टाटा समूह द्वारा अधिग्रहण के बाद एयर इंडिया जिस बदलाव की यात्रा पर निकली थी, वह अब अपने सबसे निर्णायक मोड़ पर पहुंच चुकी है। देश की सबसे पुरानी एयरलाइन के कायाकल्प को लेकर एयर इंडिया के मुख्य कार्यपालक अधिकारी और प्रबंध निदेशक कैंपबेल विल्सन ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि अब यह प्रक्रिया अपने अंतिम चरण में है। उन्होंने कहा कि जिन बड़े सुधारों की योजना बनाई गई थी, वे लगभग पूरे हो चुके हैं और अब ध्यान बारीक सुधारों, परिष्करण और अंतिम क्रियान्वयन पर है। इसका सीधा लाभ आने वाले समय में यात्रियों को मिलने वाला है, जिन्हें पहले से कहीं अधिक बेहतर, आरामदायक और आधुनिक सुविधाएं अनुभव करने को मिलेंगी।

एयर इंडिया के इस व्यापक परिवर्तन को कैंपबेल विल्सन ने क्रिकेट के टेस्ट मैच से तुलना करते हुए समझाया। उन्होंने कहा कि यह बदलाव एक लंबा और धैर्य की परीक्षा लेने वाला अभियान रहा है, जो अब टेस्ट मैच के पांचवें दिन की सुबह जैसा महसूस हो रहा है। इसका अर्थ यह है कि संघर्ष, रणनीति और मेहनत का सबसे कठिन हिस्सा पीछे छूट चुका है और अब परिणाम सामने आने का समय नजदीक है। उन्होंने यह बयान दिल्ली हवाई अड्डे पर एयर इंडिया के नए लाउंज के उद्घाटन के दौरान दिया, जो इस बदलाव का प्रत्यक्ष उदाहरण माना जा रहा है।
जनवरी 2022 में जब टाटा समूह ने एयर इंडिया की कमान संभाली थी, तब यह एयरलाइन वर्षों से घाटे, खराब सेवाओं और जर्जर छवि से जूझ रही थी। निजीकरण के बाद यह उम्मीद जगी थी कि एयर इंडिया फिर से अपनी खोई हुई प्रतिष्ठा को हासिल कर सकेगी। हालांकि, यह सफर आसान नहीं रहा। पिछले चार वर्षों में एयर इंडिया को कई प्रतिकूल परिस्थितियों का सामना करना पड़ा। इसके बावजूद टाटा समूह और प्रबंधन ने कायाकल्प की प्रक्रिया को बिना रुके आगे बढ़ाया।
कैंपबेल विल्सन ने बताया कि अभी भी कई विमान व्यापक मरम्मत और नवीनीकरण की प्रक्रिया से गुजर रहे हैं। लेकिन अब यह कार्य एक सुव्यवस्थित और यांत्रिक प्रक्रिया बन चुका है। डिजाइन, प्रमाणन और योजना से जुड़े सभी बड़े कार्य पूरे किए जा चुके हैं। अब केवल सीटों के निर्माण, उनकी आपूर्ति और विमानों में उन्हें स्थापित करने का काम शेष है, जिसमें समय जरूर लगेगा, लेकिन दिशा पूरी तरह स्पष्ट है।
वर्तमान में एयर इंडिया के बेड़े में करीब 190 विमान शामिल हैं। इन सभी विमानों को चरणबद्ध तरीके से आधुनिक रूप दिया जा रहा है। निजीकरण के बाद एयर इंडिया को पहला बोइंग 787-9 ड्रीमलाइनर जनवरी में मिला, जिसे एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है। नए और उन्नत विमानों के शामिल होने से एयर इंडिया की अंतरराष्ट्रीय और घरेलू उड़ानों में यात्रियों को बेहतर अनुभव मिलने की उम्मीद है।
कायाकल्प की इस यात्रा में एयर इंडिया को कई अप्रत्याशित चुनौतियों से भी जूझना पड़ा। जून 2025 में अहमदाबाद में हुए बोइंग 787-8 ड्रीमलाइनर हादसे ने न केवल कंपनी को झकझोर दिया, बल्कि सुरक्षा और संचालन से जुड़े कई सवाल भी खड़े कर दिए। इसके अलावा पाकिस्तान द्वारा अपना हवाई क्षेत्र बंद किए जाने से एयर इंडिया को विमानों को लंबा रास्ता अपनाना पड़ा, जिससे ईंधन खर्च और परिचालन लागत में काफी वृद्धि हुई। इसका सीधा असर कंपनी के वित्तीय प्रदर्शन पर पड़ा।
इन चुनौतियों के बावजूद प्रबंधन ने कायाकल्प की रफ्तार को धीमा नहीं होने दिया। विल्सन ने कहा कि हादसे के बाद सुरक्षा और गुणवत्ता से जुड़े सुधारों को और तेज कर दिया गया है। उनका मानना है कि किसी भी एयरलाइन के लिए कठिन परिस्थितियां असामान्य नहीं होतीं, लेकिन उनसे सीख लेकर आगे बढ़ना ही असली परीक्षा होती है।
एयर इंडिया का यह कायाकल्प ‘विहान.एआई’ नामक पंचवर्षीय योजना के तहत किया जा रहा है। इस योजना में कुल 22 अलग-अलग क्षेत्रों में सुधार और बदलाव का लक्ष्य रखा गया था। इनमें से अधिकांश कार्य या तो पूरे हो चुके हैं या फिर अपने अंतिम चरण में हैं। नवंबर 2024 में कैंपबेल विल्सन ने इस यात्रा को टेस्ट मैच के तीसरे दिन के लंच ब्रेक के आसपास बताया था। अब, कुछ ही महीनों में, उनका मानना है कि एयरलाइन इस परिवर्तन प्रक्रिया के अंतिम चरण में प्रवेश कर चुकी है।
यात्रियों के लिए इसका मतलब यह है कि आने वाले समय में उन्हें बेहतर केबिन, आरामदायक सीटें, आधुनिक इन-फ्लाइट एंटरटेनमेंट, उन्नत लाउंज और अधिक विश्वसनीय सेवाएं मिलेंगी। दिल्ली हवाई अड्डे पर नया लाउंज इसी दिशा में उठाया गया एक ठोस कदम है, जो एयर इंडिया की नई पहचान को दर्शाता है।
हालांकि, मुनाफे का रास्ता अभी पूरी तरह साफ नहीं हुआ है। कैंपबेल विल्सन ने स्वीकार किया कि भारत-पाकिस्तान तनाव, वैश्विक राजनीतिक बदलाव, शुल्क संरचनाएं और अमेरिकी वीजा पाबंदियों जैसे कारकों ने एयरलाइन के प्रदर्शन को प्रभावित किया है। ये ऐसे तत्व हैं जो किसी भी अंतरराष्ट्रीय एयरलाइन के लिए चुनौती बन सकते हैं। उन्होंने कहा कि एयर इंडिया को इन सभी परिस्थितियों के बीच संतुलन बनाते हुए आगे बढ़ना होगा।
हाल ही में यह भी खबर आई थी कि एयर इंडिया मुनाफे में आने के लिए एक संशोधित रणनीति पर काम कर रही है, जिसमें अभी तीन से चार साल और लग सकते हैं। प्रबंधन का मानना है कि जब कायाकल्प की पूरी प्रक्रिया समाप्त हो जाएगी और परिचालन स्थिरता हासिल हो जाएगी, तब वित्तीय स्थिति में भी सुधार दिखने लगेगा।
एयर इंडिया का यह परिवर्तन केवल विमानों और सेवाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि यह संगठनात्मक संस्कृति, प्रशिक्षण और ग्राहक सेवा के दृष्टिकोण में भी बदलाव को दर्शाता है। टाटा समूह की विरासत और विश्वसनीयता के साथ एयर इंडिया को एक बार फिर वैश्विक विमानन मानचित्र पर मजबूती से स्थापित करने की कोशिश की जा रही है।
कुल मिलाकर, कैंपबेल विल्सन के बयान यह संकेत देते हैं कि एयर इंडिया के लिए सबसे कठिन दौर अब पीछे छूट रहा है। कायाकल्प की इस लंबी यात्रा के अंतिम चरण में पहुंचकर एयरलाइन एक नई शुरुआत के लिए तैयार दिखाई दे रही है। आने वाले महीनों और वर्षों में यह देखना दिलचस्प होगा कि एयर इंडिया किस तरह अपने यात्रियों का भरोसा फिर से जीतती है और भारतीय विमानन उद्योग में अपनी पुरानी शान को नए रूप में पेश करती है।
