इंदौर एक बार फिर मानवता और सेवा की मिसाल बनने जा रहा है। ऐसे बच्चे और वयस्क, जो जन्म से कटे-फटे होंठ या चेहरे की अन्य विकृतियों के कारण समाज में आत्मविश्वास की कमी, मानसिक पीड़ा और सामाजिक दूरी झेलते आए हैं, उनके लिए यह खबर किसी वरदान से कम नहीं है। इंदौर में 8 फरवरी से 13 फरवरी तक एक विशेष निःशुल्क प्लास्टिक सर्जरी कैंप का आयोजन किया जा रहा है, जहां देश और विदेश के अनुभवी डॉक्टर मिलकर मरीजों का इलाज करेंगे।

प्रशासन और सामाजिक संगठनों की साझा पहल
इस निःशुल्क प्लास्टिक सर्जरी कैंप का आयोजन इंदौर जिला प्रशासन और महिला एवं बाल विकास विभाग के सहयोग से किया जा रहा है। इस पूरे अभियान की जिम्मेदारी सामाजिक सेवा के क्षेत्र में सक्रिय स्वर्णिम फाउंडेशन इंदौर ने संभाली है। उनके साथ Faces of Tomorrow America और ऑल इंडिया श्वेताम्बर स्थानकवासी जैन कॉन्फ्रेंस भी इस मानवीय पहल में सहभागी बने हैं। यह साझेदारी बताती है कि जब प्रशासन और समाज मिलकर काम करते हैं, तो असंभव भी संभव हो सकता है।
8 से 13 फरवरी तक चलेगा विशेष कैंप
यह कैंप लगातार छह दिनों तक चलेगा। इस दौरान चयनित मरीजों की जांच, काउंसलिंग और फिर निःशुल्क सर्जरी की जाएगी। आयोजनकर्ताओं का लक्ष्य है कि अधिक से अधिक जरूरतमंद लोगों तक इस सुविधा को पहुंचाया जाए, ताकि आर्थिक तंगी के कारण कोई भी व्यक्ति इलाज से वंचित न रह जाए।
अमेरिकी विशेषज्ञ करेंगे सर्जरी
इस कैंप की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें अमेरिका से आए अनुभवी प्लास्टिक सर्जन ऑपरेशन करेंगे। ये विशेषज्ञ पहले भी दुनिया के कई देशों में इस तरह के निःशुल्क चिकित्सा अभियानों में हिस्सा ले चुके हैं। उनके अनुभव और तकनीकी दक्षता से मरीजों को अंतरराष्ट्रीय स्तर का इलाज मिलेगा, वह भी बिना किसी शुल्क के।
कटे-फटे होंठ के मरीजों के लिए नई उम्मीद
कटा हुआ होंठ या तालु एक ऐसी समस्या है, जो सिर्फ शारीरिक नहीं बल्कि मानसिक और सामाजिक भी होती है। ऐसे बच्चे स्कूल में मजाक का शिकार होते हैं, बोलने और खाने में परेशानी झेलते हैं और धीरे-धीरे खुद को समाज से अलग महसूस करने लगते हैं। यह कैंप ऐसे मरीजों के लिए एक नई शुरुआत का अवसर लेकर आया है।
सिर्फ सर्जरी नहीं, आत्मसम्मान की वापसी
डॉक्टरों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का मानना है कि इस तरह के ऑपरेशन सिर्फ चेहरे की बनावट नहीं बदलते, बल्कि मरीजों का आत्मविश्वास भी लौटाते हैं। जब एक बच्चा या युवा सामान्य रूप से बोल और मुस्कुरा पाता है, तो उसका पूरा जीवन बदल जाता है। यही इस कैंप का असली उद्देश्य है।
महिला एवं बाल विकास विभाग की अहम भूमिका
महिला एवं बाल विकास विभाग इस कैंप में विशेष भूमिका निभा रहा है। विभाग द्वारा जरूरतमंद बच्चों की पहचान, उनके परिवारों से संपर्क और उन्हें कैंप तक लाने की व्यवस्था में मदद की जा रही है। कई मामलों में ऐसे परिवार सामने आते हैं, जिन्हें इस समस्या की गंभीरता और इलाज की जानकारी ही नहीं होती। विभाग ऐसे परिवारों को जागरूक भी कर रहा है।
Faces of Tomorrow America का योगदान
Faces of Tomorrow America एक अंतरराष्ट्रीय संगठन है, जो दुनिया भर में चेहरे से जुड़ी जन्मजात समस्याओं के इलाज के लिए काम करता है। इस संस्था के डॉक्टर और मेडिकल स्टाफ न सिर्फ ऑपरेशन करते हैं, बल्कि स्थानीय डॉक्टरों को भी आधुनिक तकनीकों का प्रशिक्षण देते हैं। इससे भविष्य में भी ऐसे इलाज स्थानीय स्तर पर संभव हो पाते हैं।
जैन कॉन्फ्रेंस का सामाजिक सहयोग
ऑल इंडिया श्वेताम्बर स्थानकवासी जैन कॉन्फ्रेंस लंबे समय से सामाजिक सेवा के कार्यों में सक्रिय रही है। इस कैंप में उनकी भागीदारी आर्थिक सहयोग, संसाधनों की व्यवस्था और स्वयंसेवकों के माध्यम से मरीजों की देखभाल में दिखाई देगी। यह सहयोग इस बात का प्रमाण है कि धार्मिक और सामाजिक संगठन मिलकर समाज में बड़ा बदलाव ला सकते हैं।
चयन प्रक्रिया और चिकित्सा जांच
कैंप में आने वाले सभी मरीजों की पहले विस्तृत जांच की जाएगी। डॉक्टर यह तय करेंगे कि कौन सा मरीज सर्जरी के लिए उपयुक्त है और किसे आगे के इलाज की जरूरत है। यह पूरी प्रक्रिया पारदर्शी और मरीज की सुरक्षा को ध्यान में रखकर की जाएगी।
बच्चों से लेकर वयस्कों तक को लाभ
इस कैंप का लाभ सिर्फ बच्चों तक सीमित नहीं है। ऐसे कई युवा और वयस्क भी होते हैं, जो बचपन में इलाज न होने के कारण आज तक इस समस्या के साथ जी रहे हैं। यह कैंप उन्हें भी नया जीवन शुरू करने का अवसर देगा।
आर्थिक बोझ से पूरी तरह मुक्ति
आमतौर पर प्लास्टिक सर्जरी का खर्च हजारों या लाखों रुपये तक पहुंच जाता है। गरीब और मध्यम वर्ग के परिवारों के लिए यह खर्च उठाना लगभग असंभव होता है। इस कैंप में सभी ऑपरेशन, दवाइयां और आवश्यक जांच पूरी तरह निःशुल्क होंगी।
ऑपरेशन के बाद भी मिलेगी देखभाल
सर्जरी के बाद मरीजों की देखभाल भी इस कैंप का अहम हिस्सा है। डॉक्टर ऑपरेशन के बाद जरूरी निर्देश देंगे और जरूरत पड़ने पर फॉलोअप भी किया जाएगा। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि मरीज पूरी तरह स्वस्थ होकर घर लौटे।
समाज में जागरूकता का प्रयास
इस आयोजन के माध्यम से आयोजक समाज में यह संदेश भी देना चाहते हैं कि कटे-फटे होंठ या चेहरे की विकृति कोई अभिशाप नहीं है। यह एक चिकित्सीय समस्या है, जिसका इलाज संभव है। सही समय पर इलाज से मरीज सामान्य जीवन जी सकता है।
प्रशासन की सराहनीय पहल
इंदौर जिला प्रशासन द्वारा इस तरह के कैंप को समर्थन देना यह दिखाता है कि सरकार सिर्फ योजनाएं ही नहीं बनाती, बल्कि जमीनी स्तर पर भी लोगों के जीवन में बदलाव लाने के लिए काम करती है। यह मॉडल अन्य जिलों के लिए भी प्रेरणास्रोत बन सकता है।
स्थानीय डॉक्टरों को भी मिलेगा लाभ
इस कैंप के दौरान स्थानीय डॉक्टरों और मेडिकल स्टाफ को अमेरिकी विशेषज्ञों के साथ काम करने का अवसर मिलेगा। इससे उन्हें नई तकनीकें सीखने और अपने कौशल को बेहतर बनाने में मदद मिलेगी।
मरीजों और परिजनों की उम्मीदें
कैंप की जानकारी मिलते ही कई परिवारों ने संपर्क करना शुरू कर दिया है। उनके चेहरे पर उम्मीद और राहत साफ देखी जा सकती है। वर्षों से जिस इलाज का सपना वे देख रहे थे, वह अब हकीकत बनने वाला है।
सामाजिक बदलाव की दिशा में कदम
यह कैंप सिर्फ इलाज तक सीमित नहीं है, बल्कि यह समाज में समानता और करुणा का संदेश भी देता है। जब किसी व्यक्ति का चेहरा मुस्कुराता है, तो उसका पूरा परिवार और समाज भी मुस्कुराता है।
