भारत-पाकिस्तान के रिश्ते हमेशा से तनाव और संदेह के साए में रहे हैं। लेकिन अब एक बार फिर से पाकिस्तान की सेना के शीर्ष नेतृत्व की ओर से ऐसा खतरनाक षड्यंत्र रचा जा रहा है, जिसने भारत की सुरक्षा एजेंसियों की नींद उड़ा दी है। पाकिस्तान सेना के पूर्व अधिकारी आदिल रज़ा ने चौंकाने वाला खुलासा किया है कि पाकिस्तान के मौजूदा आर्मी चीफ जनरल असीम मुनीर भारत के खिलाफ समुद्री मोर्चे पर एक “पर्ल हार्बर” जैसा हमला करने की योजना बना रहा है — और इस साजिश में चीन उसकी खुलकर मदद कर रहा है।

भारत के खिलाफ असीम मुनीर की रणनीति
आदिल रज़ा ने इंडिया टुडे ग्लोबल से बात करते हुए दावा किया कि असीम मुनीर अब भारत की नौसेना को निशाना बनाने की तैयारी में है। उनके मुताबिक, चीन पाकिस्तान को रडार ब्लॉकिंग, सैटेलाइट कवरेज, इलेक्ट्रोमैग्नेटिक स्पेक्ट्रम और जैमिंग टेक्नोलॉजी जैसी सुविधाएँ दे रहा है ताकि भारत के समुद्री रक्षा सिस्टम को धोखा दिया जा सके।
इस रणनीति का उद्देश्य भारत की नौसेना के 20 से अधिक प्रमुख युद्धपोतों पर एक साथ हमला करना है, जिससे भारत की नौसैनिक शक्ति को गहरा नुकसान पहुँचे।
‘पर्ल हार्बर’ जैसी साजिश का मकसद क्या है?
इतिहास में “पर्ल हार्बर” नाम सुनते ही 1941 का वो भयानक दिन याद आता है, जब जापान ने अमेरिका के नौसैनिक अड्डे पर अचानक हमला कर दिया था। ठीक उसी तर्ज पर पाकिस्तान और चीन अब हिंद महासागर में भारत के खिलाफ ऐसा ही हमला करना चाहते हैं।
इस षड्यंत्र का उद्देश्य केवल सैन्य नहीं, बल्कि राजनीतिक और मनोवैज्ञानिक है। पाकिस्तान की जनता में असीम मुनीर की लोकप्रियता गिर रही है, और देश की अर्थव्यवस्था चरमराई हुई है। ऐसे में, एक “राष्ट्रवादी युद्ध” का माहौल बनाकर वह जनता का ध्यान असली मुद्दों से हटाना चाहता है।
चीन का रोल: ‘ड्रैगन और वल्चर’ की जोड़ी
रज़ा का कहना है कि चीन इस पूरे प्लान में पर्दे के पीछे से मुख्य भूमिका निभा रहा है। बीजिंग की रणनीति साफ है — भारत को एक साथ दो मोर्चों (उत्तर और समुद्र) पर उलझाना।
जहाँ एक तरफ लद्दाख और अरुणाचल में चीन सीमा विवाद बढ़ा रहा है, वहीं समुद्र के रास्ते पाकिस्तान को उकसा रहा है ताकि भारत की नौसेना पर दबाव बनाया जा सके।
भारत ने हाल के वर्षों में अपनी नौसैनिक शक्ति को काफी बढ़ाया है — INS विक्रांत, INS अरिहंत और P-8I सबमरीन हंटर विमान जैसे आधुनिक हथियारों के कारण भारत हिंद महासागर में एक बड़ी शक्ति बन चुका है। यही बात चीन और पाकिस्तान दोनों को परेशान कर रही है।
दिल्ली ब्लास्ट से ध्यान भटकाने की चाल?
आदिल रज़ा ने यह भी कहा कि दिल्ली में हाल ही में हुए बम धमाके के पीछे भी असीम मुनीर की अप्रत्यक्ष भूमिका हो सकती है। उनका कहना है कि जब पाकिस्तान की जनता उसके खिलाफ खड़ी हो रही थी और 27वें संविधान संशोधन को लेकर बवाल मचा था, तभी अचानक एक आतंकवादी हमला हुआ जिससे पूरा फोकस भारत की ओर चला गया।
यानी यह हमला न केवल भारत को उकसाने के लिए बल्कि पाकिस्तान की जनता का ध्यान अपने घरेलू संकट से हटाने के लिए भी किया गया था।
पाकिस्तानी आर्मी में असंतोष और ‘27वां संशोधन’
पाकिस्तान के संविधान में हाल ही में किए गए 27वें संशोधन से सेना को और अधिक शक्तियाँ मिल गई हैं। इससे आम नागरिकों में गुस्सा है। आदिल रज़ा का कहना है कि मुनीर अपने राजनीतिक अस्तित्व को बचाने के लिए भारत के खिलाफ युद्ध छेड़ सकता है।
“वो जानता है कि युद्ध ही उसका सबसे आसान रास्ता है जनता का समर्थन पाने का,” रज़ा ने कहा।
भारत की तैयारी और ‘जीरो टॉलरेंस पॉलिसी’
भारत ने पिछले एक दशक में अपनी रक्षा नीति को पूरी तरह बदल दिया है। आतंकवाद के खिलाफ अब देश की नीति “Zero Tolerance” पर आधारित है। मई महीने में हुए भारत-पाक युद्ध में भारतीय मिसाइलों ने पाकिस्तान के 12 से अधिक ठिकानों को सटीक निशाना बनाया था — यह दर्शाता है कि अब भारत केवल बचाव नहीं, बल्कि प्रोएक्टिव अटैक में विश्वास करता है।
भारतीय नौसेना ने हाल ही में मल्टी-लेयर सी डिफेंस सिस्टम और AI आधारित सैटेलाइट सर्विलांस को सक्रिय किया है, जिससे किसी भी समुद्री गतिविधि पर पल-पल की नज़र रखी जा सके।
पाकिस्तान की पुरानी चालें और नये खतरे
पाकिस्तान की सेना के इतिहास में यह पहली बार नहीं है जब भारत के खिलाफ ऐसी नापाक योजना बनी हो। 1999 में कारगिल युद्ध, 2008 में मुंबई हमला और 2016 में उरी अटैक जैसे कई उदाहरण पहले ही मौजूद हैं। लेकिन अब जो खतरा सामने आ रहा है, वह तकनीकी रूप से कहीं ज़्यादा गंभीर है क्योंकि इसमें चीन की साइबर और इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर क्षमता शामिल है।
अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया
वॉशिंगटन और लंदन के रक्षा विशेषज्ञों ने भी पाकिस्तान-चीन गठजोड़ पर चिंता जताई है। अमेरिकी थिंक टैंक RAND Corporation की एक रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि अगर हिंद महासागर में कोई बड़ा संघर्ष छिड़ता है, तो यह केवल दक्षिण एशिया तक सीमित नहीं रहेगा — इसका असर वैश्विक व्यापार मार्गों पर भी पड़ेगा।
भारत का रुख — संयम और शक्ति का संतुलन
भारतीय रक्षा विश्लेषकों का कहना है कि भारत किसी भी उकसावे में नहीं आएगा लेकिन अगर हमला हुआ, तो जवाब “निर्णायक और विनाशकारी” होगा। भारत ने कूटनीतिक रूप से अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया जैसे सहयोगियों से मिलकर QUAD गठबंधन को मजबूत किया है ताकि चीन-पाकिस्तान के किसी भी समुद्री षड्यंत्र का सामूहिक जवाब दिया जा सके।
निष्कर्ष
असीम मुनीर का यह “पर्ल हार्बर प्लान” केवल एक सैन्य हमला नहीं, बल्कि भू-राजनीतिक और मनोवैज्ञानिक युद्ध है। पाकिस्तान अपने अंदर की नाकामियों को छिपाने के लिए भारत के खिलाफ युद्ध की भाषा बोल रहा है। लेकिन आज का भारत 1971 या 1999 वाला भारत नहीं है। यह डिजिटल, शक्तिशाली और तैयार भारत है — जो हर मोर्चे पर दुश्मन को मात देने की क्षमता रखता है।
