भारत की आर्थिक दुनिया में जब भी बड़े उतार-चढ़ाव की बात होती है, मुकेश अंबानी का नाम अपने आप चर्चा के केंद्र में आ जाता है। देश की सबसे मूल्यवान कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन और एशिया के सबसे अमीर उद्योगपतियों में शामिल मुकेश अंबानी हाल के दिनों में एक बड़ी आर्थिक हलचल के कारण सुर्खियों में हैं। महज 13 दिनों के भीतर उनकी निजी संपत्ति में ऐसी भारी गिरावट दर्ज की गई है, जिसने उन्हें दुनिया के सबसे अमीर लोगों के 100 अरब डॉलर क्लब से बाहर कर दिया है। यह घटनाक्रम न केवल भारतीय शेयर बाजार के लिए अहम है, बल्कि वैश्विक स्तर पर भी अरबपतियों की सूची में हो रहे बदलावों को रेखांकित करता है।

बाजार की गिरावट और अंबानी की नेटवर्थ पर असर
बीते कुछ समय से रिलायंस इंडस्ट्रीज के शेयरों में लगातार दबाव देखा जा रहा है। शेयर बाजार में आई इस कमजोरी का सीधा असर कंपनी के बाजार पूंजीकरण पर पड़ा और इसका प्रभाव मुकेश अंबानी की व्यक्तिगत संपत्ति पर भी साफ दिखाई दिया। ताजा आंकड़ों के मुताबिक, अंबानी की नेटवर्थ अब 99.6 अरब डॉलर रह गई है, जबकि कुछ ही समय पहले वे 100 अरब डॉलर से अधिक की संपत्ति के साथ इस विशेष क्लब का हिस्सा थे।
बताया जा रहा है कि केवल इस साल की शुरुआत से अब तक उनकी संपत्ति में 8.12 अरब डॉलर की गिरावट दर्ज की गई है। भारतीय मुद्रा में देखें तो यह आंकड़ा लगभग ₹7,31,66,64,04,000 बैठता है। यह गिरावट एक या दो दिन की नहीं, बल्कि बीते 13 दिनों में शेयर बाजार में आई कमजोरी का नतीजा है, जिसने निवेशकों और विश्लेषकों दोनों को सोचने पर मजबूर कर दिया है।
13 दिनों में क्या हुआ ऐसा?
शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव कोई नई बात नहीं है, लेकिन जब किसी देश की सबसे बड़ी कंपनी के शेयरों में लगातार गिरावट आती है, तो उसका असर व्यापक होता है। रिलायंस इंडस्ट्रीज के शेयरों में हालिया गिरावट के पीछे कई कारण बताए जा रहे हैं। वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता, कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव, टेलीकॉम और रिटेल सेक्टर में बढ़ती प्रतिस्पर्धा, और निवेशकों की सतर्कता जैसे पहलुओं ने मिलकर शेयरों पर दबाव बनाया।
एक दिन ऐसा भी रहा जब रिलायंस का शेयर एक ही कारोबारी सत्र में 1 फीसदी से अधिक टूट गया। इस एक दिन की गिरावट ने ही मुकेश अंबानी की नेटवर्थ से करीब 2.07 अरब डॉलर कम कर दिए। यह दिखाता है कि बड़े उद्योगपतियों की संपत्ति किस तरह शेयर बाजार की चाल से जुड़ी होती है।
दुनिया के अमीरों की सूची में नई स्थिति
ब्लूमबर्ग बिलिनेयर इंडेक्स के अनुसार, मुकेश अंबानी अब दुनिया के सबसे अमीर लोगों की सूची में 18वें स्थान पर पहुंच गए हैं। कुछ समय पहले तक वे शीर्ष 10 के आसपास बने हुए थे, लेकिन हालिया गिरावट ने उनकी रैंकिंग को नीचे खिसका दिया है।
इस साल सबसे ज्यादा संपत्ति गंवाने वाले अरबपतियों की सूची में मुकेश अंबानी दूसरे स्थान पर हैं। उनसे आगे केवल फेसबुक की पैरेंट कंपनी मेटा प्लेटफॉर्म्स के सीईओ मार्क जकरबर्ग हैं, जिनकी नेटवर्थ में इस साल 9.84 अरब डॉलर की गिरावट दर्ज की गई है।
जकरबर्ग, मस्क और बाकी दिग्गजों की स्थिति
मार्क जकरबर्ग की कुल संपत्ति भले ही इस साल कम हुई हो, लेकिन इसके बावजूद वे 223 अरब डॉलर की नेटवर्थ के साथ दुनिया के अमीरों की सूची में छठे स्थान पर बने हुए हैं। दूसरी ओर, एलन मस्क इस सूची में पहले नंबर पर हैं। उनकी नेटवर्थ 640 अरब डॉलर बताई जा रही है और इस साल उनकी संपत्ति में 20.9 अरब डॉलर की बढ़ोतरी हुई है।
यह अंतर साफ दर्शाता है कि अलग-अलग सेक्टर और कंपनियों की बाजार में स्थिति किस तरह अरबपतियों की संपत्ति को प्रभावित करती है। जहां एक ओर टेक और इनोवेशन आधारित कंपनियों के मालिकों को फायदा हो रहा है, वहीं पारंपरिक और विविध कारोबार वाली कंपनियों को बाजार की अस्थिरता का सामना करना पड़ रहा है।
टॉप 10 अरबपतियों की सूची पर एक नजर
दुनिया के शीर्ष 10 अमीरों की सूची में कई बड़े नाम शामिल हैं। दूसरे स्थान पर गूगल के सह-संस्थापक लैरी पेज हैं, जिनकी नेटवर्थ 287 अरब डॉलर बताई जा रही है। तीसरे नंबर पर सर्गेई ब्रिन हैं, जिनके पास 267 अरब डॉलर की संपत्ति है। चौथे स्थान पर अमेजन के संस्थापक जेफ बेजोस हैं, जिनकी नेटवर्थ 264 अरब डॉलर है। पांचवें नंबर पर ओरेकल के संस्थापक लैरी एलिसन हैं, जिनकी संपत्ति 255 अरब डॉलर बताई जाती है।
इसके बाद सातवें स्थान पर बर्नार्ड आरनॉल्ट, आठवें पर स्टीव बालमर, नौवें पर एनवीडिया के सीईओ जेंसन हुआंग और दसवें पर निवेशक वॉरेन बफे शामिल हैं। भारतीय उद्योगपति गौतम अडानी 81 अरब डॉलर की नेटवर्थ के साथ इस सूची में 21वें स्थान पर हैं।
रिलायंस इंडस्ट्रीज और निवेशकों की चिंता
रिलायंस इंडस्ट्रीज न केवल भारत की सबसे मूल्यवान कंपनी है, बल्कि लाखों निवेशकों की उम्मीदों का केंद्र भी है। कंपनी के शेयरों में आई गिरावट ने छोटे और बड़े निवेशकों दोनों को सतर्क कर दिया है। हालांकि बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि रिलायंस का बिजनेस मॉडल मजबूत है और लंबी अवधि में कंपनी फिर से मजबूती दिखा सकती है।
रिलायंस के कारोबार की बात करें तो यह ऊर्जा, पेट्रोकेमिकल्स, टेलीकॉम, रिटेल और डिजिटल सेवाओं जैसे कई क्षेत्रों में फैला हुआ है। ऐसे में किसी एक सेक्टर में दबाव आने का असर पूरे समूह पर पड़ सकता है। हालिया गिरावट को भी इसी व्यापक परिप्रेक्ष्य में देखा जा रहा है।
100 अरब डॉलर क्लब से बाहर होना कितना अहम?
100 अरब डॉलर क्लब एक प्रतीकात्मक सीमा मानी जाती है, जो किसी उद्योगपति की वैश्विक आर्थिक ताकत को दर्शाती है। इस क्लब से बाहर होना भले ही अस्थायी हो, लेकिन इसका मनोवैज्ञानिक और प्रतीकात्मक महत्व काफी बड़ा होता है। निवेशक, विश्लेषक और मीडिया सभी इस पर नजर रखते हैं।
हालांकि जानकारों का कहना है कि संपत्ति का यह उतार-चढ़ाव स्थायी नहीं होता। शेयर बाजार की स्थिति में सुधार के साथ ही अंबानी की नेटवर्थ फिर से 100 अरब डॉलर के पार जा सकती है। इससे पहले भी कई अरबपति इस सीमा के ऊपर-नीचे होते रहे हैं।
क्या आगे और गिरावट संभव है?
इस सवाल का जवाब बाजार की चाल पर निर्भर करता है। यदि वैश्विक आर्थिक हालात सुधरते हैं, कच्चे तेल की कीमतें स्थिर रहती हैं और घरेलू बाजार में सकारात्मक माहौल बनता है, तो रिलायंस के शेयरों में सुधार देखने को मिल सकता है। इसके उलट, यदि अनिश्चितता बनी रहती है, तो दबाव जारी रह सकता है।
फिलहाल निवेशक और विश्लेषक कंपनी के अगले कदमों, तिमाही नतीजों और भविष्य की रणनीतियों पर नजर बनाए हुए हैं। रिलायंस के नए निवेश, डिजिटल और ग्रीन एनर्जी से जुड़े प्रोजेक्ट्स आने वाले समय में कंपनी की दिशा तय कर सकते हैं।
निष्कर्ष
मुकेश अंबानी का 100 अरब डॉलर क्लब से बाहर होना एक बड़ी खबर जरूर है, लेकिन इसे अंतिम तस्वीर के रूप में देखना जल्दबाजी होगी। बाजार की अस्थिरता ने भले ही उनकी नेटवर्थ को प्रभावित किया हो, लेकिन उनकी कारोबारी ताकत और रिलायंस इंडस्ट्रीज की स्थिति अभी भी मजबूत मानी जाती है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि शेयर बाजार की चाल अंबानी की संपत्ति को किस दिशा में ले जाती है और क्या वे फिर से इस खास क्लब में वापसी कर पाते हैं।
