अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में हिंद महासागर के चागोस द्वीप समूह में स्थित डिएगो गार्सिया मिलिट्री बेस को लेकर कड़े तेवर दिखाए हैं। ट्रंप ने स्पष्ट कहा है कि अगर ब्रिटेन और मॉरीशस की डील से बेस या अमेरिकी सैन्य मौजूदगी को कोई खतरा हुआ, तो अमेरिका इसे सैन्य रूप से सुरक्षित और मजबूत बनाने का पूरा अधिकार रखता है।

यह बयान इस समय आया है जब ब्रिटेन ने चागोस द्वीप समूह को मॉरीशस को लौटाने की योजना बनाई है। हालांकि ब्रिटेन की इस योजना में डिएगो गार्सिया को 99 साल के लिए संयुक्त यूके-अमेरिका मिलिट्री बेस के रूप में लीज पर रखा जाएगा। इस फैसले पर ट्रंप का रुख स्पष्ट है कि वह डील के समर्थन में हैं, लेकिन अमेरिकी सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने का अधिकार किसी भी परिस्थिति में सुरक्षित रखेंगे।
ट्रंप का बयान और फोन कॉल
गुरुवार को ब्रिटिश प्रधानमंत्री स्टार्मर के साथ फोन पर हुई बातचीत के बाद ट्रंप ने कहा कि ब्रिटिश प्रधानमंत्री ने “सबसे अच्छी डील” की, जो संभव थी। हालांकि उन्होंने चेतावनी दी कि यदि डिएगो गार्सिया पर अमेरिकी बेस को खतरा हुआ तो अमेरिका उसे सैन्य रूप से सुरक्षित रखने का पूरा अधिकार रखता है। ट्रंप ने इस बात को ट्रुथ सोशल पर भी साझा किया, जिसमें उन्होंने ब्रिटेन की योजना को स्वीकार करते हुए अपनी सैन्य चेतावनी दोहराई।
चागोस द्वीप समूह पर ट्रंप की नाराज़गी
पिछले साल ब्रिटेन और मॉरीशस के बीच हुए समझौते के तहत, ब्रिटेन द्वीपों पर अपना नियंत्रण मॉरीशस को सौंप देगा, जबकि डिएगो गार्सिया को संयुक्त लीज पर रखेगा। ट्रंप ने पहले इस योजना को बहुत बड़ी गलती कहा था और सुझाव दिया था कि लंदन को इसे अपने पास ही रखना चाहिए। उनका मुख्य उद्देश्य था कि अमेरिकी सैन्य उपस्थिति सुरक्षित रहे और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में रणनीतिक लाभ कायम रहे।
डिएगो गार्सिया बेस की अहमियत
डिएगो गार्सिया बेस हिंद महासागर के बीच में स्थित है और अमेरिकी सैन्य रणनीति में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यहां गहरे पानी का बंदरगाह है, जहां विमानवाहक पोत और बड़े युद्धक जहाज रुक सकते हैं। इसके अलावा यहां स्टील्थ बी-2 बमवर्षक जैसे युद्धक विमान लॉन्च करने के लिए रनवे भी है।
इस बेस का उपयोग न केवल विमान संचालन के लिए किया जाता है, बल्कि निगरानी और खुफिया जानकारी जुटाने के लिए भी इसे रणनीतिक माना जाता है। इस बेस ने इतिहास में वियतनाम, इराक और अफगानिस्तान में अमेरिकी ऑपरेशन्स में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। 2008 में अमेरिका ने यह भी माना कि इसका इस्तेमाल आतंकवाद के संदिग्धों को गुप्त रूप से ले जाने वाली उड़ानों के लिए किया गया था।
चागोस द्वीप की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
चागोस द्वीप 1814 से ब्रिटिश नियंत्रण में है। 1960 और 1970 के दशकों में लगभग 2000 निवासियों को जबरन वहां से हटा दिया गया और उन्हें मॉरीशस, सेशेल्स और ब्रिटेन में बसाया गया। इन लोगों ने दशकों तक अपनी पैतृक जमीन पर लौटने का अभियान चलाया। अब ब्रिटेन की योजना के तहत मॉरीशस को द्वीप लौटाने की प्रक्रिया में डिएगो गार्सिया को लीज पर रखने का प्रावधान रखा गया है।
वाइट हाउस का बयान
वाइट हाउस की प्रेस सेक्रेटरी कैरोलिन लेविट ने कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप ब्रिटिश प्रधानमंत्री स्टार्मर की स्थिति को समझते हैं और उसका समर्थन करते हैं, लेकिन अमेरिका अपनी सैन्य संपत्तियों की रक्षा करने का अधिकार सुरक्षित रखता है। ट्रंप की चेतावनी यह दर्शाती है कि अमेरिकी सैन्य हित किसी भी अंतरराष्ट्रीय समझौते से प्रभावित नहीं होंगे।
ब्रिटेन में विरोध और राजनीतिक विवाद
ब्रिटेन की स्टार्मर सरकार को देश के अंदर विरोध का सामना करना पड़ रहा है। कंजर्वेटिव पार्टी ने इस डील को भयानक बताया और चेतावनी दी कि वे संसद में इसका विरोध जारी रखेंगे। पूर्व गृह मंत्री प्रीति पटेल ने कहा कि लीज खत्म होने पर राष्ट्रीय सुरक्षा और सहयोगियों की सुरक्षा पर खतरा बढ़ सकता है। उनका कहना था कि कंजर्वेटिव पार्टी डील के खिलाफ लड़ाई जारी रखेगी।
भारत और अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया
भारत ने चागोस द्वीप समूह की संप्रभुता मॉरीशस को सौंपे जाने की योजना का समर्थन किया है। विदेश मंत्रालय ने कहा कि भारत हिंद महासागर में मॉरीशस और अन्य समान विचारधारा वाले देशों के साथ मिलकर काम करने के लिए प्रतिबद्ध है। भारत ने मई 2025 में मॉरीशस के लिए विशेष आर्थिक पैकेज की घोषणा की, जिसमें पोर्ट लुइस में बंदरगाह का पुनर्विकास और समुद्री संरक्षित क्षेत्र के विकास से जुड़े समझौते शामिल हैं।
रणनीतिक महत्व और सैन्य संतुलन
डिएगो गार्सिया का हिंद महासागर में महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि यह क्षेत्र चीन और अमेरिका के बीच बढ़ते सामरिक तनाव का केंद्र है। अमेरिकी नौसेना और वायु सेना के लिए यह बेस बेहद महत्वपूर्ण है। ट्रंप के बयान से यह स्पष्ट हो गया कि अमेरिका किसी भी अंतरराष्ट्रीय समझौते के बावजूद अपने सैन्य हितों की सुरक्षा सुनिश्चित करेगा।
निष्कर्ष
डिएगो गार्सिया और चागोस द्वीप समूह को लेकर हाल की घटनाएँ हिंद महासागर में सैन्य, राजनीतिक और कूटनीतिक जटिलताओं को उजागर करती हैं। ट्रंप का कड़ा रुख, ब्रिटेन-मॉरीशस डील, ब्रिटेन में विरोध और भारत का समर्थन इस क्षेत्र की रणनीतिक स्थिति को स्पष्ट करते हैं। यह देखना बाकी है कि आगे आने वाले समय में इस क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य उपस्थिति, द्विपीय समझौते और अंतरराष्ट्रीय कूटनीति कैसे संतुलित रहती है।
