उड़िया फिल्म और संगीत उद्योग के लिए 25 जनवरी 2026 की सुबह बेहद दुखद समाचार लेकर आई। मशहूर और अत्यंत प्रतिभाशाली संगीतकार अभिजीत मजूमदार ने 54 वर्ष की उम्र में इस दुनिया को अलविदा कह दिया। भुवनेश्वर स्थित एम्स में उन्होंने जिंदगी और बीमारी के बीच चली लंबी जंग को हार स्वीकार की। उनके निधन की खबर फैलते ही पूरे उड़िया एंटरटेनमेंट जगत में शोक की लहर दौड़ गई।

अभिजीत मजूमदार का नाम सिर्फ एक संगीतकार भर नहीं था, बल्कि वह एक दौर, एक सोच और एक संगीतात्मक क्रांति का प्रतीक थे। उनके संगीत ने ओडिया सिनेमा को नई पहचान दी, नई ऊर्जा दी और हजारों युवाओं को संगीत के क्षेत्र में आगे बढ़ने की प्रेरणा दी। उनके जाने से न केवल एक सफल कलाकार चला गया, बल्कि एक मार्गदर्शक, एक गुरु और एक संवेदनशील रचनाकार भी हमेशा के लिए खामोश हो गया।
लंबी बीमारी और आखिरी संघर्ष
अभिजीत मजूमदार पिछले लगभग पांच महीनों से गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे थे। अगस्त 2025 के बाद से उनकी सेहत में लगातार उतार-चढ़ाव देखने को मिला। कई बार उन्हें आईसीयू में भर्ती कराया गया, जहां डॉक्टरों की टीम ने उनकी स्थिति को स्थिर रखने के लिए हरसंभव प्रयास किए। कुछ मौकों पर ऐसा लगा कि उनकी हालत में सुधार हो रहा है, लेकिन वह उम्मीदें ज्यादा समय तक कायम नहीं रह सकीं।
शनिवार 24 जनवरी की रात उनकी तबीयत अचानक बिगड़ गई। उन्हें लाइफ सपोर्ट पर रखा गया, लेकिन तमाम चिकित्सकीय प्रयासों के बावजूद वह जिंदगी की जंग हार गए। अभिजीत मजूमदार हाइपरटेंशन, हाइपोथायरायडिज्म और क्रॉनिक लिवर डिजीज जैसी गंभीर बीमारियों से पीड़ित थे। क्रॉनिक लिवर डिजीज के इलाज के लिए ही उन्हें एम्स भुवनेश्वर में भर्ती कराया गया था।
एक युग का अंत
अभिजीत मजूमदार का निधन उड़िया सिनेमा के लिए एक युग के अंत जैसा है। उन्होंने अपने करियर में 700 से अधिक गानों की रचना की, जो फिल्मों, एल्बमों और क्षेत्रीय संगीत के विभिन्न रूपों में आज भी लोगों के दिलों में बसे हुए हैं। उनके संगीत में भावनाओं की गहराई, धुनों की मिठास और तकनीकी परिपक्वता का अनोखा संगम देखने को मिलता था।
उनकी रचनाएं सिर्फ मनोरंजन तक सीमित नहीं थीं, बल्कि समाज, रिश्तों और मानवीय संवेदनाओं को भी बेहद खूबसूरती से व्यक्त करती थीं। यही वजह है कि उनके गाने पीढ़ियों तक सुने जाएंगे और उन्हें याद किया जाता रहेगा।
शुरुआती जीवन और संगीत की ओर झुकाव
11 सितंबर 1971 को जन्मे अभिजीत मजूमदार का बचपन संगीत से गहरे रूप से जुड़ा हुआ था। बहुत कम उम्र में ही उन्होंने सुरों और तालों की दुनिया से रिश्ता बना लिया था। पारिवारिक माहौल और स्थानीय सांस्कृतिक परिवेश ने उनके भीतर छुपे संगीतकार को धीरे-धीरे आकार दिया।
उन्होंने औपचारिक रूप से संगीत की शिक्षा ली और अपनी प्रतिभा को निरंतर निखारते रहे। शुरुआती दिनों में संघर्ष जरूर रहा, लेकिन उनका आत्मविश्वास और संगीत के प्रति समर्पण कभी कम नहीं हुआ।
2000 के दशक में उड़िया संगीत में बदलाव
2000 के दशक की शुरुआत में अभिजीत मजूमदार उड़िया संगीत में एक नई ताकत बनकर उभरे। उस दौर में जब क्षेत्रीय सिनेमा सीमित संसाधनों और पारंपरिक धुनों तक सिमटा हुआ था, अभिजीत ने अपने प्रयोगधर्मी संगीत से नई दिशा दिखाई।
उनकी धुनों में आधुनिकता और परंपरा का ऐसा संतुलन था, जिसने युवाओं से लेकर बुजुर्गों तक सभी को आकर्षित किया। उन्होंने साबित किया कि उड़िया संगीत भी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी अलग पहचान बना सकता है।
लोकप्रिय फिल्मों से मिली पहचान
अभिजीत मजूमदार का संगीत कई लोकप्रिय उड़िया फिल्मों के जरिए घर-घर तक पहुंचा। ‘लव स्टोरी’, ‘सिस्टर श्रीदेवी’, ‘गोलमाल लव’, ‘सुंदरगढ़ रा सलमान खान’ और ‘श्रीमान सूरदास’ जैसी फिल्मों में उनका संगीत बेहद पसंद किया गया।
इन फिल्मों के गाने न सिर्फ उस समय हिट हुए, बल्कि आज भी लोगों की प्लेलिस्ट का हिस्सा बने हुए हैं। उनकी रचनाएं कहानी को आगे बढ़ाने का काम करती थीं और किरदारों की भावनाओं को गहराई देती थीं।
बहुमुखी प्रतिभा के धनी कलाकार
अभिजीत मजूमदार की सबसे बड़ी खासियत उनकी बहुमुखी प्रतिभा थी। वह रोमांटिक गीतों से लेकर भावुक, सामाजिक और उत्साह से भरे गानों तक हर तरह की धुनें रचने में माहिर थे।
उन्होंने फिल्मों के अलावा एल्बम और रीजनल म्यूजिक में भी काम किया। उनके संगीत ने सीमाओं को तोड़ा और उन्हें दुनिया भर में पहचान और सम्मान दिलाया।
सोशल मीडिया पर श्रद्धांजलियों का सैलाब
उनके निधन की खबर सामने आते ही सोशल मीडिया पर श्रद्धांजलियों का सैलाब उमड़ पड़ा। कलाकारों, संगीतकारों, निर्देशकों और प्रशंसकों ने अपने-अपने शब्दों में उन्हें याद किया।
हर पोस्ट, हर संदेश में यही भावना झलक रही थी कि उड़िया संगीत ने अपना एक अनमोल रत्न खो दिया है। लोगों ने उनके साथ बिताए पलों, उनसे मिली सीख और उनके संगीत से जुड़े अनुभवों को साझा किया।
परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़
अभिजीत मजूमदार अपने पीछे पत्नी रंजीता मजूमदार और एक बेटे को छोड़ गए हैं। उनके निधन से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है।
लंबी बीमारी के दौरान परिवार ने हर मुश्किल घड़ी में उनका साथ दिया। इंडस्ट्री के कई लोगों ने भी उनके इलाज और मनोबल बढ़ाने में सहयोग किया। अब उनके जाने के बाद परिवार को इस अपूरणीय क्षति से उबरने में समय लगेगा।
एक मेंटर और प्रेरणा का जाना
अभिजीत मजूमदार सिर्फ एक सफल संगीतकार ही नहीं थे, बल्कि वह उभरते कलाकारों के लिए एक मेंटर और प्रेरणा भी थे। उन्होंने कई युवा संगीतकारों को मौका दिया, उन्हें मार्गदर्शन दिया और अपने अनुभव साझा किए।
उनका मानना था कि संगीत सिर्फ व्यवसाय नहीं, बल्कि साधना है। यही सोच उन्हें बाकी कलाकारों से अलग बनाती थी।
उड़िया संस्कृति में अमिट योगदान
अभिजीत मजूमदार का योगदान सिर्फ फिल्मों तक सीमित नहीं था। उन्होंने उड़िया संस्कृति और भाषा को अपने संगीत के जरिए सहेजने का काम किया।
उनकी धुनों में मिट्टी की खुशबू, लोक तत्वों की झलक और आधुनिकता का स्पर्श साफ नजर आता था। यही वजह है कि उनका संगीत हर वर्ग के लोगों से जुड़ता था।
यादों में हमेशा जिंदा रहेंगे सुर
भले ही अभिजीत मजूमदार आज हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनके सुर, उनकी धुनें और उनकी रचनाएं हमेशा जीवित रहेंगी। जब भी उनके गीत बजेंगे, लोग उन्हें याद करेंगे और उनके योगदान को नमन करेंगे।
उड़िया संगीत जगत के लिए यह एक अपूरणीय क्षति है, जिसकी भरपाई संभव नहीं।
निष्कर्ष: सुरों का सितारा अस्त हुआ
अभिजीत मजूमदार का निधन एक कलाकार के जाने से कहीं ज्यादा है। यह उस दौर का अंत है, जिसने उड़िया संगीत को नई पहचान दी।
उनकी विरासत उनके गीतों, उनके शिष्यों और उनके चाहने वालों के दिलों में हमेशा जिंदा रहेगी। संगीत की दुनिया में उनका नाम स्वर्ण अक्षरों में लिखा जाएगा और आने वाली पीढ़ियां उनसे प्रेरणा लेती रहेंगी।
