विश्व बैंक की नवीनतम रिपोर्ट के अनुसार, भारत वित्त वर्ष 2025-26 में 7.2 प्रतिशत की दर से आर्थिक वृद्धि दर्ज करेगा। यह वृद्धि वैश्विक आर्थिक तनाव और व्यापारिक अनिश्चितताओं के बावजूद होगी। रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया है कि भारत विश्व की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में शामिल रहेगा। इसका मुख्य कारण मजबूत घरेलू मांग, सुधारित टैक्स नीतियाँ और ग्रामीण क्षेत्रों में बढ़ती आय है।

विश्व बैंक की रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि भारत ने दक्षिण एशिया की अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान की है। दक्षिण एशियाई क्षेत्र के अन्य देशों में पाकिस्तान और अफगानिस्तान शामिल नहीं हैं, जबकि यह क्षेत्र मध्य पूर्व और उत्तरी अफ्रीका के आर्थिक प्रभाव क्षेत्र में रखा गया है। भारत के आर्थिक प्रदर्शन ने न केवल क्षेत्रीय आर्थिक संतुलन बनाए रखने में योगदान दिया है, बल्कि वैश्विक निवेशकों और बाजारों में भी देश की साख बढ़ाई है।
घरेलू मांग का योगदान
भारत की अर्थव्यवस्था में वृद्धि का सबसे बड़ा योगदान घरेलू मांग ने दिया है। उपभोक्ता खर्च और ग्रामीण क्षेत्रों में क्रय शक्ति में वृद्धि ने बाजार को सक्रिय रखा है। ग्रामीण क्षेत्रों में टैक्स सुधारों और सरकारी योजनाओं के माध्यम से आय स्तर बढ़ा है, जिससे मांग में स्थायित्व आया है।
सिर्फ ग्रामीण ही नहीं, शहरी क्षेत्रों में भी उपभोक्ता बाजार ने मजबूती दिखाई है। विनिर्माण, सेवा और खुदरा क्षेत्रों में निवेश और उपभोग में लगातार वृद्धि हुई है। इससे देश में रोजगार सृजन भी हुआ है और आय स्तर में सुधार के साथ-साथ उपभोक्ता आत्मविश्वास बढ़ा है।
व्यापारिक तनाव और वैश्विक प्रभाव
हालांकि वैश्विक स्तर पर व्यापारिक तनाव, टैरिफ और अंतरराष्ट्रीय बाजार में अनिश्चितताएँ बनी हुई हैं, फिर भी भारत की अर्थव्यवस्था पर इसका गंभीर नकारात्मक असर नहीं पड़ा। रिपोर्ट के अनुसार, भारत ने अंतरराष्ट्रीय निवेशकों के विश्वास को बनाए रखा और विदेशी निवेश की दृष्टि से आकर्षक बनी हुई है। टैरिफ बढ़ोतरी और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में अस्थिरताओं के बावजूद, देश की आंतरिक आर्थिक नीतियाँ और मजबूत उपभोक्ता आधार वृद्धि को समर्थन दे रहे हैं।
नीति सुधार और आर्थिक स्थिरता
सरकार द्वारा किए गए आर्थिक और कर सुधारों ने ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में सकारात्मक प्रभाव डाला है। GST और अन्य कर सुधारों ने कर आधार बढ़ाया और निवेशकों के लिए आसान माहौल तैयार किया। बैंकिंग और वित्तीय नीतियों में सुधार से क्रेडिट पहुंच में सुधार हुआ और व्यापारिक गतिविधियों को नई दिशा मिली।
सरकार के विनियामक सुधारों और निवेश प्रोत्साहन नीतियों ने उत्पादन, निर्माण और सेवा क्षेत्रों को प्रोत्साहित किया है। इससे रोजगार सृजन, निजी निवेश और निर्यात वृद्धि में मदद मिली।
भारत का वैश्विक महत्व
भारत के आर्थिक प्रदर्शन ने न केवल देश की स्थिति को मजबूत किया है, बल्कि दक्षिण एशिया के अन्य देशों के लिए भी सकारात्मक संकेत भेजे हैं। क्षेत्रीय आर्थिक सहयोग और निवेश के दृष्टिकोण से भारत की भूमिका बढ़ी है। वैश्विक आर्थिक मंचों पर भारत का प्रभाव बढ़ा है और निवेशकों को स्थिर और लंबी अवधि के लिए निवेश के अवसर प्राप्त हुए हैं।
विश्व बैंक की रिपोर्ट से यह भी स्पष्ट है कि भारत के आर्थिक निर्णय और नीति सुधार ने वैश्विक अर्थव्यवस्था में देश की साख को मजबूत किया है। यह न केवल आर्थिक वृद्धि में सहायक है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय निवेश और व्यापारिक भागीदारी को भी बढ़ावा देता है।
भविष्य की संभावनाएँ
FY26 में अनुमानित 7.2 प्रतिशत की वृद्धि से भारत की अर्थव्यवस्था में नई संभावनाएँ खुलेंगी। निरंतर नीति सुधार, ग्रामीण क्षेत्र की आय में वृद्धि, उपभोक्ता मांग में स्थायित्व और वैश्विक निवेश का आकर्षण भविष्य में वृद्धि को और गति देगा। भारत की अर्थव्यवस्था अब वैश्विक मंच पर तेजी से विकसित होती प्रमुख शक्ति बन रही है।
भारत की वृद्धि का प्रभाव क्षेत्रीय और वैश्विक दोनों स्तरों पर देखा जाएगा। दक्षिण एशिया में भारत का नेतृत्व आर्थिक दृष्टि से मजबूत होगा और यह वैश्विक निवेशकों के लिए आकर्षक गंतव्य बना रहेगा।
