संसद के बजट सत्र के दौरान भारी हंगामे और चर्चा के बीच पूर्व उपराष्ट्रपति और पूर्व राज्यसभा अध्यक्ष हामिद अंसारी ने एक अहम टिप्पणी की है, जो उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ के इस्तीफे के संदर्भ में सामने आई। अंसारी ने संसद की कार्यवाही और सदन में अध्यक्ष के अधिकारों पर गहरी चिंता जताई। उनका कहना था कि संसद में अध्यक्ष का पूर्ण अधिकार होना चाहिए और किसी बाहरी व्यक्ति या शक्ति का हस्तक्षेप नहीं होना चाहिए।

हामिद अंसारी ने स्पष्ट किया कि उपराष्ट्रपति की भूमिका संवैधानिक रूप से महत्वपूर्ण होती है। उन्होंने जगदीप धनखड़ के इस्तीफे को दुर्लभ और हैरान करने वाला बताया। उनका मानना है कि सामान्य परिस्थितियों में उपराष्ट्रपति का इस्तीफा केवल तब आता है जब उन्हें राष्ट्रपति पद ग्रहण करना होता है।
हामिद अंसारी का साक्षात्कार और संसद पर चिंता
एक साक्षात्कार में हामिद अंसारी ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला की हालिया टिप्पणियों का संदर्भ देते हुए कहा कि क्या कोई इतना शक्तिशाली हो सकता है कि वह अध्यक्ष को दबा दे। उन्होंने कहा कि सदन के कामकाज पर अध्यक्ष या स्पीकर का पूर्ण अधिकार होना चाहिए। पहले सदन की सुरक्षा और संचालन लोकसभा और राज्यसभा के नियंत्रण में था, लेकिन वर्तमान में बाहरी हस्तक्षेप की संभावना बढ़ गई है।
अंसारी ने यह भी चिंता जताई कि संसद का औसत सत्र पहले सालाना 90-100 दिन होता था, लेकिन अब यह घटकर केवल 50-60 दिन रह गया है। इसका मतलब है कि संसद अपने निर्धारित कार्य पर आधा समय ही व्यतीत कर रही है, जिससे लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं और निर्णयों पर प्रभाव पड़ रहा है।
ओम बिरला के बयान पर हामिद अंसारी की प्रतिक्रिया
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने गुरुवार को कहा था कि उन्हें सूचना मिली थी कि कुछ कांग्रेस सांसद प्रधानमंत्री की कुर्सी के पास आकर अप्रिय घटना को अंजाम दे सकते हैं। इस कारण उन्होंने प्रधानमंत्री से अनुरोध किया कि वह सदन में न आएं।
हामिद अंसारी ने इस बयान पर टिप्पणी करते हुए कहा कि यह चिंता का विषय है कि सदन के अंदर अध्यक्ष या स्पीकर की संवैधानिक शक्तियों पर बाहरी दबाव पड़ सकता है। उन्होंने इस संदर्भ में जगदीप धनखड़ के इस्तीफे को भी अप्रत्याशित और दुर्लभ माना।
उपराष्ट्रपति के इस्तीफे का महत्व
उपराष्ट्रपति की भूमिका भारतीय संविधान में बेहद महत्वपूर्ण है। वे राज्यसभा के सभापति भी होते हैं। उनका इस्तीफा केवल असाधारण परिस्थितियों में ही आता है। अंसारी ने इस बात पर जोर दिया कि यदि उपराष्ट्रपति या किसी अन्य संवैधानिक पदाधिकारी पर दबाव डाला जाए, तो यह लोकतांत्रिक और संवैधानिक व्यवस्था के लिए खतरा हो सकता है।
उन्होंने कहा कि उपराष्ट्रपति का इस्तीफा संसद की गरिमा, स्वतंत्र निर्णय क्षमता और कार्यवाही की सुचारू प्रक्रिया को प्रभावित कर सकता है। यह विशेष रूप से इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि उपराष्ट्रपति सदन की उच्च परंपराओं और लोकतांत्रिक निर्णयों का संरक्षक होता है।
संसद की कार्यवाही और लोकतंत्र
हामिद अंसारी ने यह भी कहा कि संसद के सत्रों की संख्या में गिरावट लोकतंत्र और कानून बनाने की प्रक्रिया को प्रभावित करती है। सदन में उचित समय नहीं होने से नीति निर्धारण और पार्लियामेंटरी नियंत्रण कमजोर हो रहा है। उन्होंने यह सवाल उठाया कि क्या बाहरी शक्तियां अध्यक्ष या सदन के कामकाज में हस्तक्षेप कर रही हैं।
उन्होंने जोर देकर कहा कि सदन के कामकाज पर अध्यक्ष का अधिकार पूरी तरह से सुनिश्चित होना चाहिए। किसी भी बाहरी व्यक्ति, दबाव समूह या राजनीतिक दबाव के चलते अध्यक्ष की शक्तियों को कम करना लोकतंत्र के लिए नुकसानदेह होगा।
जगदीप धनखड़ का इस्तीफा और संवैधानिक दृष्टि
हामिद अंसारी ने कहा कि जगदीप धनखड़ का इस्तीफा दुर्लभ और असामान्य है। आम तौर पर उपराष्ट्रपति का इस्तीफा तब आता है जब वे राष्ट्रपति पद की ओर बढ़ते हैं। यह घटना इसलिए हैरान करने वाली है कि यह पारंपरिक प्रक्रिया और राजनीतिक परिपाटी से हटकर हुई।
अंसारी ने यह भी कहा कि इस्तीफा केवल राजनीतिक विवाद या व्यक्तिगत कारणों से नहीं, बल्कि संवैधानिक रूप से महत्वपूर्ण स्थिति में आकर ही होना चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि लोकतंत्र में संवैधानिक पदाधिकारियों की स्वतंत्रता और उनके निर्णय की स्वतंत्रता सुनिश्चित करना आवश्यक है।
