हिंदी सिनेमा का इतिहास कई ऐसे कलाकारों से भरा पड़ा है, जिन्होंने संघर्ष की लंबी और कठिन राह तय करने के बाद सफलता का स्वाद चखा। लेकिन इस इतिहास में एक नाम ऐसा भी है, जिसकी कहानी केवल संघर्ष से सफलता तक की नहीं, बल्कि आत्मविश्वास, जुनून और खुद पर भरोसे की मिसाल बन गई। यह कहानी है शम्मी कपूर की, जिन्हें आज हिंदी फिल्मों का पहला डांसिंग सुपरस्टार कहा जाता है।

आज जब भी बड़े पर्दे पर ऊर्जा से भरपूर डांस, खुले दिल से गाया गया रोमांटिक गीत या बेफिक्र अंदाज की बात होती है, तो शम्मी कपूर की छवि आंखों के सामने आ जाती है। लेकिन इस मुकाम तक पहुंचने से पहले उन्होंने ऐसा दौर देखा, जिसे शायद ही कोई कलाकार झेलना चाहे। एक के बाद एक 18 फिल्में फ्लॉप होना किसी भी अभिनेता के करियर को खत्म कर सकता था, लेकिन शम्मी कपूर ने हार मानने के बजाय अपने भीतर के कलाकार को और मजबूत किया।
सिनेमा में पहला कदम और उम्मीदों की शुरुआत
साल 1953 में शम्मी कपूर ने फिल्म जीवन ज्योति के जरिए हिंदी सिनेमा में कदम रखा। यह फिल्म उनके करियर की शुरुआती पहचान बनी और इसे बॉक्स ऑफिस पर ठीक-ठाक सफलता भी मिली। उस समय लग रहा था कि कपूर परिवार से आने वाला यह अभिनेता जल्दी ही अपनी अलग पहचान बना लेगा। लेकिन किस्मत ने उनके लिए बिल्कुल अलग राह चुनी थी।
उस दौर में हिंदी सिनेमा पर देव आनंद, दिलीप कुमार, राज कपूर, मधुबाला और नरगिस जैसे सितारों का दबदबा था। दर्शकों की पसंद और निर्माताओं की उम्मीदें इन्हीं नामों के इर्द-गिर्द घूमती थीं। ऐसे माहौल में नए कलाकार के लिए खुद को स्थापित करना बेहद मुश्किल था।
18 फिल्मों की असफलता और टूटता आत्मविश्वास
1953 से 1956 के बीच शम्मी कपूर ने लगातार फिल्मों में काम किया। वह मेहनत कर रहे थे, नए किरदार निभा रहे थे और हर फिल्म से उम्मीद लगा रहे थे कि शायद यही वह मोड़ होगा, जहां से उनका करियर रफ्तार पकड़ेगा। लेकिन हर बार नतीजा एक जैसा रहा। एक के बाद एक उनकी 18 फिल्में बॉक्स ऑफिस पर असफल रहीं।
यह वह दौर था जब किसी अभिनेता की कुछ फिल्में फ्लॉप होते ही उसे इंडस्ट्री से बाहर का रास्ता दिखा दिया जाता था। लगातार मिल रही असफलताओं के कारण शम्मी कपूर पर भी सवाल उठने लगे। कई लोगों को लगने लगा था कि वह बड़े सितारों की भीड़ में कहीं खो जाएंगे।
हार न मानने का फैसला और खुद पर भरोसा
लगातार फ्लॉप फिल्मों के बावजूद शम्मी कपूर ने हार मानने से इनकार कर दिया। वह जानते थे कि उनके भीतर कुछ अलग है, कुछ ऐसा जो अभी तक सही मौके का इंतजार कर रहा है। वह खुद को बेहतर बनाने में लगे रहे, अपने अभिनय, डांस और स्क्रीन प्रेजेंस पर काम करते रहे।
उनका यह विश्वास ही था, जिसने उन्हें उस दौर में भी टिकाए रखा, जब उनके समकालीन कलाकार लगातार हिट दे रहे थे और वह असफलताओं का सामना कर रहे थे।
किस्मत का टर्निंग पॉइंट बना साल 1957
साल 1957 शम्मी कपूर के जीवन और करियर का सबसे बड़ा मोड़ साबित हुआ। इसी साल उन्हें फिल्म तुमसा नहीं देखा मिली। दिलचस्प बात यह है कि यह फिल्म पहले किसी और अभिनेता के लिए सोची गई थी, लेकिन परिस्थितियों के चलते यह शम्मी कपूर के हिस्से आ गई।
यह फिल्म उनके लिए किसी वरदान से कम नहीं थी। रिलीज होते ही तुमसा नहीं देखा ने दर्शकों के दिलों में जगह बना ली। शम्मी कपूर का अंदाज, उनकी ऊर्जा, उनका रोमांटिक और चुलबुला स्वभाव लोगों को बेहद पसंद आया।
बॉक्स ऑफिस पर ऐतिहासिक सफलता
तुमसा नहीं देखा ने बॉक्स ऑफिस पर करीब 1.25 करोड़ रुपये की कमाई की, जो उस दौर में एक बड़ी उपलब्धि मानी जाती थी। यह शम्मी कपूर के करियर की पहली फिल्म थी, जिसने एक करोड़ रुपये का आंकड़ा पार किया। इस एक फिल्म ने न सिर्फ उनके संघर्ष के सालों को पीछे छोड़ दिया, बल्कि उन्हें रातों-रात स्टार बना दिया।
इसी साल उनकी एक और फिल्म दिल देके देखो भी रिलीज हुई, जिसने लगभग 90 लाख रुपये का कारोबार किया। इसके बाद आई फिल्म सिंगापुर, जिसने 55 लाख रुपये कमाए। इन लगातार सफलताओं ने यह साफ कर दिया कि शम्मी कपूर अब इंडस्ट्री में अपनी जगह बना चुके हैं।
डांस और म्यूजिक ने बनाई अलग पहचान
शम्मी कपूर की खास बात यह थी कि वह सिर्फ अभिनेता नहीं थे, बल्कि मंच पर ऊर्जा का विस्फोट थे। उनके गानों में एक अलग तरह की आजादी, मस्ती और जुनून नजर आता था। यही वजह थी कि उन्हें हिंदी सिनेमा का पहला डांसिंग सुपरस्टार कहा जाने लगा।
‘जंगली’ ने पहुंचाया सुपरस्टारडम की ऊंचाई पर
साल 1961 में आई फिल्म जंगली ने शम्मी कपूर के करियर को नई ऊंचाइयों पर पहुंचा दिया। फिल्म का टाइटल ट्रैक ‘याहू’ आज भी लोगों की जुबान पर है। इसी फिल्म का गीत ‘एहसान तेरा होगा मुझ पर’ भी बेहद लोकप्रिय हुआ।
जंगली उस साल की दूसरी सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्म बनी और इसने करीब 2 करोड़ रुपये का बिजनेस किया। इसके बाद शम्मी कपूर को लेकर यह साफ हो गया कि वह केवल हिट देने वाले अभिनेता नहीं, बल्कि बॉक्स ऑफिस के भरोसेमंद सुपरस्टार बन चुके हैं।
1962 और लगातार हिट फिल्मों का दौर
1962 शम्मी कपूर के करियर का सुनहरा साल साबित हुआ। इस साल उन्होंने लगातार तीन हिट फिल्में दीं। प्रोफेसर ने करीब 1 करोड़ रुपये की कमाई की, दिल तेरा दीवाना ने 85 लाख रुपये और चाइना टाउन ने 70 लाख रुपये का कारोबार किया।
इन फिल्मों ने यह साबित कर दिया कि शम्मी कपूर की लोकप्रियता किसी एक फिल्म तक सीमित नहीं थी। दर्शक उन्हें हर रूप में पसंद करने लगे थे।
म्यूजिकल फिल्मों का जादू
इसके बाद शम्मी कपूर ने म्यूजिकल फिल्मों के जरिए दर्शकों के दिलों पर राज करना शुरू किया। फिल्म राजकुमार का गीत ‘तुमने पुकारा और हम चले आए’ बेहद हिट रहा और फिल्म ने 1.6 करोड़ रुपये की कमाई की।
इसके बाद आई कश्मीर की कली, जिसने 1.4 करोड़ रुपये का कारोबार किया। इस फिल्म का गीत ‘ये चांद सा रोशन चेहरा’ आज भी रोमांस और संगीत का प्रतीक माना जाता है।
‘तीसरी मंजिल’ और डांसिंग सुपरस्टार की मुहर
1966 में आई फिल्म तीसरी मंजिल ने शम्मी कपूर को डांसिंग सुपरस्टार के रूप में स्थापित कर दिया। ‘ओ हसीना जुल्फों वाली’ और ‘आजा आजा मैं हूं प्यार तेरा’ जैसे गाने आज भी पार्टी और मंचीय प्रस्तुतियों की जान माने जाते हैं।
इस फिल्म ने करीब 2.25 करोड़ रुपये की कमाई की और उस दौर की बड़ी हिट फिल्मों में शुमार हुई।
विदेशों में भी बिखरा जादू
इसके बाद एन इवनिंग इन पेरिस आई, जिसने 1.5 करोड़ रुपये का कारोबार किया। फिल्म की विदेशी लोकेशन और शम्मी कपूर की एनर्जी ने इसे खास बना दिया।
1968 में आई फिल्म ब्रह्मचारी ने भी 1.25 करोड़ रुपये की कमाई की। इसका गीत ‘आजकल तेरे मेरे प्यार के चर्चे’ उस दौर का सबसे लोकप्रिय गीत बन गया।
करियर की स्थिरता और सम्मान
भले ही शम्मी कपूर की हर फिल्म जंगली जैसी ब्लॉकबस्टर न रही हो, लेकिन उनकी खास बात यह थी कि उनकी फिल्मों के गाने हमेशा हिट होते थे। यही वजह थी कि वह लगातार साल की टॉप कमाई करने वाली फिल्मों की सूची में बने रहे।
बतौर लीड एक्टर आखिरी हिट
साल 1971 में आई फिल्म अंदाज शम्मी कपूर की बतौर मुख्य अभिनेता आखिरी बड़ी हिट साबित हुई। इस फिल्म ने करीब 2 करोड़ रुपये का शानदार कलेक्शन किया और उनके सफल करियर को एक मजबूत विदाई दी।
संघर्ष से सफलता तक की प्रेरणादायक कहानी
शम्मी कपूर की कहानी यह सिखाती है कि असफलता अंत नहीं होती। 18 फ्लॉप फिल्मों के बाद भी अगर कोई कलाकार खुद पर विश्वास बनाए रखता है, तो एक दिन किस्मत भी उसका साथ देती है।
उनका जीवन आज भी नए कलाकारों के लिए प्रेरणा है कि मेहनत, धैर्य और जुनून कभी व्यर्थ नहीं जाते।
