद्धता को दर्शाता है, जिसमें नागरिकों के स्वास्थ्य और जीवन को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है। इंदौर की दुखद घटना ने यह सिखाया कि लापरवाही की कोई गुंजाइश नहीं है। अब यह अभियान प्रशासन, तकनीक और जनता के संयुक्त प्रयास से एक मजबूत और सुरक्षित जल आपूर्ति व्यवस्था बनाने की दिशा में एक निर्णायक कदम साबित हो सकता है। harigeet pravaah मानता है कि यदि यह अभियान पूरी ईमानदारी से लागू हुआ, तो यह न केवल वर्तमान संकट का समाधान करेगा बल्कि भविष्य के लिए भी एक सुरक्षित आधार तैयार करेगा।
