अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट कई बार सिर्फ़ खेल तक सीमित नहीं रहता, बल्कि वह राजनीति, कूटनीति और जनभावनाओं से भी गहराई से जुड़ जाता है। बांग्लादेश के अनुभवी बाएं हाथ के तेज़ गेंदबाज़ मुस्तफ़िज़ुर रहमान के साथ हाल के दिनों में जो कुछ हुआ, उसने इसी सच्चाई को एक बार फिर सामने रख दिया। आईपीएल से बाहर किए जाने के बाद पाकिस्तान सुपर लीग में उनकी एंट्री सिर्फ़ एक खिलाड़ी के करियर का नया अध्याय नहीं है, बल्कि दक्षिण एशिया के क्रिकेट परिदृश्य में चल रहे तनावों और समीकरणों का भी प्रतिबिंब बन गई है।

मुस्तफ़िज़ुर रहमान, जिन्हें दुनिया के सबसे खतरनाक और चतुर तेज़ गेंदबाज़ों में गिना जाता है, को पाकिस्तान सुपर लीग की फ्रेंचाइज़ी लाहौर कलंदर्स ने 6 करोड़ 44 लाख पाकिस्तानी रुपये में साइन किया है। यह फैसला ऐसे समय आया है, जब वह इंडियन प्रीमियर लीग से बाहर हो चुके हैं और इस फैसले ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तीखी बहस को जन्म दिया है।
लाहौर कलंदर्स और पुराना रिश्ता
मुस्तफ़िज़ुर रहमान का लाहौर कलंदर्स से रिश्ता नया नहीं है। इससे पहले वह 2016 और 2018 में भी इस फ्रेंचाइज़ी का हिस्सा रह चुके हैं। हालांकि, दोनों ही मौकों पर चोटों ने उनके खेलने की राह रोक दी थी और वह मैदान पर अपनी छाप नहीं छोड़ पाए थे। इसके बावजूद लाहौर कलंदर्स के प्रबंधन ने उनके साथ भरोसे का रिश्ता बनाए रखा।
टीम के मालिक सामिन राणा ने मुस्तफ़िज़ुर के दोबारा जुड़ने पर भावुक प्रतिक्रिया दी। उनका कहना था कि मुस्तफ़िज़ुर उनके लिए सिर्फ़ एक खिलाड़ी नहीं, बल्कि परिवार का हिस्सा हैं। उन्होंने यह भी कहा कि टीम उन्हें फिर से अपने ड्रेसिंग रूम में देखकर बेहद खुश है। यह बयान केवल खेल भावना का नहीं, बल्कि मौजूदा हालात में एक राजनीतिक और भावनात्मक संदेश भी माना जा रहा है।
आईपीएल में सफ़र और अचानक विदाई
मुस्तफ़िज़ुर रहमान का आईपीएल करियर भी उतार-चढ़ाव से भरा रहा है। वह पहले दिल्ली कैपिटल्स और चेन्नई सुपर किंग्स जैसी टीमों का हिस्सा रह चुके हैं। उनकी धीमी गेंदें और अंतिम ओवरों में विकेट लेने की क्षमता ने उन्हें लीग में खास पहचान दिलाई।
हाल ही में कोलकाता नाइट राइडर्स ने उन्हें 9 करोड़ 20 लाख भारतीय रुपये में खरीदा था। यह रकम बताती है कि फ्रेंचाइज़ी उन्हें कितना अहम मान रही थी। लेकिन हालात तेजी से बदले और कुछ ही समय बाद उन्हें टीम से रिलीज़ कर दिया गया। यह फैसला सिर्फ़ खेल के आधार पर नहीं था, बल्कि इसके पीछे राजनीतिक और सामाजिक दबावों की भी भूमिका बताई गई।
भारत-बांग्लादेश के बीच तनाव की पृष्ठभूमि
इस पूरे विवाद की जड़ें भारत और बांग्लादेश के बीच हाल के दिनों में बढ़े तनाव से जुड़ी हैं। भारत ने बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यकों की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता जताई थी। इसके बाद भारत के कई हिस्सों में विरोध प्रदर्शन हुए और आईपीएल में बांग्लादेशी खिलाड़ियों को शामिल न करने की मांग उठने लगी।
इन प्रदर्शनों और दबावों के बीच भारतीय क्रिकेट बोर्ड ने कोलकाता नाइट राइडर्स को मुस्तफ़िज़ुर रहमान को रिलीज़ करने के निर्देश दिए। यह फैसला सामने आते ही क्रिकेट जगत में भूचाल आ गया। कई लोगों ने इसे खेल में राजनीति की खुली दखलअंदाज़ी बताया, जबकि कुछ ने इसे सुरक्षा से जुड़ा कदम कहा।
बांग्लादेश का कड़ा रुख़
मुस्तफ़िज़ुर को आईपीएल से हटाए जाने के बाद बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड ने कड़ा रुख अपनाया। बोर्ड ने सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए भारत में होने वाले टी-20 वर्ल्ड कप में खेलने से इनकार कर दिया। उनका कहना था कि जब एक खिलाड़ी की सुरक्षा सुनिश्चित नहीं की जा सकती, तो पूरी टीम की सुरक्षा पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
बांग्लादेश बोर्ड ने यह भी मांग की कि उसके मैच तटस्थ स्थान पर कराए जाएं। हालांकि, अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद ने इन आपत्तियों को स्वीकार नहीं किया और बांग्लादेश के मैच भारत से बाहर शिफ्ट करने से मना कर दिया। अंततः टी-20 वर्ल्ड कप में बांग्लादेश की जगह स्कॉटलैंड को शामिल कर लिया गया।
पाकिस्तान की एंट्री और समर्थन
इस पूरे घटनाक्रम के बाद पाकिस्तान भी खुलकर सामने आया। पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड के चेयरमैन मोहसिन नक़वी ने बांग्लादेश के साथ हुए व्यवहार को अन्यायपूर्ण बताया और पूरा समर्थन देने की घोषणा की। इसके बाद पाकिस्तानी सरकार ने भी बड़ा ऐलान किया।
सरकार ने कहा कि वह वर्ल्ड कप के लिए अपनी टीम श्रीलंका भेजेगी, लेकिन भारत के खिलाफ तय मैच नहीं खेलेगी। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ ने इस फैसले को सोच-समझकर लिया गया कदम बताया और बांग्लादेश के साथ एकजुटता जताई।
पीएसएल का नया मॉडल और मुस्तफ़िज़ुर की एंट्री
इसी बीच पाकिस्तान सुपर लीग के सीजन 11 के लिए एक नया नीलामी मॉडल अपनाया गया। पहली बार आईपीएल की तर्ज पर यहां भी खिलाड़ियों की नीलामी का सिस्टम लागू किया गया। इसके तहत फ्रेंचाइज़ियों को यह अनुमति दी गई कि वे ऐसे विदेशी खिलाड़ियों को सीधे साइन कर सकती हैं, जो पिछले सीजन का हिस्सा नहीं थे।
लाहौर कलंदर्स ने इसी प्रावधान का इस्तेमाल करते हुए मुस्तफ़िज़ुर रहमान को सीधे साइन किया। इससे पहले सियालकोट स्टैलियंस ने भी इसी तरीके से स्टीव स्मिथ को अपनी टीम में शामिल किया था। इस नए मॉडल ने पीएसएल को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर और आकर्षक बना दिया है।
सोशल मीडिया पर मिली-जुली प्रतिक्रिया
मुस्तफ़िज़ुर रहमान की लाहौर कलंदर्स में एंट्री के बाद पाकिस्तान में खुशी की लहर देखी गई। सोशल मीडिया पर कई पाकिस्तानी यूज़र्स ने इस फैसले का स्वागत किया और इसे आईपीएल के मुकाबले पीएसएल की जीत बताया।
वहीं भारत में इस फैसले की आलोचना भी हुई। कुछ यूज़र्स ने इसे राजनीति से प्रेरित कदम बताया, तो कुछ ने कहा कि खेल को राजनीति से दूर रखना चाहिए। इस तरह मुस्तफ़िज़ुर का नाम एक बार फिर क्रिकेट से आगे की बहसों का केंद्र बन गया।
बांग्लादेश में प्रतिक्रिया और आधिकारिक बयान
बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के युवा एवं खेल मंत्रालय के सलाहकार आसिफ़ नज़रुल ने पाकिस्तान के समर्थन पर आभार जताया। उन्होंने सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए कहा कि इस मुश्किल समय में पाकिस्तान का साथ बांग्लादेश के लिए अहम है।
आसिफ़ नज़रुल पहले भी मुस्तफ़िज़ुर को केकेआर से हटाए जाने के फैसले का कड़ा विरोध कर चुके हैं। उनका कहना था कि यह फैसला उग्र सांप्रदायिक दबावों के आगे झुकने का नतीजा है और इसका कड़ा विरोध किया जाना चाहिए।
अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट पर असर
इस पूरे विवाद ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट की राजनीति को एक बार फिर उजागर कर दिया है। खिलाड़ियों की सुरक्षा, बोर्डों की भूमिका और सरकारों का हस्तक्षेप, ये सभी मुद्दे एक साथ सामने आए हैं। टी-20 वर्ल्ड कप जैसे बड़े टूर्नामेंट से एक टीम का बाहर होना सिर्फ़ खेल का नुकसान नहीं, बल्कि दर्शकों और खेल भावना के लिए भी झटका है।
मुस्तफ़िज़ुर रहमान का क्रिकेट सफ़र
30 वर्षीय मुस्तफ़िज़ुर रहमान का करियर आंकड़ों के लिहाज़ से बेहद प्रभावशाली रहा है। उन्होंने बांग्लादेश के लिए 15 टेस्ट मैच खेले हैं और 31 विकेट लिए हैं। वनडे क्रिकेट में उन्होंने 116 मैचों में 177 विकेट चटकाए हैं। वहीं टी-20 फॉर्मेट में 126 मैचों में उनके नाम 158 विकेट दर्ज हैं।
उनकी गेंदबाज़ी की खासियत उनकी स्लोअर गेंदें और डेथ ओवरों में नियंत्रण है। यही वजह है कि दुनिया की हर बड़ी लीग में उनकी मांग रही है।
भविष्य की राह
अब सवाल यह है कि मुस्तफ़िज़ुर रहमान का भविष्य किस दिशा में जाएगा। पीएसएल में उनका प्रदर्शन न सिर्फ़ लाहौर कलंदर्स के लिए अहम होगा, बल्कि यह भी तय करेगा कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उनकी छवि कैसे बनती है।
यह पूरा घटनाक्रम यह भी दिखाता है कि क्रिकेट अब सिर्फ़ एक खेल नहीं, बल्कि देशों के रिश्तों और भावनाओं का आईना बन चुका है। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या खेल एक बार फिर राजनीति से ऊपर उठ पाएगा या ऐसे विवाद इसका हिस्सा बने रहेंगे।
