भारत में बैंकिंग और डिजिटल भुगतान आम आदमी की जिंदगी का अहम हिस्सा बन चुके हैं। होम लोन, पर्सनल लोन, क्रेडिट कार्ड, यूपीआई और इंटरनेट बैंकिंग अब केवल सुविधाएं नहीं, बल्कि जरूरत बन चुकी हैं। लेकिन इसी तेजी के साथ शिकायतें भी बढ़ी हैं। कहीं लोन रिकवरी एजेंटों की बदतमीजी से लोग मानसिक तनाव में आ जाते हैं, तो कहीं बैंक कर्मचारियों द्वारा गलत प्रोडक्ट बेचने की शिकायतें सामने आती हैं। डिजिटल पेमेंट के बढ़ते चलन के साथ धोखाधड़ी के मामले भी चिंता का विषय बन चुके हैं।

इन्हीं सभी समस्याओं को गंभीरता से लेते हुए भारतीय रिजर्व बैंक ने बड़ा कदम उठाने का फैसला किया है। हालिया मौद्रिक नीति बैठक के बाद यह साफ हो गया है कि अब ग्राहक के अधिकारों को नजरअंदाज करना बैंकों के लिए आसान नहीं रहेगा। केंद्रीय बैंक तीन नए ड्राफ्ट रेगुलेशन लाने जा रहा है, जिनका मकसद बैंकिंग सिस्टम में पारदर्शिता, जवाबदेही और नैतिकता को मजबूत करना है।
लोन रिकवरी एजेंटों की मनमानी पर लगेगी लगाम
बीते कुछ वर्षों में लोन रिकवरी से जुड़ी शिकायतों में तेजी से इजाफा हुआ है। कई मामलों में देखा गया कि रिकवरी एजेंट देर रात फोन करते हैं, बार-बार कॉल कर मानसिक दबाव बनाते हैं, रिश्तेदारों और पड़ोसियों को फोन करके बदनामी करते हैं या घर आकर अभद्र भाषा का इस्तेमाल करते हैं। ऐसे मामलों ने न केवल ग्राहकों को परेशान किया, बल्कि बैंकिंग सिस्टम की छवि को भी नुकसान पहुंचाया।
RBI अब इस पूरे सिस्टम को नए सिरे से परिभाषित करने जा रहा है। नए नियमों के तहत यह स्पष्ट कर दिया जाएगा कि रिकवरी एजेंट बैंक का ही प्रतिनिधि माना जाएगा। इसका मतलब यह होगा कि एजेंट की हरकतों की जिम्मेदारी सीधे बैंक पर होगी। अगर कोई एजेंट नियमों का उल्लंघन करता है, तो बैंक पर जुर्माना लगाया जा सकता है और कड़ी कार्रवाई भी हो सकती है।
इस फैसले से बैंकों को मजबूर होना पड़ेगा कि वे अपने रिकवरी एजेंटों को बेहतर ट्रेनिंग दें, उनकी निगरानी करें और यह सुनिश्चित करें कि वसूली की प्रक्रिया पूरी तरह मानवीय और कानून के दायरे में हो।
डर और दबाव से नहीं, नियमों से होगी रिकवरी
RBI का साफ मानना है कि लोन की वसूली जरूरी है, लेकिन यह प्रक्रिया डर, धमकी या अपमान के जरिए नहीं हो सकती। ग्राहक किसी भी परिस्थिति में अपनी गरिमा नहीं खो सकता। नए दिशा-निर्देशों में यह तय किया जाएगा कि रिकवरी के लिए कॉल करने का समय क्या होगा, भाषा कैसी होनी चाहिए और किन हालात में व्यक्तिगत मुलाकात की जा सकती है।
इस बदलाव से उन लाखों लोगों को राहत मिलेगी, जो आर्थिक संकट के समय लोन चुकाने में देरी के कारण मानसिक उत्पीड़न झेलते हैं। RBI का संदेश साफ है कि कर्ज की वसूली जरूरी है, लेकिन इंसानियत से समझौता नहीं किया जा सकता।
मिस-सेलिंग पर RBI की सख्ती
बैंक में खाता खोलना, एफडी कराना या लोन लेना अब आम प्रक्रिया है। लेकिन अक्सर देखा गया है कि इसी दौरान ग्राहकों को ऐसे इंश्योरेंस प्लान या निवेश उत्पाद बेच दिए जाते हैं, जिनकी उन्हें जरूरत नहीं होती। कई बार ग्राहक को यह भी ठीक से नहीं बताया जाता कि वह किस प्रोडक्ट में पैसा लगा रहा है। बाद में जब नुकसान होता है, तब उसे समझ आता है कि उसके साथ मिस-सेलिंग हुई है।
RBI अब इस पर भी सख्त रुख अपनाने जा रहा है। नए नियमों के तहत बैंकों को यह सुनिश्चित करना होगा कि वे किसी भी ग्राहक को वही प्रोडक्ट ऑफर करें, जो उसकी जरूरत, उम्र, आय और जोखिम उठाने की क्षमता के अनुसार हो। केवल टारगेट पूरा करने के लिए गलत प्रोडक्ट बेचने की प्रवृत्ति पर रोक लगाई जाएगी।
इस कदम से बैंक कर्मचारियों की जवाबदेही बढ़ेगी और ग्राहक को यह भरोसा मिलेगा कि बैंक उसे सलाहकार की तरह मार्गदर्शन दे रहा है, न कि केवल विक्रेता की तरह।
डिजिटल फ्रॉड पर ₹25,000 तक मुआवजा
डिजिटल भुगतान ने जहां जिंदगी आसान बनाई है, वहीं फ्रॉड के खतरे भी बढ़ा दिए हैं। छोटे-छोटे अनधिकृत ट्रांजेक्शन से लेकर बड़े साइबर फ्रॉड तक, हर दिन हजारों लोग इसकी चपेट में आ रहे हैं। कई बार ग्राहक की गलती न होने के बावजूद उसे नुकसान उठाना पड़ता है।
RBI ने इस समस्या को गंभीरता से लेते हुए प्रस्ताव दिया है कि छोटे मूल्य के अनधिकृत डिजिटल ट्रांजेक्शन होने पर ग्राहकों को ₹25,000 तक का मुआवजा दिया जा सकता है। इसके लिए एक नया फ्रेमवर्क तैयार किया जा रहा है, जिसमें यह तय होगा कि ग्राहक ने समय पर शिकायत की या नहीं और बैंक ने सुरक्षा के मानकों का पालन किया या नहीं।
इस फैसले से डिजिटल पेमेंट सिस्टम पर लोगों का भरोसा और मजबूत होगा। ग्राहक को यह एहसास होगा कि अगर उसने सतर्कता बरती है, तो नुकसान की भरपाई बैंक को करनी होगी।
समय पर शिकायत करना होगा जरूरी
हालांकि RBI यह भी साफ कर रहा है कि मुआवजा तभी मिलेगा, जब ग्राहक समय पर अनधिकृत ट्रांजेक्शन की जानकारी देगा। इसका मकसद यह है कि फ्रॉड को शुरुआती स्तर पर ही रोका जा सके। इससे बैंक और ग्राहक दोनों की जिम्मेदारी तय होगी और डिजिटल सिस्टम ज्यादा सुरक्षित बनेगा।
सीनियर सिटीजन के लिए अतिरिक्त सुरक्षा
डिजिटल फ्रॉड के सबसे बड़े शिकार अक्सर बुजुर्ग लोग होते हैं। तकनीक की कम जानकारी और भरोसे की आदत उन्हें आसानी से ठगों के जाल में फंसा देती है। इसे ध्यान में रखते हुए RBI एक अलग चर्चा पत्र लाने की तैयारी कर रहा है, जिसमें बुजुर्गों और कम जागरूक यूजर्स के लिए अतिरिक्त सुरक्षा उपायों पर सुझाव मांगे जाएंगे।
इन उपायों में अतिरिक्त ऑथेंटिकेशन, ट्रांजेक्शन में देरी और अलर्ट सिस्टम को और मजबूत करना शामिल हो सकता है। इसका मकसद यह है कि अगर कोई संदिग्ध लेनदेन हो, तो उसे तुरंत रोका जा सके और नुकसान से पहले कार्रवाई की जा सके।
रेपो रेट 5.25% पर बरकरार
मौद्रिक नीति बैठक में RBI ने ब्याज दरों को लेकर भी अहम फैसला लिया है। इस बार रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं किया गया और इसे 5.25% पर ही रखा गया है। इसका सीधा मतलब यह है कि फिलहाल होम लोन, कार लोन और अन्य कर्जों की EMI में कोई बढ़ोतरी नहीं होगी।
गवर्नर ने संकेत दिया कि महंगाई को काबू में रखना उनकी प्राथमिकता है और इसी संतुलन को ध्यान में रखते हुए ब्याज दरों पर फैसला लिया गया है। इससे लोन लेने वाले ग्राहकों को राहत मिलेगी और बाजार में स्थिरता बनी रहेगी।
ग्राहक केंद्रित बैंकिंग की ओर बड़ा कदम
RBI के ये सभी प्रस्ताव एक बड़े बदलाव की ओर इशारा करते हैं। बैंकिंग सिस्टम अब केवल मुनाफे पर नहीं, बल्कि ग्राहक के अनुभव और सुरक्षा पर भी ध्यान देगा। लोन रिकवरी से लेकर डिजिटल ट्रांजेक्शन तक, हर स्तर पर जवाबदेही तय होगी।
यह बदलाव धीरे-धीरे लागू होगा, लेकिन इसका असर लंबे समय तक दिखेगा। ग्राहक को यह भरोसा मिलेगा कि उसके साथ गलत होने पर उसके पास एक मजबूत नियामक का सहारा है।
