कल्पना कीजिए एक गहरी रात की, जब शहर नींद में डूबा हो और अचानक सायरन की चीख पूरे माहौल को चीर दे। रडार स्क्रीन पर एक खौफनाक सच्चाई उभरती है। दुश्मन देश से दागी गई बैलिस्टिक मिसाइल, जो परमाणु वारहेड लेकर कुछ ही मिनटों में जमीन पर कहर बरपाने वाली है। ऐसे हालात में आमतौर पर बचाव की कोई उम्मीद नहीं बचती, लेकिन तभी धरती से उठता है एक ऐसा हथियार जो बिना किसी धमाके के, बिना किसी बारूद के, उस परमाणु मौत को हवा में ही खत्म कर देता है।

यह कोई विज्ञान-कथा या हॉलीवुड फिल्म का दृश्य नहीं है, बल्कि आधुनिक सैन्य तकनीक की सबसे घातक और सटीक सच्चाई है। इस प्रणाली को दुनिया थाड के नाम से जानती है। इसे मिसाइलों का शिकारी कहा जाता है, क्योंकि यह दुश्मन की बैलिस्टिक मिसाइलों को अंतरिक्ष और वायुमंडल की सीमा पर ही ढूंढ निकालता है और केवल अपनी जबरदस्त रफ्तार से टकराकर उन्हें कबाड़ में बदल देता है।
थाड क्या है और इसे इतना खास क्यों माना जाता है
थाड का पूरा नाम टर्मिनल हाई एल्टीट्यूड एरिया डिफेंस है। यह अमेरिका द्वारा विकसित एक अत्याधुनिक मोबाइल मिसाइल रक्षा प्रणाली है, जिसे खासतौर पर बैलिस्टिक मिसाइलों को उनके अंतिम चरण में रोकने के लिए डिजाइन किया गया है। जब कोई बैलिस्टिक मिसाइल अपने लक्ष्य की ओर गिरने लगती है, उसी समय थाड सक्रिय होता है और उसे आसमान में ही खत्म कर देता है।
इस प्रणाली की सबसे अनोखी बात इसका हिट-टू-किल सिद्धांत है। दुनिया के ज्यादातर मिसाइल डिफेंस सिस्टम विस्फोटक वारहेड का इस्तेमाल करते हैं, जिससे दुश्मन मिसाइल को उड़ाया जाता है। थाड इस रास्ते पर नहीं चलता। इसमें कोई विस्फोटक नहीं होता। इसकी इंटरसेप्टर मिसाइल इतनी तेज गति से दुश्मन मिसाइल से टकराती है कि टक्कर से पैदा हुई काइनेटिक एनर्जी ही परमाणु वारहेड को निष्क्रिय कर देती है। इस टक्कर के बाद दुश्मन का हथियार बिना फटे ही बेकार हो जाता है।
बिना धमाके के परमाणु बम को खत्म करने की ताकत
थाड की यही विशेषता इसे दुनिया के बाकी रक्षा सिस्टम्स से अलग बनाती है। परमाणु हथियारों के मामले में सबसे बड़ा खतरा यह होता है कि अगर वे हवा में विस्फोट कर जाएं तो भी भारी तबाही हो सकती है। थाड इस खतरे को जड़ से खत्म कर देता है।
जब यह दुश्मन की मिसाइल से टकराता है, तो इतनी जबरदस्त ऊर्जा पैदा होती है कि वारहेड पूरी तरह नष्ट हो जाता है। कोई विस्फोट नहीं, कोई रेडिएशन नहीं और कोई मलबा जमीन पर गिरने का खतरा नहीं। यही वजह है कि इसे परमाणु हमलों के खिलाफ सबसे भरोसेमंद ढाल माना जाता है।
अंतरिक्ष की दहलीज पर होने वाली लड़ाई
थाड की सबसे बड़ी ताकत इसकी ऊंचाई है। यह मिसाइलों को न केवल वायुमंडल के भीतर, बल्कि वायुमंडल के बाहर भी मार गिराने की क्षमता रखता है। यानी यह अंतरिक्ष और धरती की सीमा पर जाकर दुश्मन के हथियार का शिकार करता है।
यह क्षमता बहुत कम देशों और प्रणालियों के पास है। यही कारण है कि थाड को हाई एल्टीट्यूड डिफेंस सिस्टम कहा जाता है। जब कोई बैलिस्टिक मिसाइल सैकड़ों किलोमीटर ऊपर से गिरती है, तब थाड उसे पहचानकर खत्म कर सकता है।
थाड की आंखें, जो हजार किलोमीटर दूर तक देखती हैं
किसी भी मिसाइल डिफेंस सिस्टम की जान उसकी पहचान क्षमता होती है। थाड के मामले में यह जिम्मेदारी निभाता है AN/TPY-2 रडार। यह दुनिया के सबसे शक्तिशाली ग्राउंड-आधारित एक्स-बैंड रडार सिस्टम्स में से एक माना जाता है।
यह रडार एक हजार किलोमीटर से भी ज्यादा दूरी पर मौजूद बेहद छोटी वस्तु को ट्रैक कर सकता है। कहा जाता है कि यह फुटबॉल जितनी छोटी चीज को भी अंतरिक्ष में पहचान सकता है। दुश्मन की मिसाइल जैसे ही लॉन्च होती है, यह रडार उसे पकड़ लेता है और पूरे रास्ते उसकी निगरानी करता है।
सटीकता जो लगभग पूर्ण मानी जाती है
थाड की सफलता दर को लेकर सैन्य विशेषज्ञों में आम सहमति है कि यह लगभग शत-प्रतिशत के करीब है। इसकी वजह यही है कि यह सीधे टकराकर हमला करता है। इसमें कोई विस्फोट नहीं होता, जिससे यह खतरा नहीं रहता कि दुश्मन का सक्रिय वारहेड मलबे में छिपकर बच जाए।
इस सीधी टक्कर के कारण दुश्मन मिसाइल के बचने की संभावना लगभग शून्य हो जाती है। यही वजह है कि इसे मिसाइल किलर कहा जाता है।
जरूरत पड़ते ही दुनिया के किसी भी कोने में तैनाती
थाड सिर्फ ताकतवर ही नहीं, बल्कि बेहद लचीला भी है। पूरा सिस्टम ट्रकों पर आधारित होता है। इसे बड़े सैन्य मालवाहक विमानों के जरिए कुछ ही घंटों में दुनिया के किसी भी युद्धक्षेत्र में पहुंचाया जा सकता है।
इसकी यह गतिशीलता इसे खास बनाती है। किसी भी संभावित खतरे के सामने इसे तेजी से तैनात किया जा सकता है, जिससे दुश्मन को चौंकाया जा सके।
रासायनिक और जैविक हथियारों से भी सुरक्षा
थाड की एक और बड़ी खासियत यह है कि यह दुश्मन की मिसाइल को बहुत ऊंचाई पर ही खत्म कर देता है। अगर उस मिसाइल में रासायनिक या जैविक हथियार भी हों, तो उनका असर जमीन पर मौजूद लोगों तक नहीं पहुंचता।
इस तरह यह सिर्फ परमाणु हमलों से ही नहीं, बल्कि अन्य सामूहिक विनाश के हथियारों से भी सुरक्षा प्रदान करता है।
थाड की कीमत, जो इसे अमीर देशों का हथियार बनाती है
इतनी उन्नत तकनीक की कीमत भी उतनी ही भारी है। थाड को खरीदना और बनाए रखना हर देश के बस की बात नहीं है। एक पूरी थाड बैटरी, जिसमें रडार, लॉन्चर, ट्रक और इंटरसेप्टर मिसाइलें शामिल होती हैं, उसकी लागत सैकड़ों मिलियन डॉलर में जाती है।
इसके अलावा एक अकेली इंटरसेप्टर मिसाइल की कीमत भी करोड़ों रुपये में होती है। इतना ही नहीं, इसके रखरखाव और संचालन पर हर साल भारी खर्च आता है।
यही वजह है कि दुनिया में बहुत कम देश ऐसे हैं, जो इस प्रणाली को खरीद और संभाल पाए हैं। फिलहाल अमेरिका के अलावा कुछ चुनिंदा अमीर देशों ने ही इसे अपने सुरक्षा कवच का हिस्सा बनाया है।
कौन-कौन से देश थाड का इस्तेमाल कर रहे हैं
थाड सिस्टम फिलहाल बहुत सीमित देशों के पास है। अमेरिका के अलावा मध्य पूर्व के कुछ धनी देशों ने इसे खरीदा है। इसके अलावा कुछ रणनीतिक क्षेत्रों में अमेरिकी सेना ने इसे तैनात किया हुआ है, ताकि संभावित बैलिस्टिक खतरे को रोका जा सके।
थाड और अन्य एयर डिफेंस सिस्टम्स में फर्क
दुनिया में कई एयर डिफेंस सिस्टम मौजूद हैं, लेकिन थाड का मकसद बेहद स्पष्ट है। यह सिर्फ बैलिस्टिक मिसाइलों को बेहद ऊंचाई पर रोकने के लिए बना है। दूसरी ओर कुछ सिस्टम ऐसे हैं, जो लड़ाकू विमानों, ड्रोन और क्रूज मिसाइलों को भी निशाना बना सकते हैं।
यही कारण है कि थाड को एक स्पेशलिस्ट माना जाता है, जो सिर्फ और सिर्फ बैलिस्टिक खतरे को खत्म करने पर केंद्रित है।
भारत की स्थिति और आत्मनिर्भर सुरक्षा
भारत के पास भी अपनी विकसित बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस प्रणाली है, जो देश को इसी तरह के खतरों से बचाने के लिए बनाई गई है। इसके अलावा भारत ने अन्य उन्नत एयर डिफेंस सिस्टम्स को भी अपनी सुरक्षा रणनीति में शामिल किया है।
भारत का फोकस स्वदेशी तकनीक और बहुस्तरीय सुरक्षा ढांचे पर है, ताकि किसी भी संभावित खतरे से प्रभावी ढंग से निपटा जा सके।
आधुनिक युद्ध में थाड की भूमिका
आज के दौर में युद्ध सिर्फ जमीन पर नहीं लड़े जाते। मिसाइलें, रडार और अंतरिक्ष तकनीक इस लड़ाई का अहम हिस्सा बन चुके हैं। ऐसे में थाड जैसी प्रणाली सिर्फ एक हथियार नहीं, बल्कि रणनीतिक ताकत का प्रतीक बन चुकी है।
जिस देश के पास थाड जैसी क्षमता है, वह दुश्मन को यह संदेश देता है कि उसका परमाणु या बैलिस्टिक हमला सफल नहीं होगा। यही मनोवैज्ञानिक दबाव भी इसे बेहद खतरनाक बनाता है।
भविष्य की जंग और मिसाइल डिफेंस
विशेषज्ञ मानते हैं कि आने वाले वर्षों में मिसाइल डिफेंस सिस्टम्स की भूमिका और भी बढ़ेगी। जैसे-जैसे बैलिस्टिक तकनीक उन्नत होती जाएगी, वैसे-वैसे उन्हें रोकने वाले सिस्टम्स भी और घातक बनते जाएंगे।
थाड इस दिशा में एक ऐसा उदाहरण है, जिसने दिखा दिया है कि बिना विस्फोट के भी परमाणु खतरे को खत्म किया जा सकता है।
