वित्त वर्ष 2026-27 के लिए पेश किए गए केंद्रीय बजट ने देश की आर्थिक दिशा को एक बार फिर स्पष्ट कर दिया है। यह बजट ऐसे समय में आया है जब वैश्विक स्तर पर अनिश्चितता बनी हुई है, अंतरराष्ट्रीय व्यापार दबावों का सामना करना पड़ रहा है और घरेलू अर्थव्यवस्था को रफ्तार देने की जरूरत महसूस की जा रही है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा प्रस्तुत इस बजट में एक ओर मैन्युफैक्चरिंग, निर्यात, ग्रीन एनर्जी और स्वास्थ्य क्षेत्र को राहत दी गई है, वहीं दूसरी ओर वित्तीय लेन-देन और कुछ उपभोक्ता गतिविधियों को अपेक्षाकृत महंगा कर दिया गया है।

इस बजट को समझने के लिए यह देखना जरूरी है कि सरकार ने किन क्षेत्रों में राहत देने का फैसला किया और किन जगहों पर कर बढ़ाकर संसाधन जुटाने की कोशिश की। बजट का सीधा असर आम नागरिक, मरीज, निवेशक, उद्योग और उपभोक्ता सभी पर पड़ने वाला है।
वैश्विक हालात और बजट से उम्मीदें
भारत इस समय ऐसे दौर से गुजर रहा है जहां अंतरराष्ट्रीय स्तर पर व्यापारिक तनाव, टैरिफ से जुड़ी चुनौतियां और आर्थिक अनिश्चितता बनी हुई है। अमेरिका की ओर से लगाए गए ऊंचे टैरिफ और वैश्विक बाजारों की अस्थिरता के बीच इस बजट पर सभी की निगाहें टिकी थीं। सरकार के सामने चुनौती यह थी कि वह विकास को गति भी दे और राजकोषीय संतुलन भी बनाए रखे।
बजट 2026 में सरकार ने यह संकेत देने की कोशिश की है कि वह दीर्घकालिक विकास लक्ष्यों से समझौता किए बिना कुछ क्षेत्रों में राहत और कुछ में सख्ती का रास्ता अपनाएगी। सरकार का दावा है कि यह बजट विकसित भारत 2047 के लक्ष्य की दिशा में एक अहम कदम साबित होगा।
इलाज और दवाइयों में बड़ी राहत
इस बजट की सबसे मानवीय और राहत देने वाली घोषणाओं में स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़ा फैसला शामिल है। कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से जूझ रहे मरीजों और उनके परिवारों पर इलाज का आर्थिक बोझ कम करने के उद्देश्य से सरकार ने बड़ा कदम उठाया है।
कैंसर के इलाज में इस्तेमाल होने वाली 17 जीवनरक्षक दवाओं पर बेसिक कस्टम ड्यूटी पूरी तरह खत्म कर दी गई है। इसका मतलब यह है कि ये दवाएं अब भारतीय बाजार में पहले की तुलना में सस्ती उपलब्ध हो सकेंगी। कैंसर उपचार में दवाइयों की कीमत एक बड़ा मुद्दा रही है और यह फैसला लाखों परिवारों के लिए राहत लेकर आ सकता है।
इसके अलावा, 7 दुर्लभ बीमारियों के इलाज के लिए विदेश से मंगवाई जाने वाली दवाओं और विशेष पोषण आहार पर भी कस्टम ड्यूटी हटा दी गई है। दुर्लभ बीमारियों के मरीज अक्सर आयातित दवाओं पर निर्भर रहते हैं, जिनकी कीमत बेहद ज्यादा होती है। टैक्स हटने से इन दवाओं की लागत में कमी आने की उम्मीद है।
मैन्युफैक्चरिंग और निर्यात को बढ़ावा
बजट 2026 में घरेलू उत्पादन और निर्यात को मजबूती देने पर खास जोर दिया गया है। सरकार का मानना है कि मजबूत मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर न सिर्फ रोजगार पैदा करेगा बल्कि भारत को वैश्विक सप्लाई चेन में मजबूत स्थिति दिलाएगा।
माइक्रोवेव ओवन के कुछ आवश्यक पुर्जों पर कस्टम ड्यूटी घटाने का फैसला इसी दिशा में उठाया गया कदम है। इससे घरेलू स्तर पर इन उत्पादों के निर्माण को बढ़ावा मिलेगा और लागत घटने की संभावना बनेगी।
सी-फूड एक्सपोर्ट के लिए ड्यूटी-फ्री इनपुट की सीमा को 1 प्रतिशत से बढ़ाकर 3 प्रतिशत कर दिया गया है। इससे समुद्री उत्पादों के निर्यात को प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त मिल सकती है। इसी तरह लेदर, सिंथेटिक फुटवियर और टेक्सटाइल सेक्टर में ड्यूटी-फ्री इनपुट और समयसीमा को बढ़ाया गया है, जिससे इन उद्योगों को राहत मिलने की उम्मीद है।
न्यूक्लियर पावर प्रोजेक्ट्स के लिए आयात किए जाने वाले उपकरणों पर वर्ष 2035 तक कस्टम ड्यूटी नहीं लगाने का फैसला भी निवेशकों और ऊर्जा क्षेत्र के लिए एक मजबूत संकेत है।
ग्रीन एनर्जी, ईवी और सोलर सेक्टर को प्रोत्साहन
सरकार ने बजट 2026 में साफ तौर पर ग्रीन एनर्जी और स्वच्छ तकनीक को प्राथमिकता दी है। इलेक्ट्रिक व्हीकल, सोलर पैनल और ग्रीन एनर्जी उत्पादन से जुड़े कई उपकरणों पर कस्टम ड्यूटी घटाने या खत्म करने का फैसला इसी नीति का हिस्सा है।
लिथियम-आयन बैटरी स्टोरेज सिस्टम से जुड़े कई इनपुट्स को कस्टम ड्यूटी से छूट दी गई है। इससे बैटरी निर्माण की लागत घट सकती है, जिसका सीधा असर इलेक्ट्रिक वाहनों की कीमतों पर पड़ सकता है।
सोलर पैनल निर्माण में इस्तेमाल होने वाले सोलर ग्लास के कच्चे माल सोडियम एंटीमोनेट पर भी ड्यूटी हटा दी गई है। इससे सोलर एनर्जी सेक्टर में उत्पादन लागत कम होने की उम्मीद है।
हालांकि, यह साफ किया गया है कि उत्पादन लागत घटने के बावजूद ग्राहकों तक सस्ती कीमतों का लाभ पहुंचेगा या नहीं, यह कंपनियों की रणनीति पर निर्भर करेगा।
विदेश से जुड़े खर्चों पर राहत
बजट 2026 में विदेश यात्रा, पढ़ाई और इलाज से जुड़े खर्चों पर भी कुछ राहत दी गई है। निजी इस्तेमाल के लिए विदेश से मंगाए जाने वाले सामान पर कस्टम ड्यूटी को 20 प्रतिशत से घटाकर 10 प्रतिशत कर दिया गया है। इससे इलेक्ट्रॉनिक सामान और गिफ्ट आइटम पहले की तुलना में सस्ते पड़ सकते हैं।
विदेश यात्रा के टूर पैकेज पर स्रोत पर कर संग्रह को पहले के 5 या 20 प्रतिशत से घटाकर फ्लैट 2 प्रतिशत कर दिया गया है, वह भी बिना किसी सीमा के। इससे विदेश घूमने की योजना बना रहे लोगों को सीधी राहत मिलेगी।
इसी तरह विदेश में पढ़ाई और इलाज के लिए भेजे जाने वाले पैसों पर 10 लाख रुपये से अधिक की राशि पर अब 5 प्रतिशत की जगह 2 प्रतिशत टीसीएस लगेगा। यह फैसला छात्रों और मरीजों के परिवारों के लिए मददगार साबित हो सकता है।
शेयर बाजार और निवेश पर बढ़ा बोझ
जहां एक ओर सरकार ने उपभोग और उत्पादन से जुड़े कई क्षेत्रों में राहत दी है, वहीं दूसरी ओर वित्तीय लेन-देन को महंगा करने का रास्ता चुना है। बजट 2026 के बाद शेयर बाजार में ट्रेडिंग करना पहले की तुलना में महंगा हो जाएगा।
फ्यूचर्स ट्रेडिंग पर सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स को 0.02 प्रतिशत से बढ़ाकर 0.05 प्रतिशत कर दिया गया है। ऑप्शंस प्रीमियम पर एसटीटी को 0.1 प्रतिशत से बढ़ाकर 0.15 प्रतिशत कर दिया गया है। वहीं ऑप्शन एक्सरसाइज पर यह टैक्स 0.125 प्रतिशत से बढ़कर 0.15 प्रतिशत हो गया है।
इन बदलावों का सीधा असर फ्यूचर्स और ऑप्शंस सेगमेंट में सक्रिय निवेशकों पर पड़ेगा और शॉर्ट-टर्म ट्रेडिंग की लागत बढ़ेगी।
शेयर बायबैक पर सख्ती
कंपनियों के शेयर बायबैक को लेकर भी टैक्स स्ट्रक्चर सख्त किया गया है। अब प्रमोटर्स को कैपिटल गेन टैक्स के साथ अतिरिक्त टैक्स भी देना होगा। इससे बायबैक के जरिए मुनाफा निकालना कम आकर्षक हो सकता है।
सरकार का यह कदम यह संकेत देता है कि वह कॉरपोरेट टैक्स प्लानिंग के कुछ तरीकों पर लगाम लगाना चाहती है।
कुछ उत्पाद और कच्चा माल हुआ महंगा
बजट 2026 में कुछ केमिकल्स और उपभोक्ता सामानों पर पहले दी जा रही कस्टम ड्यूटी छूट खत्म कर दी गई है। पोटैशियम हाइड्रॉक्साइड जैसे रसायनों पर अब 7.5 प्रतिशत तक बेसिक कस्टम ड्यूटी लगेगी।
इन रसायनों के महंगे होने का असर उनसे बनने वाले उत्पादों की कीमतों पर भी पड़ सकता है। इसके अलावा मिनरल्स, स्क्रैप, शराब और तेंदूपत्ता की बिक्री पर स्रोत पर कर संग्रह बढ़ने से इन क्षेत्रों में लागत बढ़ने की संभावना है।
कुल मिलाकर क्या सस्ता और क्या महंगा
बजट 2026 के बाद इलाज से जुड़ी कई दवाइयां, ग्रीन एनर्जी उपकरण, इलेक्ट्रिक व्हीकल से जुड़े इनपुट, सोलर सेक्टर, माइक्रोवेव ओवन के कुछ हिस्से, लेदर और टेक्सटाइल उत्पाद, विदेश यात्रा और शिक्षा से जुड़े खर्च सस्ते होने की उम्मीद है।
वहीं शेयर बाजार में फ्यूचर्स और ऑप्शंस ट्रेडिंग, कुछ रसायन, स्क्रैप, मिनरल्स और शराब से जुड़े उत्पाद महंगे हो सकते हैं।
नीति संकेत और आगे की दिशा
वित्त मंत्री के बजट भाषण के समग्र विश्लेषण से यह स्पष्ट होता है कि सरकार ने इस बार उत्पादन और उपभोग को प्रोत्साहित करने के साथ-साथ वित्तीय लेन-देन पर कर बढ़ाने का रास्ता चुना है। यह एक संतुलन बनाने की कोशिश है, जहां आम उपभोक्ता और उद्योग को राहत दी जाए, जबकि सट्टा और शॉर्ट-टर्म वित्तीय गतिविधियों पर नियंत्रण रखा जाए।
निष्कर्ष
बजट 2026 कोई लोकलुभावन बजट नहीं है, बल्कि यह प्राथमिकताओं और दीर्घकालिक सोच को दर्शाता है। जहां स्वास्थ्य, ग्रीन एनर्जी और मैन्युफैक्चरिंग को समर्थन मिला है, वहीं निवेश और कुछ उपभोग गतिविधियों को महंगा किया गया है। आने वाले समय में इसका असर महंगाई, निवेश व्यवहार और औद्योगिक विकास पर कैसे पड़ता है, यह देखना अहम होगा।
