देश में निवेश के नाम पर आम लोगों से धन जुटाने और बाद में भुगतान रोक देने के मामलों की सूची में एक और बड़ा नाम जुड़ गया है। झारखंड के जमशेदपुर में सामने आए मैक्सीजोन टच इंडिया प्राइवेट लिमिटेड से जुड़े कथित 3000 करोड़ रुपये के घोटाले ने न केवल निवेशकों को झकझोर दिया है, बल्कि फिल्म और मनोरंजन जगत से जुड़े चर्चित नामों के कारण यह मामला राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में आ गया है।

इस बहुचर्चित प्रकरण में जमशेदपुर के साकची थाना में प्राथमिकी दर्ज की गई है, जिसमें कंपनी से जुड़े नौ लोगों को आरोपी बनाया गया है। इनमें फिल्म अभिनेता गोविंदा, शक्ति कपूर, चंकी पांडेय, रजा मुराद और गायक-नेता मनोज तिवारी जैसे चर्चित नाम शामिल हैं। आरोप है कि इन हस्तियों का उपयोग कंपनी ने निवेशकों का भरोसा जीतने के लिए किया।
साकची थाना में दर्ज FIR और जांच की शुरुआत
यह मामला न्यायालय में दर्ज एक परिवाद के आधार पर सामने आया, जिसके बाद साकची थाना पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज की। थाना प्रभारी के अनुसार, शिकायत में कंपनी पर निवेशकों को झूठे वादों के जरिए धन लगाने के लिए प्रेरित करने और बाद में भुगतान न करने का गंभीर आरोप लगाया गया है।
एफआईआर दर्ज होने के बाद पुलिस ने प्रारंभिक जांच शुरू कर दी है। मामले की गंभीरता को देखते हुए आर्थिक अपराध से जुड़ी केंद्रीय एजेंसियां भी पहले से ही इस प्रकरण पर नजर बनाए हुए हैं।
15 प्रतिशत मासिक ब्याज का प्रलोभन बना आधार
शिकायतकर्ताओं के अनुसार, मैक्सीजोन टच इंडिया प्राइवेट लिमिटेड ने निवेशकों को अत्यधिक आकर्षक योजना का लालच दिया। कंपनी का दावा था कि यदि कोई निवेशक न्यूनतम एक लाख रुपये निवेश करता है, तो उसे हर महीने 15 प्रतिशत ब्याज मिलेगा।
इस तरह के दावे आम निवेश योजनाओं से कहीं अधिक थे, लेकिन कंपनी ने अपने प्रचार-प्रसार और प्रभावशाली चेहरों के माध्यम से लोगों का विश्वास जीत लिया। कई निवेशकों ने इसे सुरक्षित और लाभकारी समझकर अपनी जमा पूंजी इसमें लगा दी।
नामी हस्तियों की मौजूदगी से बना भरोसा
शिकायत में यह भी कहा गया है कि कंपनी अपने कार्यक्रमों और प्रचार आयोजनों में नामी फिल्म कलाकारों और सार्वजनिक हस्तियों को आमंत्रित करती थी। इससे आम लोगों को यह भरोसा हो गया कि कंपनी विश्वसनीय है और इसके पीछे बड़े और प्रभावशाली लोग जुड़े हुए हैं।
इन्हीं आयोजनों और प्रचार गतिविधियों के कारण हजारों लोगों ने बिना गहन जांच के कंपनी में निवेश कर दिया। बाद में जब भुगतान रुक गया, तब जाकर निवेशकों को संदेह हुआ।
जमशेदपुर और झारखंड में निवेश का दायरा
प्राप्त जानकारी के अनुसार, केवल जमशेदपुर शहर से ही 10 हजार से अधिक निवेशकों ने कंपनी में निवेश किया। इस क्षेत्र से करीब 150 करोड़ रुपये से ज्यादा की राशि कंपनी में लगाई गई।
यदि पूरे झारखंड राज्य की बात करें, तो निवेश की कुल राशि लगभग 600 करोड़ रुपये बताई जा रही है। वहीं शिकायतकर्ताओं का दावा है कि देश के अन्य हिस्सों को मिलाकर यह आंकड़ा 3000 करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है।
जनवरी 2022 के बाद भुगतान बंद
शुरुआती दौर में कंपनी ने कुछ समय तक निवेशकों को ब्याज का भुगतान किया, जिससे लोगों का भरोसा और मजबूत हुआ। लेकिन जनवरी 2022 के बाद अचानक ब्याज का भुगतान बंद कर दिया गया।
निवेशकों ने कंपनी से संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन उन्हें कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला। इसके बाद धीरे-धीरे यह स्पष्ट होने लगा कि मामला गंभीर धोखाधड़ी का हो सकता है।
धोखाधड़ी की अवधि और समयरेखा
जांच से जुड़े दस्तावेजों और शिकायत के अनुसार, यह कथित धोखाधड़ी सितंबर 2021 से फरवरी 2022 के बीच की बताई जा रही है। इसी अवधि में बड़ी संख्या में निवेशकों से धन जुटाया गया और बाद में भुगतान रोक दिया गया।
इस समयरेखा के आधार पर पुलिस और अन्य जांच एजेंसियां वित्तीय लेन-देन, बैंक खातों और कंपनी के दस्तावेजों की जांच कर रही हैं।
कंपनी के निदेशक दंपति जेल में
मैक्सीजोन टच इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक चंद्रभूषण सिंह और उनकी पत्नी प्रियंका सिंह को पुलिस ने पहले ही गिरफ्तार कर लिया है। दोनों को धनबाद से पकड़ा गया था और वर्तमान में वे रांची जेल में बंद हैं।
बताया गया है कि यह दंपति बिहार के वैशाली जिले का निवासी है। गिरफ्तारी से पहले दोनों जमशेदपुर जेल में भी रखे गए थे। जांच एजेंसियां उनसे लगातार पूछताछ कर रही हैं।
ईडी की भूमिका और जांच
इस मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रवर्तन निदेशालय भी जांच में जुटा हुआ है। ईडी वित्तीय लेन-देन, मनी ट्रेल और संभावित धनशोधन के पहलुओं की जांच कर रही है।
सूत्रों के अनुसार, कंपनी के खातों, संपत्तियों और विदेश से जुड़े लेन-देन की भी पड़ताल की जा रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि निवेशकों का पैसा कहां और कैसे इस्तेमाल किया गया।
आरोपी बनाए गए चर्चित नामों पर सवाल
एफआईआर में जिन नामों को आरोपी बनाया गया है, वे सभी अलग-अलग क्षेत्रों में प्रसिद्ध हैं। इन पर आरोप है कि उन्होंने प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से कंपनी के प्रचार में भाग लिया, जिससे निवेशकों को कंपनी पर भरोसा हुआ।
हालांकि, इस मामले में अंतिम निष्कर्ष जांच के बाद ही सामने आएगा। कानून के अनुसार, जब तक दोष सिद्ध न हो, तब तक सभी आरोपी निर्दोष माने जाते हैं।
निवेशकों की पीड़ा और सामाजिक असर
इस घोटाले ने हजारों परिवारों की आर्थिक स्थिति पर गहरा असर डाला है। कई निवेशकों ने अपनी जीवनभर की जमा पूंजी, बच्चों की पढ़ाई और भविष्य की योजनाओं के लिए रखे पैसे इसमें लगा दिए थे।
जब भुगतान बंद हुआ, तब कई लोगों को आर्थिक संकट का सामना करना पड़ा। यह मामला एक बार फिर यह सवाल खड़ा करता है कि अत्यधिक मुनाफे का वादा करने वाली योजनाओं से निवेशकों को कितना सतर्क रहना चाहिए।
कानून और सतर्कता का संदेश
मैक्सीजोन घोटाला केवल एक आपराधिक मामला नहीं है, बल्कि यह समाज के लिए चेतावनी भी है। यह दिखाता है कि बिना जांच-पड़ताल किए किसी भी निवेश योजना में पैसा लगाना कितना जोखिम भरा हो सकता है।
सरकारी एजेंसियां लगातार लोगों को सतर्क रहने की सलाह देती हैं, लेकिन फिर भी ऐसे मामले सामने आते रहते हैं।
निष्कर्ष
जमशेदपुर में दर्ज यह प्राथमिकी देश के बड़े निवेश घोटालों में से एक के रूप में देखी जा रही है। जांच अभी जारी है और आने वाले समय में कई और खुलासे हो सकते हैं। निवेशकों को न्याय मिलेगा या नहीं, यह जांच और न्यायिक प्रक्रिया के पूरा होने के बाद ही तय होगा।
