मध्यप्रदेश में इस साल ठंड ने कई वर्षों के रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं।
अक्टूबर के अंत और नवंबर की शुरुआत से ही प्रदेश के कई जिलों में हाड़ कंपाने वाली ठंड पड़ रही है। पहाड़ों से आने वाली बर्फीली हवाओं ने मौसम को और भी सर्द बना दिया है।
ऐसे में भोपाल पुलिस कमिश्नरेट ने भी अपने जवानों की सुरक्षा और सुविधा को ध्यान में रखते हुए वर्दी में अहम बदलाव करने का फैसला लिया है।

भोपाल पुलिस आयुक्त हरिनारायण चारी मिश्रा ने सोमवार, 10 नवंबर 2025 को एक औपचारिक आदेश जारी किया, जिसमें ठंड के मौसम को देखते हुए सभी पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों को शीतकालीन गणवेश (विंटर यूनिफॉर्म) धारण करने के निर्देश दिए गए हैं।
आदेश के मुख्य बिंदु
आयुक्त कार्यालय से जारी आदेश में साफ लिखा गया है —
> “नगरीय पुलिस जिला भोपाल स्थित सभी इकाइयों के पुलिस अधिकारी एवं कर्मचारी दिनांक 10 नवंबर 2025 से शीतकालीन गणवेश (अंगोला शर्ट एवं जर्सी) धारण करेंगे।”
इसका मतलब यह है कि अब भोपाल की सड़कों पर पुलिसकर्मी फुल आस्तीन की अंगोला शर्ट और जर्सी (स्वेटर) में नजर आएंगे।
यह ड्रेस न केवल ठंड से बचाव में मदद करेगी बल्कि पुलिस बल की एकरूपता और अनुशासन को भी बरकरार रखेगी।
क्या है “अंगोला शर्ट” और क्यों चुनी गई?
“अंगोला शर्ट” दरअसल एक मोटे ऊनी कपड़े से बनी फुल स्लीव शर्ट होती है, जो ठंड के मौसम में शरीर को गर्म रखती है।
यह पुलिसकर्मियों की वर्दी के रंग और डिजाइन से मेल खाती है ताकि ड्रेस कोड में कोई असमानता न दिखे।
अंगोला शर्ट को चुनने का कारण यह है कि यह न केवल टिकाऊ होती है बल्कि लंबे समय तक पहने जाने पर भी आरामदायक रहती है।
इसकी आस्तीनें फोल्ड नहीं की जा सकतीं — यह पुलिस की ड्रेसिंग डिसिप्लिन का हिस्सा है।
पुलिस रेगुलेशन एक्ट 1961 में इसका उल्लेख
दरअसल, यह बदलाव कोई नया प्रयोग नहीं है।
मध्यप्रदेश पुलिस रेगुलेशन एक्ट, 1961 में स्पष्ट प्रावधान है कि सर्दियों के चार महीनों के दौरान पुलिसकर्मी अंगोला शर्ट या वर्दी के स्वेटर का उपयोग कर सकते हैं।
यह अवधि सामान्यतः नवंबर से फरवरी तक मानी जाती है।
एक्ट के मुताबिक —
पुलिसकर्मी को ठंड के दिनों में फुल आस्तीन की शर्ट पहनना अनिवार्य है।
अगर कोई सामान्य दिनों की तरह हाफ स्लीव शर्ट पहनना चाहता है, तो उसके ऊपर वर्दी का स्वेटर पहनना जरूरी है।
आस्तीन फोल्ड करना नियमों के खिलाफ है।
नियमों का पालन न करने पर अनुशासनात्मक कार्रवाई और दंड का भी प्रावधान है।
ठंड से बचाव के साथ अनुशासन पर भी जोर
भोपाल पुलिस आयुक्त हरिनारायण चारी मिश्रा का कहना है कि यह आदेश केवल ठंड से बचाव के लिए नहीं, बल्कि वर्दी की गरिमा और एकरूपता बनाए रखने के उद्देश्य से भी है।
उनका कहना है —
> “पुलिस वर्दी केवल कपड़ा नहीं, बल्कि जिम्मेदारी और अनुशासन का प्रतीक है। इसलिए इसका पालन पूरी गंभीरता से किया जाना चाहिए।”
इस आदेश से पुलिस बल के भीतर अनुशासन और ड्रेस कोड की एकरूपता बनी रहेगी।
साथ ही, ठंड के मौसम में ड्यूटी करने वाले जवानों को अतिरिक्त आराम मिलेगा।
राजधानी से शुरू होकर पूरे राज्य में लागू होने की संभावना
हालांकि यह आदेश फिलहाल भोपाल के लिए जारी किया गया है, लेकिन संभावना है कि अगले कुछ दिनों में पूरे मध्यप्रदेश पुलिस बल में इसे लागू कर दिया जाएगा।
राज्य के अन्य शहरों — जैसे इंदौर, जबलपुर, ग्वालियर और रीवा — में भी तापमान लगातार गिर रहा है।
ऐसे में वहां की पुलिस इकाइयां भी इस आदेश को अपनाने पर विचार कर सकती हैं।
महिला पुलिसकर्मियों के लिए विशेष प्रावधान
ठंड के मौसम को ध्यान में रखते हुए महिला पुलिसकर्मियों के लिए भी यही ड्रेस कोड लागू रहेगा।
महिलाएं भी फुल स्लीव अंगोला शर्ट और जर्सी पहनेंगी।
इससे न केवल समानता बनी रहेगी बल्कि महिला पुलिसकर्मियों को ड्यूटी के दौरान आराम और सुरक्षा दोनों मिलेगी।
ठंड में ड्यूटी करने वाले पुलिसकर्मियों की चुनौतियां
भोपाल में रात के समय कई पुलिसकर्मी चौकियों, सड़कों और संवेदनशील इलाकों में तैनात रहते हैं।
ठंडी हवाओं और ओस की नमी में लंबी ड्यूटी के कारण उन्हें अक्सर सर्दी-जुकाम, खांसी और जोड़ों के दर्द जैसी परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
नई वर्दी से इन दिक्कतों में राहत मिलने की उम्मीद है।
एक जवान ने कहा —
> “हम लोग रातभर खुले आसमान के नीचे ड्यूटी करते हैं। नई जर्सी और अंगोला शर्ट से ठंड काफी कम लगेगी।”
वर्दी केवल पहचान नहीं, एक जिम्मेदारी
पुलिस की वर्दी हमेशा से एक गरिमा, अनुशासन और सम्मान का प्रतीक रही है।
मौसम के अनुसार किए गए ये छोटे-छोटे बदलाव न केवल स्वास्थ्य की दृष्टि से आवश्यक हैं, बल्कि यह भी दर्शाते हैं कि पुलिस प्रशासन अपने कर्मचारियों के कल्याण और कार्य-सुविधा को लेकर संवेदनशील है।
सर्दी में जवानों को ठंड से बचाने के साथ-साथ उनका मनोबल बनाए रखना भी उतना ही जरूरी है — क्योंकि यही वह बल है जो दिन-रात नागरिकों की सुरक्षा में तैनात रहता है।
निष्कर्ष
भोपाल पुलिस की नई “विंटर यूनिफॉर्म” केवल एक ड्रेस परिवर्तन नहीं, बल्कि यह संवेदनशील प्रशासनिक सोच और अनुशासन की मिसाल है।
इस कदम से न केवल जवानों को ठंड से राहत मिलेगी, बल्कि उनके कार्य प्रदर्शन और स्वास्थ्य पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।
अगले कुछ महीनों में जब राजधानी में पारा और नीचे जाएगा, तो सड़कों पर “अंगोला शर्ट और जर्सी” पहने पुलिसकर्मी एक नए आत्मविश्वास के साथ नजर आएंगे —
एक ऐसी छवि के रूप में, जो जनता की सुरक्षा के साथ-साथ अपने स्वास्थ्य का भी ध्यान रखती है।
