शेयर बाजार में जब किसी मजबूत नाम के शेयर लगातार टूटते हैं, तो निवेशकों के मन में सबसे पहला सवाल यही उठता है कि क्या यह गिरावट अस्थायी है या फिर किसी बड़ी परेशानी का संकेत। विंड टर्बाइन निर्माण क्षेत्र की प्रमुख कंपनी सुजलॉन एनर्जी के शेयर इन दिनों इसी सवाल के केंद्र में हैं। लगातार तीसरे कारोबारी सत्र में बिकवाली के दबाव के चलते यह शेयर एक साल के निचले स्तर के बेहद करीब पहुंच गया है।

हालांकि, इस गिरावट के बीच कुछ ब्रोकरेज फर्म और विश्लेषक इसे डर की बजाय अवसर के रूप में देखने की सलाह दे रहे हैं। उनका मानना है कि मौजूदा कीमतों पर यह शेयर लंबी अवधि के निवेशकों के लिए बेहतर रिटर्न दे सकता है। इसी विरोधाभास ने सुजलॉन एनर्जी को निवेशकों और बाजार विशेषज्ञों के बीच चर्चा का बड़ा विषय बना दिया है।
हालिया कारोबारी सत्रों में शेयर की चाल
सुजलॉन एनर्जी के शेयरों में हाल के दिनों में लगातार दबाव देखने को मिला है। तीन कारोबारी सत्रों में यह करीब तीन प्रतिशत तक फिसल चुका है। ताजा कारोबार में यह बीएसई पर गिरावट के साथ लगभग सैंतालीस रुपये के आसपास ट्रेड करता नजर आया। इंट्रा-डे के दौरान शेयर और भी नीचे फिसल गया, जिससे यह अपने एक साल के रिकॉर्ड निचले स्तर से बस थोड़ा ही ऊपर रह गया।
पिछले वर्ष अप्रैल में सुजलॉन एनर्जी ने लगभग छियालीस रुपये का निचला स्तर छुआ था। दिलचस्प बात यह है कि इसी निचले स्तर से शेयर ने कुछ ही महीनों में जोरदार उछाल दिखाया और मई के अंत तक यह चौहत्तर रुपये से अधिक के स्तर तक पहुंच गया। उस समय निवेशकों को इस शेयर ने बेहद आकर्षक रिटर्न दिया था। यही इतिहास आज के निवेशकों को यह सोचने पर मजबूर कर रहा है कि क्या इस बार भी कहानी खुद को दोहरा सकती है।
गिरावट के पीछे क्या हैं मुख्य कारण
विश्लेषकों के अनुसार सुजलॉन एनर्जी के शेयरों में आई मौजूदा कमजोरी के पीछे कई व्यावहारिक कारण हैं। रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर में हाल के महीनों में विंड एनर्जी की हिस्सेदारी अपेक्षाकृत कम रही है। सोलर एनर्जी से जुड़े प्रोजेक्ट्स को अधिक प्राथमिकता मिलने के कारण विंड टेंडर्स की संख्या और गति दोनों प्रभावित हुई हैं।
इसके अलावा, विंड इंस्टॉलेशन की रफ्तार में सुस्ती और इस सेगमेंट में बढ़ती प्रतिस्पर्धा ने भी निवेशकों की धारणा पर असर डाला है। कई निवेशक अल्पकालिक अनिश्चितताओं को देखते हुए मुनाफावसूली या जोखिम से बचने की रणनीति अपना रहे हैं, जिसका सीधा असर शेयर की कीमत पर पड़ा है।
पावर परचेज एग्रीमेंट्स और विंड सेक्टर की स्थिति
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा समय में लंबित पावर परचेज एग्रीमेंट्स की संरचना भी विंड कंपनियों के लिए चुनौती बनी हुई है। बड़ी संख्या में जो समझौते पेंडिंग हैं, उनमें से अधिकांश शुद्ध रूप से सोलर प्रोजेक्ट्स से जुड़े हुए हैं। विंड एनर्जी की हिस्सेदारी इनमें सीमित दिखाई देती है।
इसका सीधा असर उन कंपनियों पर पड़ता है, जिनका मुख्य कारोबार विंड टर्बाइन और उससे जुड़ी सेवाओं पर आधारित है। हालांकि, दीर्घकालिक दृष्टि से देखा जाए तो ऊर्जा की बढ़ती मांग और विविध स्रोतों की आवश्यकता विंड एनर्जी को फिर से केंद्र में ला सकती है।
दीर्घकालिक मांग को लेकर सकारात्मक संकेत
जहां एक ओर मौजूदा समय में विंड सेक्टर को कुछ चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है, वहीं दूसरी ओर भविष्य को लेकर उम्मीदें भी कम नहीं हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि डेटा सेंटर्स, कमर्शियल और इंडस्ट्रियल उपभोक्ताओं के साथ-साथ सार्वजनिक उपक्रमों की बढ़ती जरूरतों के चलते आने वाले वर्षों में विंड एनर्जी की मांग में तेज उछाल आ सकता है।
अनुमान है कि वर्ष 2030 तक विंड एनर्जी की मांग में बीस से चौबीस गीगावाट तक की बढ़ोतरी हो सकती है। यह आंकड़ा देश के दीर्घकालिक रिन्यूएबल एनर्जी लक्ष्यों से भी अधिक माना जा रहा है। ऐसे में सुजलॉन जैसी कंपनियों के लिए यह भविष्य में बड़े अवसर लेकर आ सकता है।
ब्रोकरेज फर्म की राय और टारगेट प्राइस
घरेलू ब्रोकरेज फर्म मोतीलाल ओसवाल ने सुजलॉन एनर्जी को लेकर सकारात्मक रुख बनाए रखा है। मौजूदा गिरावट के बावजूद फर्म का मानना है कि यह शेयर लंबी अवधि में बेहतर प्रदर्शन कर सकता है। ब्रोकरेज ने इस शेयर के लिए जो लक्ष्य मूल्य तय किया है, वह इसके पिछले एक साल के उच्चतम स्तर के आसपास है।
विश्लेषकों के अनुसार मौजूदा कीमतों से इसमें पचास प्रतिशत से अधिक की संभावित बढ़त देखी जा सकती है। यही वजह है कि वे इस गिरावट को डर का संकेत नहीं बल्कि निवेश का अवसर मान रहे हैं। दिलचस्प बात यह भी है कि इस शेयर को कवर करने वाले अधिकांश विश्लेषक इसके पक्ष में ही राय रखते हैं।
ऑर्डर बुक और ईपीसी रणनीति का महत्व
सुजलॉन एनर्जी की एक बड़ी ताकत उसकी ऑर्डर बुक और परियोजना निष्पादन की रणनीति मानी जाती है। कंपनी ने अपने ऑर्डर पोर्टफोलियो में ईपीसी प्रोजेक्ट्स की हिस्सेदारी बढ़ाने पर जोर दिया है। प्रतिस्पर्धी माहौल में यह रणनीति कंपनी को स्थिर राजस्व और बेहतर नियंत्रण प्रदान करती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि सुजलॉन का निष्पादन ट्रैक रिकॉर्ड घरेलू स्तर पर अन्य कंपनियों की तुलना में मजबूत रहा है। इसके अलावा, ईपीसी स्पेस में चीनी ओईएम की सीमित भागीदारी भी कंपनी के लिए सकारात्मक पहलू के रूप में देखी जा रही है। इससे सुजलॉन को बड़े और जटिल प्रोजेक्ट्स हासिल करने में बढ़त मिल सकती है।
निर्यात संभावनाएं और भविष्य की योजनाएं
कंपनी के प्रबंधन को निर्यात से भी मजबूत समर्थन की उम्मीद है। आने वाले वित्तीय वर्षों में अंतरराष्ट्रीय बाजारों से ऑर्डर मिलने की संभावना जताई जा रही है। यदि यह योजनाएं साकार होती हैं, तो कंपनी की उत्पादन क्षमता और राजस्व दोनों में उल्लेखनीय वृद्धि हो सकती है।
प्रबंधन का मानना है कि अगले कुछ वर्षों में कंपनी विंड एनर्जी क्षमता के मामले में महत्वपूर्ण मील के पत्थर हासिल कर सकती है। दीर्घकालिक लक्ष्य के रूप में उत्पादन क्षमता को और अधिक बढ़ाने की योजना पर भी काम किया जा रहा है।
पिछले अनुभव और निवेशकों के लिए सबक
सुजलॉन एनर्जी के शेयरों का इतिहास बताता है कि यह शेयर अत्यधिक उतार-चढ़ाव के लिए जाना जाता है। निचले स्तरों से तेज उछाल और ऊंचे स्तरों से तेज गिरावट, दोनों ही इसके स्वभाव का हिस्सा रहे हैं। ऐसे में निवेशकों के लिए यह जरूरी है कि वे केवल भावनाओं के आधार पर फैसला न लें।
दीर्घकालिक निवेशक आमतौर पर कंपनी की बुनियादी स्थिति, सेक्टर की संभावनाओं और प्रबंधन की रणनीति को ध्यान में रखते हैं। वहीं अल्पकालिक ट्रेडर्स को अस्थिरता का सामना करना पड़ सकता है।
निष्कर्ष: बेचें या धैर्य रखें
सुजलॉन एनर्जी के शेयर इस समय एक अहम मोड़ पर खड़े हैं। एक ओर यह एक साल के निचले स्तर के करीब है, जो जोखिम का संकेत देता है, वहीं दूसरी ओर विश्लेषकों की सकारात्मक राय इसे अवसर भी बनाती है।
निवेशकों के लिए सबसे अहम बात यह है कि वे अपने निवेश लक्ष्य, जोखिम सहने की क्षमता और समय सीमा को ध्यान में रखकर फैसला लें। गिरावट हमेशा डर का कारण नहीं होती, लेकिन बिना समझे जोखिम उठाना भी समझदारी नहीं है। आने वाले समय में विंड एनर्जी सेक्टर की दिशा और कंपनी के ऑर्डर फ्लो पर बाजार की नजरें टिकी रहेंगी।
