फिल्मी दुनिया में अपनी अलग पहचान बना चुकीं श्रुति हासन अक्सर अपने काम के साथ-साथ अपनी सोच और स्पष्ट विचारों को लेकर भी चर्चा में रहती हैं। इस बार वजह उनका कोई नया प्रोजेक्ट नहीं, बल्कि वह इंटरव्यू है जिसमें उन्होंने अपने परिवार, बचपन, आस्था और धर्म को लेकर खुलकर बातें कीं। श्रुति हासन ने बताया कि वह एक ऐसे परिवार में पली-बढ़ीं, जहां धर्म और भगवान की कोई परंपरागत भूमिका नहीं थी। उनका यह बयान कई लोगों के लिए चौंकाने वाला रहा, तो कई ने इसे एक अलग सोच की ईमानदार झलक बताया।

श्रुति ने साफ कहा कि उनके घर में भगवान की मूर्तियां नहीं थीं, न ही किसी विशेष दिन मांसाहार न करने जैसे नियमों का पालन किया जाता था। उनके अनुसार, उनके पिता कमल हासन धर्म से दूरी बनाए रखते हैं और धार्मिक मान्यताओं पर चर्चा करना तक उन्हें पसंद नहीं है। यह खुलासा केवल पारिवारिक आदतों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इससे उनकी परवरिश, सोच और कला को देखने के नजरिए की भी झलक मिली।
कमल हासन की बेटी, अपनी पहचान खुद बनाई
श्रुति हासन की पहचान अक्सर उनके पिता कमल हासन से जोड़ी जाती है, लेकिन उन्होंने अपने अभिनय और संगीत के दम पर खुद को साबित किया है। तेलुगु, तमिल और हिंदी सिनेमा में उन्होंने अलग-अलग तरह के किरदार निभाए और दर्शकों के बीच अपनी जगह बनाई। ‘गब्बर सिंह’, ‘रेस गुर्रम’, ‘श्रीमान्थुडु’, ‘3’ और ‘सालार: पार्ट 1 – सीजफायर’ जैसी फिल्मों में उनकी मौजूदगी ने यह दिखाया कि वह केवल स्टार किड नहीं, बल्कि एक मेहनती कलाकार हैं।
उनका फिल्मी सफर आसान नहीं रहा। उन्होंने कभी अपने पिता की छवि का सहारा नहीं लिया, बल्कि खुद को साबित करने के लिए अलग रास्ता चुना। इसी आत्मनिर्भर सोच की झलक उनके जीवन के दूसरे पहलुओं में भी दिखती है।
भाषा और पहचान के बीच पली-बढ़ी श्रुति
श्रुति हासन ने इंटरव्यू में अपनी भाषाई परवरिश के बारे में भी विस्तार से बात की। उन्होंने बताया कि वह तमिल और हिंदी दोनों भाषाओं के माहौल में बड़ी हुईं। घर में कभी तमिल, कभी हिंदी और इंग्लिश बोली जाती थी। इस वजह से उनकी मां को एक डर हमेशा सताता था कि बच्चे किसी एक भाषा में पूरी तरह पारंगत नहीं हो पाएंगे।
श्रुति के अनुसार, कई सालों तक उनकी तमिल भाषा कमजोर रही, क्योंकि वह इंग्लिश मीडियम स्कूल में पढ़ती थीं। बाद में जब उन्हें इसका अहसास हुआ, तब उन्होंने भाषा पर काम किया। आज भी वह मानती हैं कि उनकी तमिल पर पकड़ पूरी तरह मजबूत नहीं है, लेकिन यह उनकी पहचान का हिस्सा है।
अलग तरह का बचपन, फिल्मी सेट बना घर
श्रुति ने अपने बचपन को सामान्य से बिल्कुल अलग बताया। उनके अनुसार, उनका बचपन किसी आम बच्चे की तरह नहीं बीता। वह स्कूल के बाद खेल के मैदान में नहीं, बल्कि फिल्म सेट्स पर बड़ी हुईं। उन्होंने बताया कि पांच साल की उम्र में उन्होंने ऐसे दृश्य देखे, जो आम बच्चों के लिए असंभव होते हैं। कभी हाथी और कुत्ते फिल्म सेट पर आ जाते थे, तो कभी बड़े-बड़े कलाकारों से मुलाकात हो जाती थी।
उनके माता-पिता कमल हासन और सारिका ठाकुर दोनों ही औपचारिक स्कूली शिक्षा से नहीं गुजरे थे। इस वजह से उन्हें बच्चों की पढ़ाई और परवरिश को लेकर पारंपरिक समझ नहीं थी। श्रुति का मानना है कि यही वजह रही कि उनका बचपन नियमों और अनुशासन से ज्यादा अनुभवों और आज़ादी से भरा रहा।
नास्तिक परिवार में परवरिश
श्रुति हासन ने बिना किसी झिझक के बताया कि वह एक नास्तिक और गैर-धार्मिक परिवार में पली-बढ़ीं। उनके घर में भगवान की पूजा, व्रत या धार्मिक अनुष्ठानों का कोई चलन नहीं था। उन्होंने कहा कि जब वह इस बारे में खुलकर बात करती हैं, तो उनके पिता को यह पसंद नहीं आता, क्योंकि वह निजी जीवन को सार्वजनिक चर्चा का विषय बनाना नहीं चाहते।
श्रुति के अनुसार, उनके घर में मंगलवार या किसी और दिन मांसाहार न खाने का कोई नियम नहीं था। धर्म और भगवान की अवधारणा उनके बचपन का हिस्सा ही नहीं रही। इसी माहौल ने उनकी सोच को आकार दिया और शायद यही वजह है कि वह जीवन और कला को एक अलग नजरिए से देखती हैं।
कला को ही ईश्वर मानने की सोच
धर्म और भगवान से दूरी के बीच श्रुति ने यह भी बताया कि उनके जीवन में कला ने ईश्वर की जगह ली। उनके लिए संगीत, अभिनय और रचनात्मकता ही सबसे बड़ी साधना है। उन्होंने कहा कि बचपन से ही उनके मन में यह बात बैठ गई थी कि कला ही सब कुछ है और वही उन्हें दिशा देती है।
यह सोच उनके काम में भी झलकती है। चाहे अभिनय हो या संगीत, वह हर काम को पूरी ईमानदारी और समर्पण के साथ करती हैं। उनके लिए कला केवल पेशा नहीं, बल्कि जीवन जीने का तरीका है।
टैटू और ज्योतिष से दूरी
श्रुति हासन ने अपने पिता के विचारों के बारे में बताते हुए कहा कि कमल हासन को टैटू और ज्योतिष जैसी चीजें बिल्कुल पसंद नहीं हैं। अगर कोई उनसे ज्योतिष की बात करता है, तो वह उसे तुरंत टाल देते हैं। उनके अनुसार, उनके पिता बेहद क्रिएटिव होने के साथ-साथ बहुत प्रैक्टिकल भी हैं।
श्रुति ने मजाकिया अंदाज में कहा कि उनके पिता को टैटू से भी नफरत है। यह बात दिलचस्प है, क्योंकि खुद श्रुति टैटू और वैकल्पिक आस्थाओं में विश्वास रखती हैं। इससे यह साफ होता है कि पिता और बेटी के विचार कई मामलों में अलग हैं, लेकिन एक-दूसरे के प्रति सम्मान बना हुआ है।
विक्का और स्त्री पूर्वजों पर विश्वास
श्रुति हासन ने इंटरव्यू में अपनी व्यक्तिगत आस्था के बारे में भी बात की। उन्होंने कहा कि वह विक्का में विश्वास करती हैं, जो प्रकृति और स्त्री ऊर्जा से जुड़ा हुआ विश्वास है। उनके अनुसार, उनके पूर्वज महिलाएं थीं और वह खुद को उन्हीं की विरासत का हिस्सा मानती हैं।
उन्होंने कहा कि वह खुद को उन महिलाओं की संतान मानती हैं, जिन्हें इतिहास में चुड़ैल कहा गया, लेकिन जिन्हें जलाया नहीं जा सका। यह बयान प्रतीकात्मक है और यह दिखाता है कि वह स्त्री शक्ति, स्वतंत्रता और प्रकृति से गहरे तौर पर जुड़ाव महसूस करती हैं।
पिता से अलग सोच, फिर भी सम्मान
श्रुति ने यह भी साफ किया कि उनके पिता और उनके बीच विचारों का अंतर है, लेकिन इससे रिश्ते में कोई कड़वाहट नहीं है। कमल हासन भले ही धर्म, ज्योतिष और टैटू से दूरी रखते हों, लेकिन वह अपनी बेटी की सोच और विश्वास का सम्मान करते हैं। यह रिश्ता संवाद और समझ पर टिका हुआ है।
उनका मानना है कि परिवार का मतलब एक जैसी सोच होना नहीं, बल्कि एक-दूसरे को स्वीकार करना है। यही वजह है कि वह अपने विचार खुलकर रख पाती हैं।
सार्वजनिक चर्चा और निजी सच
श्रुति हासन का यह इंटरव्यू इसलिए भी चर्चा में है, क्योंकि उन्होंने ऐसे विषयों पर बात की, जिन पर आमतौर पर फिल्मी सितारे खुलकर नहीं बोलते। धर्म, नास्तिकता, व्यक्तिगत आस्था और पारिवारिक मतभेद जैसे मुद्दों पर उनकी ईमानदार बातें कई लोगों को सोचने पर मजबूर करती हैं।
यह इंटरव्यू केवल एक अभिनेत्री की निजी कहानी नहीं है, बल्कि यह उस पीढ़ी की सोच को भी दर्शाता है, जो परंपरा और आधुनिकता के बीच अपनी राह खुद चुनना चाहती है।
