लंबे समय तक यह माना जाता रहा कि किडनी, प्रोस्टेट या पेशाब से जुड़ी बीमारियां केवल बुजुर्गों तक सीमित होती हैं, लेकिन बदलती जीवनशैली, खानपान और कामकाज के तरीकों ने इस सोच को पूरी तरह गलत साबित कर दिया है। आज 30 और 40 की उम्र के लोग भी यूरोलॉजी से जुड़ी गंभीर समस्याओं का सामना कर रहे हैं, लेकिन सबसे बड़ा खतरा बीमारी नहीं बल्कि उसे छिपाने की प्रवृत्ति बन चुकी है।

इंदौर में आयोजित यूरोलॉजिस्ट्स इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस USICON-2026 के दौरान देश और विदेश से आए विशेषज्ञों ने एक स्वर में चेतावनी दी कि यूरोलॉजी समस्या को नजरअंदाज करना या छिपाना भविष्य में जानलेवा साबित हो सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार 40 साल की उम्र पार करते ही हर व्यक्ति को सालाना यूरोलॉजी जांच को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बना लेना चाहिए।
इंदौर में जुटे देश-विदेश के 70 से ज्यादा यूरोलॉजी विशेषज्ञ
USICON-2026 के इस अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में 70 से अधिक अंतरराष्ट्रीय फैकल्टी और देश के वरिष्ठ यूरोलॉजिस्ट्स ने हिस्सा लिया। सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य तेजी से बढ़ रही यूरोलॉजी बीमारियों पर चर्चा करना, उनके कारणों को समझना और आम लोगों तक सही जानकारी पहुंचाना था।
विशेषज्ञों ने बताया कि आजकल किडनी स्टोन, प्रोस्टेट का बढ़ना जिसे मेडिकल भाषा में बीपीएच कहा जाता है, पेशाब में जलन या खून आना, बार-बार यूरिन इंफेक्शन और ब्लैडर व किडनी कैंसर जैसी समस्याएं पहले के मुकाबले कई गुना तेजी से बढ़ रही हैं। यह केवल मेडिकल चुनौती नहीं बल्कि सामाजिक और जीवनशैली से जुड़ा मुद्दा भी बन चुका है।
यूरोलॉजी समस्याओं के बढ़ने के मुख्य कारण
सम्मेलन में विशेषज्ञों ने स्पष्ट किया कि मौजूदा दौर में लोगों की दिनचर्या ही इन बीमारियों को जन्म दे रही है। कम पानी पीने की आदत सबसे बड़ा खतरा बनकर उभरी है। अधिकतर लोग दिनभर चाय, कॉफी या कोल्ड ड्रिंक पर निर्भर रहते हैं और शुद्ध पानी की मात्रा बेहद कम हो जाती है, जिससे किडनी पर सीधा असर पड़ता है।
जंक फूड और अत्यधिक प्रोसेस्ड खाने की बढ़ती आदत ने किडनी स्टोन और यूरिन इंफेक्शन के मामलों में तेजी लाई है। इसके साथ ही धूम्रपान, शराब का अधिक सेवन और लंबे समय तक बैठकर काम करना भी यूरोलॉजी समस्याओं को बढ़ाने वाले प्रमुख कारणों में शामिल हैं।
विशेषज्ञों ने यह भी बताया कि बार-बार पेशाब रोकना एक ऐसी आदत है जिसे लोग मामूली समझते हैं, लेकिन यही आदत आगे चलकर गंभीर ब्लैडर और किडनी समस्याओं को जन्म देती है।
प्रोस्टेट की समस्या और पुरुषों की चुप्पी
सम्मेलन के दौरान विशेष रूप से पुरुषों में बढ़ रही प्रोस्टेट समस्याओं पर चिंता जताई गई। विशेषज्ञों ने कहा कि 40 साल की उम्र के बाद प्रोस्टेट ग्रंथि में बदलाव आना सामान्य प्रक्रिया है, लेकिन जब यह असामान्य रूप से बढ़ने लगती है तो पेशाब में रुकावट, बार-बार पेशाब आना और रात में नींद खराब होने जैसी समस्याएं शुरू हो जाती हैं।
दुखद तथ्य यह है कि सामाजिक झिझक और शर्म के कारण पुरुष इन लक्षणों को छिपाते रहते हैं और डॉक्टर के पास तब पहुंचते हैं जब स्थिति काफी बिगड़ चुकी होती है। विशेषज्ञों के अनुसार यही सबसे बड़ी गलती है, क्योंकि शुरुआती चरण में पहचान होने पर इलाज बेहद आसान और सुरक्षित होता है।
किडनी स्टोन और यूरिन इंफेक्शन: युवाओं में बढ़ता खतरा
USICON-2026 में यह भी सामने आया कि किडनी स्टोन अब केवल अधेड़ उम्र के लोगों की बीमारी नहीं रही। युवा वर्ग में भी इसके मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। इसका मुख्य कारण अनियमित खानपान, पानी की कमी और फिजिकल एक्टिविटी का अभाव बताया गया।
यूरिन इंफेक्शन को अक्सर लोग साधारण जलन समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, जबकि विशेषज्ञों के अनुसार बार-बार होने वाला इंफेक्शन किसी गंभीर समस्या का संकेत हो सकता है। महिलाओं में यह समस्या ज्यादा देखने को मिल रही है, लेकिन पुरुष भी इससे अछूते नहीं हैं।
ब्लैडर और किडनी कैंसर: शुरुआती लक्षणों को न करें नजरअंदाज
सम्मेलन में ब्लैडर और किडनी कैंसर पर भी गंभीर चर्चा हुई। विशेषज्ञों ने बताया कि पेशाब में खून आना, बिना दर्द के बार-बार पेशाब की समस्या और अचानक वजन कम होना ऐसे लक्षण हैं जिन्हें कभी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
समस्या यह है कि लोग इन संकेतों को अस्थायी मानकर डॉक्टर के पास नहीं जाते। विशेषज्ञों के अनुसार समय पर जांच होने से कैंसर का इलाज संभव है और मरीज सामान्य जीवन जी सकता है।
40 के बाद क्यों जरूरी है सालाना यूरोलॉजी जांच
सम्मेलन में मौजूद विशेषज्ञों ने साफ कहा कि जैसे 40 के बाद ब्लड प्रेशर, शुगर और हार्ट चेकअप जरूरी माना जाता है, उसी तरह यूरोलॉजी जांच भी उतनी ही आवश्यक है। सालाना जांच से प्रोस्टेट, किडनी और ब्लैडर से जुड़ी समस्याओं को शुरुआती चरण में ही पकड़ा जा सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि नियमित जांच न केवल बीमारी की पहचान करती है, बल्कि व्यक्ति को मानसिक रूप से भी आश्वस्त करती है।
जागरूकता ही सबसे बड़ा इलाज
USICON-2026 का सबसे बड़ा संदेश यही रहा कि यूरोलॉजी समस्याओं को छिपाना नहीं, बल्कि खुलकर बात करना और समय पर डॉक्टर से संपर्क करना जरूरी है। यह न केवल व्यक्ति के जीवन की गुणवत्ता सुधारता है, बल्कि गंभीर बीमारियों से बचाव भी करता है।
विशेषज्ञों ने अपील की कि समाज में यूरोलॉजी से जुड़ी भ्रांतियों को तोड़ा जाए और इसे सामान्य स्वास्थ्य चर्चा का हिस्सा बनाया जाए।
निष्कर्ष: स्वास्थ्य की अनदेखी नहीं, समझदारी जरूरी
इंदौर में आयोजित इस अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन ने साफ कर दिया कि यूरोलॉजी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं और अब इन्हें नजरअंदाज करने का समय नहीं है। 40 की उम्र के बाद सालाना जांच को अपनाकर और जीवनशैली में छोटे बदलाव करके गंभीर बीमारियों से बचा जा सकता है।
यूरोलॉजी समस्या को छिपाना नहीं, बल्कि समय पर इलाज कराना ही सही और सुरक्षित रास्ता है।
