उत्तर प्रदेश के मेरठ शहर में मंगलवार को उस समय हलचल मच गई जब पुलिस ने एक साथ कई स्पा सेंटरों पर छापेमारी कर अवैध गतिविधियों का खुलासा किया। शहर के अलग-अलग इलाकों में संचालित चार स्पा सेंटरों पर की गई इस कार्रवाई में कुल 20 युवतियों और एक युवक को मौके से पकड़ा गया। पुलिस को लंबे समय से इन सेंटरों को लेकर शिकायतें मिल रही थीं कि यहां मसाज की आड़ में गैरकानूनी काम किए जा रहे हैं।

जैसे ही पुलिस टीम इन स्पा सेंटरों में पहुंची, वहां मौजूद युवतियों में अफरा-तफरी मच गई। कई युवतियां अपना चेहरा छिपाने लगीं और कुछ समझ ही नहीं पा रही थीं कि आगे क्या होगा। पुलिस ने सभी को सुरक्षित तरीके से बाहर निकालकर एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट के कार्यालय में ले जाकर पूछताछ शुरू की।
शिकायतों से शुरू हुई जांच की कहानी
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, पिछले कुछ समय से शहर में स्पा सेंटरों को लेकर लगातार शिकायतें मिल रही थीं। स्थानीय लोगों का कहना था कि इन सेंटरों में देर रात तक संदिग्ध गतिविधियां होती हैं और यहां आने-जाने वालों की आवाजाही सामान्य नहीं लगती। कुछ मामलों में युवतियों की संदिग्ध आवाजाही और बाहरी नंबर प्लेट की गाड़ियों का आना-जाना भी देखा गया।
इन शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए पुलिस ने पहले गुप्त रूप से जांच शुरू की। जांच के दौरान यह सामने आया कि कुछ स्पा सेंटरों में बुकिंग और संपर्क का पूरा नेटवर्क मोबाइल फोन और खासतौर पर वॉट्सऐप के जरिए चलाया जा रहा था। पुलिस ने सबूत इकट्ठा करने के बाद एक साथ कार्रवाई करने का फैसला लिया, ताकि पूरे नेटवर्क को पकड़ा जा सके।
एक साथ चार स्पा सेंटरों पर छापा
मंगलवार को तय रणनीति के तहत पुलिस और एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट की संयुक्त टीम ने चार स्पा सेंटरों पर एक साथ छापेमारी की। कार्रवाई के दौरान किसी को भी भागने का मौका न मिले, इसके लिए सभी जगहों पर पर्याप्त पुलिस बल तैनात किया गया था।
छापेमारी के दौरान पुलिस ने देखा कि इन स्पा सेंटरों के अंदर का माहौल बाहरी दावों से बिल्कुल अलग था। वहां मौजूद व्यवस्थाएं और लोगों की गतिविधियां सामान्य स्पा सेवाओं से मेल नहीं खा रही थीं। मौके से 20 युवतियों और एक युवक को हिरासत में लिया गया, जिनसे बाद में पूछताछ शुरू की गई।
पुलिस पहुंचते ही छिपाने लगे चेहरे
जैसे ही पुलिस टीम स्पा सेंटरों के अंदर दाखिल हुई, वहां मौजूद युवतियों के चेहरे पर डर साफ नजर आ रहा था। कई युवतियां तुरंत अपना चेहरा छिपाने लगीं, कुछ ने दुपट्टे या हाथों से खुद को ढक लिया। यह दृश्य इस बात की ओर इशारा कर रहा था कि वे खुद भी इस स्थिति से असहज थीं।
पुलिस अधिकारियों ने बताया कि सभी युवतियों को सम्मानजनक तरीके से बाहर लाया गया और उन्हें किसी भी तरह की परेशानी न हो, इसका विशेष ध्यान रखा गया। पूछताछ के दौरान यह समझने की कोशिश की जा रही है कि वे स्वेच्छा से वहां काम कर रही थीं या किसी दबाव या मजबूरी में।
वॉट्सऐप के जरिए होती थी बुकिंग
प्रारंभिक जांच में यह बात सामने आई कि इन स्पा सेंटरों में कथित अवैध सेवाओं की बुकिंग सीधे काउंटर पर नहीं होती थी। इसके लिए अलग-अलग मोबाइल नंबर और वॉट्सऐप अकाउंट का इस्तेमाल किया जाता था। ग्राहक पहले वॉट्सऐप के जरिए संपर्क करते थे, जहां उन्हें अलग-अलग विकल्प बताए जाते थे।
पुलिस अब इन वॉट्सऐप चैट्स और कॉल रिकॉर्ड्स की जांच कर रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि इस पूरे नेटवर्क में और कौन-कौन लोग शामिल हैं। जांच एजेंसियों का मानना है कि इसके तार केवल मेरठ तक सीमित नहीं हो सकते, बल्कि अन्य शहरों से भी जुड़े हो सकते हैं।
एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट की भूमिका
इस पूरे मामले में एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट की भूमिका बेहद अहम रही। इस यूनिट ने न केवल छापेमारी में हिस्सा लिया बल्कि पकड़ी गई युवतियों से संवेदनशील तरीके से बातचीत भी की। अधिकारियों का कहना है कि कई बार ऐसी परिस्थितियों में युवतियां खुलकर सच नहीं बता पातीं, इसलिए उन्हें समय और सुरक्षित माहौल देना जरूरी होता है।
यूनिट यह भी जांच कर रही है कि कहीं इनमें से कोई युवती मानव तस्करी का शिकार तो नहीं हुई। अगर ऐसा पाया जाता है, तो दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी और पीड़ितों को आवश्यक सहायता और संरक्षण दिया जाएगा।
पकड़ी गई युवतियों से पूछताछ
पुलिस ने सभी पकड़ी गई युवतियों और युवक को एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट के कार्यालय में रखा है, जहां उनसे अलग-अलग पूछताछ की जा रही है। पूछताछ का मकसद यह जानना है कि वे यहां कैसे पहुंचीं, किसके संपर्क में थीं और उन्हें किस तरह का काम करने के लिए कहा गया था।
अधिकारियों के अनुसार, पूछताछ अभी प्रारंभिक चरण में है और कई अहम जानकारियां सामने आने की उम्मीद है। पुलिस यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इन स्पा सेंटरों का मालिक कौन है और उन्हें किस तरह का लाइसेंस मिला हुआ था।
स्पा सेंटरों के लाइसेंस पर सवाल
इस कार्रवाई के बाद मेरठ में संचालित अन्य स्पा सेंटरों के लाइसेंस और कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े हो गए हैं। स्थानीय प्रशासन अब यह जांच करने की तैयारी में है कि शहर में कितने स्पा सेंटर वैध रूप से चल रहे हैं और कितने केवल कागजों में नियमों का पालन दिखा रहे हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि कई बार स्पा सेंटरों को केवल मसाज सेवाओं के नाम पर लाइसेंस मिल जाता है, लेकिन बाद में वहां गतिविधियां पूरी तरह बदल जाती हैं। ऐसे में नियमित निरीक्षण और सख्त निगरानी की जरूरत है।
समाज और प्रशासन की जिम्मेदारी
इस पूरे मामले ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि शहरों में बढ़ते स्पा सेंटरों पर किस तरह की निगरानी होनी चाहिए। प्रशासन की जिम्मेदारी है कि वह ऐसे प्रतिष्ठानों पर समय-समय पर जांच करे और नियमों का सख्ती से पालन कराए।
वहीं समाज की भी भूमिका अहम है। अगर स्थानीय लोग किसी तरह की संदिग्ध गतिविधि देखते हैं, तो उसे नजरअंदाज करने के बजाय संबंधित अधिकारियों को जानकारी देनी चाहिए। समय पर दी गई सूचना कई लोगों को गलत रास्ते पर जाने से बचा सकती है।
आगे की कार्रवाई और जांच
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, इस मामले में आगे की जांच जारी है और जरूरत पड़ने पर अन्य जगहों पर भी छापेमारी की जा सकती है। वॉट्सऐप बुकिंग से जुड़े डिजिटल सबूतों की जांच की जा रही है और मोबाइल फोन की फॉरेंसिक जांच भी कराई जा सकती है।
अगर जांच में यह साबित होता है कि स्पा सेंटरों की आड़ में संगठित तरीके से अवैध गतिविधियां चल रही थीं, तो संबंधित धाराओं में सख्त कार्रवाई की जाएगी। साथ ही जिन युवतियों को किसी तरह से फंसाया गया है, उन्हें कानूनी और सामाजिक सहायता देने पर भी जोर दिया जाएगा।
एक चेतावनी और सबक
मेरठ का यह मामला केवल एक शहर तक सीमित नहीं है। देश के कई हिस्सों में स्पा और मसाज सेंटरों की आड़ में गलत गतिविधियों की शिकायतें सामने आती रही हैं। यह घटना प्रशासन, समाज और कानून व्यवस्था के लिए एक चेतावनी है कि केवल शिकायत मिलने के बाद नहीं, बल्कि नियमित निगरानी के जरिए भी ऐसे मामलों को रोका जाना चाहिए।
इस कार्रवाई के बाद उम्मीद की जा रही है कि शहर में ऐसे अवैध नेटवर्क पर लगाम लगेगी और स्पा सेंटरों का संचालन अधिक पारदर्शी और नियमों के अनुसार होगा।
