पटना की राजनीति में राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के कार्यकारी अध्यक्ष तेजस्वी यादव ने एक बार फिर बड़ा आरोप लगाया है। उन्होंने दावा किया कि 2025 के बिहार विधानसभा चुनाव में सत्तारूढ़ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) ने महागठबंधन और विपक्ष को परास्त करने के लिए लगभग 40,000 करोड़ रुपये खर्च किए। यह आरोप उन्होंने राज्यपाल के अभिभाषण के बाद धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान उठाया। तेजस्वी यादव ने इसे चुनाव के परिणामों को लेकर जनता के सामने चुनौती और सरकार की कथित कार्रवाईयों का विरोध बताया।

नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव को पैर में चोट के कारण कुर्सी पर बैठे-बैठे भाषण देने की अनुमति मिली थी। उन्होंने अपने भाषण में कहा कि चुनाव में जनता को हारा दिखाया गया और सत्ता तंत्र ने जीत हासिल की। उन्होंने यह भी कहा कि लोकतंत्र को डर और भय के शासन में बदल दिया गया है। उनका कहना था कि महागठबंधन को हराने के लिए खर्च किए गए 40,000 करोड़ रुपये जनता के पैसों का दुरुपयोग हैं।
तेजस्वी यादव ने अपने आरोपों में महिला सशक्तिकरण और सामाजिक मुद्दों पर भी भाजपा-नेता गठबंधन को निशाने पर लिया। उन्होंने बताया कि चुनाव से पहले बिहार में एक करोड़ से अधिक महिलाओं को 10,000 रुपये की आर्थिक सहायता देने की योजना बनाई गई थी। उन्होंने आरोप लगाया कि यह योजना केवल चुनावी फायदे के लिए थी और सत्ता के हस्तक्षेप के जरिये विपक्ष को कमजोर करने का प्रयास था। उन्होंने उत्तराखंड की मंत्री रेखा आर्या के पति द्वारा दिए गए विवादित बयान का भी जिक्र किया और इसे भाजपा के सोच का उदाहरण बताया।
इसके अलावा तेजस्वी यादव ने हाल ही में बिहार में राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (नीट) की एक छात्रा के संदिग्ध यौन उत्पीड़न के बाद हुई मौत का मामला उठाया। उन्होंने इस मामले की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) को सौंपने की आवश्यकता पर जोर दिया और राज्य सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए।
वंचित जातियों के लिए बढ़ाए गए आरक्षण और बिहार को विशेष राज्य का दर्जा दिलाने में सरकार की कथित विफलता भी तेजस्वी यादव के भाषण का हिस्सा रही। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की जनता दल यूनाइटेड (जदयू) की भाजपा के साथ साझेदारी के बावजूद यह मुद्दे लंबित हैं। तेजस्वी यादव ने अपने भाषण में चेतावनी दी कि समय उनके पक्ष में भी आएगा और जनता न्याय मांगने का अधिकार रखती है।
बिहार विधानसभा चुनाव में इस प्रकार के आरोप राजनीतिक गर्माहट पैदा करते हैं। तेजस्वी यादव के आरोपों ने राज्य में सत्ता और विपक्ष के बीच विवाद को और बढ़ा दिया है। राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि यह मामला आने वाले महीनों में चुनावी रणनीतियों, मीडिया और जनता की निगरानी के तहत चर्चा का विषय बना रहेगा।
