मध्य प्रदेश के बैतूल जिले में सागौन तस्करी की एक सनसनीखेज घटना सामने आई है, जिसने वन विभाग की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। गवासेन वन रेंज के अंतर्गत आने वाले कुरसना कूप क्षेत्र में सरकारी कटाई के बाद सुरक्षित रूप से रखे गए सागौन के कीमती लट्ठों को तस्करों ने चोरी कर लिया। यह घटना ऐसे समय में हुई, जब वन विभाग द्वारा क्षेत्र में निगरानी और चौकसी के दावे किए जा रहे थे।

प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, तस्कर कुल 13 सागौन के लट्ठे चुरा ले गए, जिनकी कुल मात्रा लगभग 2.356 घनमीटर बताई जा रही है। इन लट्ठों की अनुमानित कीमत करीब डेढ़ लाख रुपये आंकी गई है। यह सागौन सरकारी कटाई के बाद वन कूप क्षेत्र में रखा गया था और इसे विभागीय निगरानी में सुरक्षित माना जा रहा था।
रात के अंधेरे में अंजाम दी गई चोरी
जानकारी के मुताबिक, तस्करों ने इस वारदात को सुनियोजित तरीके से अंजाम दिया। देर रात या तड़के के समय उन्होंने मौके पर पहुंचकर सागौन के लट्ठों को एक पिकअप वाहन में लादा और जंगल के रास्ते फरार होने की कोशिश की। तस्करों का उद्देश्य साफ था कि वे इन कीमती लकड़ियों को सुरक्षित स्थान तक पहुंचाकर अवैध बाजार में ऊंचे दामों पर बेच दें।
हालांकि, किस्मत ने इस बार उनका पूरा साथ नहीं दिया। जंगल के कच्चे और उबड़-खाबड़ रास्ते पर तेज रफ्तार में जा रही पिकअप अचानक असंतुलित होकर पलट गई। वाहन के पलटते ही तस्करों में अफरा-तफरी मच गई। पकड़े जाने के डर से वे मौके पर ही सागौन के लट्ठों और पलटी हुई पिकअप को छोड़कर अंधेरे का फायदा उठाते हुए जंगल में भाग निकले।
सुबह हुआ मामले का खुलासा
अगली सुबह जब वन विभाग का अमला नियमित निरीक्षण के लिए कुरसना कूप पहुंचा, तब इस घटना का खुलासा हुआ। मौके पर सागौन के लट्ठे बिखरे पड़े थे और पास ही एक पलटी हुई पिकअप वाहन नजर आई। जांच करने पर पता चला कि कूप से कुल 13 लट्ठे गायब थे, जिन्हें चोरी कर ले जाया जा रहा था।
घटना की सूचना मिलते ही वरिष्ठ वन अधिकारियों को अवगत कराया गया। मौके पर पहुंचकर उन्होंने स्थिति का जायजा लिया और तस्करी की इस कोशिश को गंभीर अपराध मानते हुए जांच के निर्देश दिए। वन विभाग ने तत्काल अज्ञात तस्करों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है।
वन विभाग की चौकसी पर सवाल
इस घटना ने वन विभाग की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। जिस सागौन को सरकारी कटाई के बाद कूप क्षेत्र में रखा गया था, वहां सुरक्षा इंतजामों के बावजूद तस्करों का आसानी से पहुंच जाना और लकड़ी चोरी कर लेना चिंता का विषय है। स्थानीय लोगों का कहना है कि क्षेत्र में पहले भी सागौन और अन्य कीमती लकड़ियों की तस्करी की घटनाएं सामने आती रही हैं, लेकिन सख्त कार्रवाई के अभाव में तस्करों के हौसले लगातार बढ़ते जा रहे हैं।
वन विभाग की ओर से दावा किया जाता रहा है कि कूप क्षेत्रों में नियमित गश्त और निगरानी की जाती है, लेकिन इस घटना ने उन दावों की पोल खोल दी है। अब विभाग के सामने यह चुनौती है कि वह न केवल आरोपियों को जल्द से जल्द गिरफ्तार करे, बल्कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए ठोस कदम भी उठाए।
तस्करों की तलाश में अभियान
घटना के बाद से वन विभाग और स्थानीय पुलिस ने संयुक्त रूप से तस्करों की तलाश शुरू कर दी है। पिकअप वाहन के नंबर और अन्य सुरागों के आधार पर आरोपियों तक पहुंचने की कोशिश की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि तस्कर चाहे कितने भी शातिर क्यों न हों, लेकिन उन्हें जल्द ही पकड़ लिया जाएगा।
इसके साथ ही, यह भी जांच की जा रही है कि कहीं इस तस्करी में किसी अंदरूनी व्यक्ति की भूमिका तो नहीं है। अक्सर ऐसे मामलों में विभागीय जानकारी के लीक होने की आशंका जताई जाती है, क्योंकि तस्कर सही समय और सही जगह की जानकारी के साथ ही वारदात को अंजाम देते हैं।
सागौन तस्करी: एक पुरानी समस्या
बैतूल और आसपास के वन क्षेत्रों में सागौन तस्करी कोई नई बात नहीं है। सागौन की लकड़ी की अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारी मांग है और इसकी ऊंची कीमतें तस्करों को लगातार आकर्षित करती रहती हैं। यही वजह है कि तस्कर नए-नए तरीके अपनाकर वन संपदा को नुकसान पहुंचा रहे हैं।
इस घटना ने एक बार फिर यह साफ कर दिया है कि केवल नियम और कानून बनाना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनके सख्त और ईमानदार क्रियान्वयन की भी जरूरत है। जब तक तस्करों पर कड़ी कार्रवाई नहीं होगी, तब तक ऐसे अपराधों पर पूरी तरह लगाम लगाना मुश्किल होगा।
निष्कर्ष
बैतूल के कुरसना कूप में हुई सागौन तस्करी की यह घटना न केवल वन विभाग के लिए चेतावनी है, बल्कि पूरे प्रशासन के लिए भी एक गंभीर संदेश है। लाखों रुपये की सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वाले तस्करों के खिलाफ सख्त कार्रवाई और सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करना अब समय की मांग है। यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो वन संपदा पर मंडराता यह खतरा और भी गंभीर रूप ले सकता है।
