हिमाचल प्रदेश के शांत और व्यापारिक क्षेत्र माने जाने वाले सोलन जिले के अर्की बाज़ार में रविवार रात जो हुआ, उसने पूरे इलाके को गहरे सदमे में डाल दिया। रोज़मर्रा की चहल-पहल, दुकानों की रौनक और प्रवासी मजदूरों की सामान्य जिंदगी के बीच अचानक भड़की आग ने कुछ ही घंटों में सब कुछ राख में बदल दिया। इस भीषण अग्निकांड के बाद से अब तक जो तस्वीरें और जानकारियाँ सामने आई हैं, वे किसी भी संवेदनशील व्यक्ति को अंदर तक झकझोर देने वाली हैं।

रविवार रात लगी आग के बाद शुरू हुआ राहत और तलाशी अभियान लगातार कई दिनों तक चला। बुधवार को जब मलबे से सात और जले हुए शवों के अवशेष बरामद किए गए, तब यह साफ हो गया कि यह हादसा पहले की आशंका से कहीं ज्यादा भयावह था। इन नए अवशेषों के मिलने के साथ ही इस त्रासदी में जान गंवाने वालों की कुल संख्या बढ़कर दस हो गई है।
मृतकों की पहचान और पृष्ठभूमि
अधिकारियों के अनुसार, इस हादसे में जिन लोगों की जान गई है, उनमें नौ नेपाली नागरिक शामिल हैं। ये सभी नेपाल से रोज़गार की तलाश में हिमाचल आए थे और अर्की बाज़ार की इसी इमारत में रहकर काम कर रहे थे। इनके साथ ही एक आठ वर्षीय मासूम बच्चा भी इस आग की चपेट में आ गया, जो बिहार का निवासी था। इस बच्चे की मौत ने हादसे की त्रासदी को और भी गहरा कर दिया है।
स्थानीय प्रशासन का कहना है कि आग की तीव्रता इतनी अधिक थी कि अब तक कोई भी शव पूरी तरह सुरक्षित अवस्था में नहीं मिल सका है। केवल जले हुए मानव अवशेष ही बरामद हो रहे हैं, जिनकी पहचान आंखों से संभव नहीं है।
आग की भयावहता ने छोड़े गहरे निशान
अतिरिक्त उपायुक्त राहुल जैन ने हादसे की गंभीरता को बयान करते हुए कहा कि आग इतनी भयानक थी कि उसने सब कुछ निगल लिया। लकड़ी, प्लास्टिक, कपड़े, घरेलू सामान और यहां तक कि इंसानी शरीर भी पूरी तरह जल गए। यही कारण है कि अब तक केवल अवशेष ही मिल पा रहे हैं।
सोमवार को सबसे पहले दो जले हुए अवशेष मिले। इसके बाद मंगलवार को तीन और अवशेष बरामद किए गए। बुधवार को जब तलाशी अभियान और तेज किया गया, तब मलबे से सात अतिरिक्त अवशेष निकाले गए। इस तरह कुल मिलाकर अब तक दस लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है।
डीएनए जांच के जरिए पहचान की कोशिश
चूंकि अवशेषों की स्थिति बेहद खराब है, इसलिए उनकी पहचान के लिए फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी की मदद ली जा रही है। सभी अवशेषों को फॉरेंसिक जांच के लिए भेज दिया गया है। मृतकों के परिजनों के डीएनए सैंपल पहले ही एकत्र कर लिए गए हैं, ताकि डीएनए मिलान के जरिए यह सुनिश्चित किया जा सके कि कौन सा अवशेष किस व्यक्ति का है।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि यह प्रक्रिया समय लेने वाली है, लेकिन इसके अलावा कोई और विश्वसनीय तरीका नहीं है। जब तक डीएनए रिपोर्ट नहीं आती, तब तक औपचारिक रूप से सभी मृतकों की पहचान पूरी नहीं मानी जाएगी।
संयुक्त राहत और तलाशी अभियान
इस हादसे के बाद राहत और तलाशी अभियान के लिए कई एजेंसियों को एक साथ लगाया गया। एनडीआरएफ़, एसडीआरएफ़, जिला प्रशासन, पुलिस, होम गार्ड्स और अग्निशमन विभाग की संयुक्त टीम ने मंगलवार सुबह से व्यापक अभियान शुरू किया।
टीम ने मंगलवार सुबह करीब 9:45 बजे पहला अवशेष ढूंढा। इसके बाद दोपहर 12:45 से 1:15 बजे के बीच अन्य अवशेष भी बरामद किए गए। हर अवशेष को बेहद सावधानी से निकाला गया और कानूनी प्रक्रिया के तहत आगे की जांच के लिए भेजा गया।
खतरनाक इमारतें और मलबा हटाने की प्रक्रिया
आग के बाद इमारत की संरचना इतनी कमजोर हो गई थी कि किसी भी समय उसके गिरने का खतरा बना हुआ था। ऐसे में प्रशासन ने फैसला लिया कि खतरनाक दीवारों को गिराकर मलबा हटाया जाए। भारी मशीनों की मदद से इमारत के अवशेषों को तोड़ा गया और मलबे को पास के चौगान मैदान में स्थानांतरित किया गया।
अधिकारियों ने बताया कि गुरुवार को भी इस मैदान में मलबे की दोबारा तलाशी ली जाएगी, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि कोई अवशेष या सबूत पीछे न रह जाए।
लापता लोगों की जानकारी
सोलन के पुलिस अधीक्षक गौरव सिंह के अनुसार, इस हादसे के बाद कुछ लोग लापता भी बताए गए थे। इनमें दो पुरुष, दो महिलाएं और पांच बच्चे शामिल थे। सभी नेपाली मूल के थे और उसी इमारत में रहते थे, जहां आग लगी थी।
उन्होंने बताया कि अवशेष इतने अधिक जले हुए हैं कि उनकी पहचान करना असंभव है। यही वजह है कि फॉरेंसिक जांच और डीएनए विश्लेषण का सहारा लिया जा रहा है।
जांच के आदेश और कानूनी कार्रवाई
इस पूरे मामले की गंभीरता को देखते हुए सोलन के उपायुक्त ने मजिस्ट्रेट स्तर की जांच के आदेश दिए हैं। जांच का उद्देश्य यह पता लगाना है कि आग कैसे लगी, सुरक्षा मानकों का पालन हुआ या नहीं और क्या इस हादसे को टाला जा सकता था।
पुलिस ने इमारत के मालिक राजीव गुप्ता के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 287 के तहत मामला दर्ज किया है। इस धारा के तहत आग या ज्वलनशील पदार्थों के प्रति लापरवाही को अपराध माना गया है। इसके अलावा आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत भी कार्रवाई की जा रही है।
इमारत का इस्तेमाल और संरचना
अर्की के एसडीएम निशांत तोमर ने बताया कि जिस इमारत में आग लगी, उसके ग्राउंड और पहले फ्लोर पर व्यावसायिक गतिविधियां चल रही थीं। यहां दुकानें और अन्य कारोबारी प्रतिष्ठान संचालित हो रहे थे। वहीं, ऊपरी दो मंजिलों में नेपाल और बिहार से आए प्रवासी मजदूर किराए पर रह रहे थे।
यह मिश्रित उपयोग वाली इमारत थी, जहां व्यावसायिक और आवासीय गतिविधियां एक साथ चल रही थीं। प्रारंभिक जांच में यह भी देखा जा रहा है कि क्या इमारत में अग्नि सुरक्षा से जुड़े जरूरी इंतजाम मौजूद थे या नहीं।
प्रवासी मजदूरों की मजबूरी और जोखिम
यह हादसा एक बार फिर प्रवासी मजदूरों की असुरक्षित जीवन स्थितियों को उजागर करता है। रोज़गार की तलाश में दूर-दराज़ से आने वाले ये लोग अक्सर ऐसी इमारतों में रहते हैं, जहां सुरक्षा मानकों की अनदेखी की जाती है।
कम किराया, काम के पास रहने की मजबूरी और विकल्पों की कमी उन्हें जोखिम भरी परिस्थितियों में रहने को मजबूर कर देती है। सोलन अग्निकांड में जान गंवाने वाले अधिकांश लोग इसी वर्ग से थे, जिनकी आवाज़ अक्सर अनसुनी रह जाती है।
स्थानीय लोगों में डर और शोक
इस हादसे के बाद अर्की बाज़ार और आसपास के इलाकों में गहरा शोक और डर का माहौल है। स्थानीय लोग अब भी उस रात की भयावहता को याद कर सिहर उठते हैं। कई लोगों ने बताया कि आग इतनी तेजी से फैली कि किसी को संभलने का मौका ही नहीं मिला।
दुकानदारों और निवासियों का कहना है कि अगर समय रहते सुरक्षा इंतजाम होते और आग पर जल्दी काबू पा लिया जाता, तो शायद जानमाल का नुकसान इतना बड़ा नहीं होता।
प्रशासन के सामने सवाल
इस त्रासदी ने प्रशासन के सामने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। क्या इमारत में अग्निशमन उपकरण मौजूद थे? क्या नियमित निरीक्षण किया जाता था? क्या व्यावसायिक और आवासीय उपयोग की अनुमति सही तरीके से दी गई थी?
मजिस्ट्रेट जांच में इन सभी पहलुओं की गहराई से पड़ताल की जाएगी। उम्मीद की जा रही है कि जांच रिपोर्ट आने के बाद जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
भविष्य के लिए सबक
सोलन का यह अग्निकांड केवल एक हादसा नहीं, बल्कि एक चेतावनी है। तेजी से बढ़ते कस्बों और शहरों में मिश्रित उपयोग वाली इमारतों की संख्या बढ़ रही है, लेकिन सुरक्षा मानकों पर उतना ध्यान नहीं दिया जा रहा।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस घटना से सबक नहीं लिया गया, तो भविष्य में ऐसी त्रासदियां दोहराई जा सकती हैं। अग्नि सुरक्षा नियमों का सख्ती से पालन, नियमित निरीक्षण और प्रवासी मजदूरों के लिए सुरक्षित आवास की व्यवस्था बेहद जरूरी है।
निष्कर्ष
अर्की बाज़ार का यह अग्निकांड हिमाचल प्रदेश के इतिहास में एक दर्दनाक अध्याय बनकर दर्ज हो गया है। जले हुए अवशेष, बिखरा मलबा और रोते-बिलखते परिजन इस बात की गवाही दे रहे हैं कि लापरवाही की कीमत कितनी भारी हो सकती है।
अब यह प्रशासन और समाज दोनों की जिम्मेदारी है कि मृतकों को न्याय मिले और भविष्य में किसी और परिवार को इस तरह का दर्द न झेलना पड़े।
