दुनिया में लग्जरी होटल अपनी भव्यता, अनोखे डिजाइन और महंगे इंटीरियर के लिए जाने जाते हैं, लेकिन बहुत कम जगहों पर ऐसा होता है कि होटल की पहचान ही सोने से बनी हो। मकाऊ का ग्रैंड एम्परर होटल ऐसा ही एक नाम रहा है, जिसने अपनी लॉबी में असली सोने की ईंटें बिछाकर पूरी दुनिया का ध्यान खींचा था। वर्षों तक यह होटल अपने ‘गोल्डन पाथवे’ के लिए मशहूर रहा, जहां मेहमान कांच के नीचे चमकती असली सोने की ईंटों को देखकर हैरान रह जाते थे।

अब वही होटल सुर्खियों में है, लेकिन इस बार वजह उसकी चमक नहीं, बल्कि वह फैसला है जिसके तहत होटल की फर्श को रातों-रात खुदवाकर 79 किलो सोना बाहर निकाला गया और उसे बेचकर करीब 117 करोड़ रुपये कमाए गए। यह कहानी सिर्फ एक होटल की नहीं, बल्कि बदलते वैश्विक हालात, सोने की कीमतों और मकाऊ की पूरी गेमिंग इंडस्ट्री के परिवर्तन की तस्वीर पेश करती है।
ग्रैंड एम्परर होटल और उसका ‘गोल्डन पाथवे’
ग्रैंड एम्परर होटल की शुरुआत वर्ष 2006 में हुई थी। उस दौर में मकाऊ तेजी से एशिया की गेमिंग कैपिटल के रूप में उभर रहा था। होटल मैनेजमेंट ने शुरुआत से ही इसे भीड़ से अलग पहचान देने की योजना बनाई। इसी सोच के तहत होटल की लॉबी में प्रवेश करते ही एक खास रास्ता बनाया गया, जिसे ‘गोल्डन पाथवे’ नाम दिया गया। इस पाथवे के नीचे कांच के भीतर असली सोने की ईंटें बिछाई गई थीं।
यह कोई सजावटी धातु या प्रतीकात्मक डिजाइन नहीं था, बल्कि शुद्ध सोने की ईंटें थीं, जिनका कुल वजन 79 किलो था। होटल आने वाले पर्यटक न सिर्फ यहां ठहरते थे, बल्कि इस अनोखे दृश्य को देखने और उसकी तस्वीरें लेने भी आते थे। यह रास्ता होटल की पहचान बन गया था और वर्षों तक मकाऊ की लग्जरी का प्रतीक माना जाता रहा।
अचानक बदला फैसला और रातों-रात खुदाई
समय के साथ हालात बदले और होटल मैनेजमेंट को एक बड़ा फैसला लेना पड़ा। हाल ही में होटल की पैरेंट कंपनी एम्परर एंटरटेनमेंट होटल लिमिटेड ने आधिकारिक तौर पर जानकारी दी कि उन्होंने लॉबी की फर्श में बिछी सोने की ईंटों को निकालकर बेच दिया है। यह काम अचानक और बेहद योजनाबद्ध तरीके से किया गया, ताकि किसी तरह की सुरक्षा या लॉजिस्टिक समस्या न हो।
सोने की इन ईंटों को निकालने के बाद उन्हें हांगकांग के एक रिफाइनर को बेचा गया। इस सौदे से होटल को करीब 13 मिलियन डॉलर, यानी भारतीय मुद्रा में लगभग 117 करोड़ रुपये की रकम मिली। यह आंकड़ा सुनने में जितना चौंकाने वाला है, उतना ही यह होटल की नई रणनीति को भी दर्शाता है।
सोना बेचने के पीछे की असली वजह
होटल मैनेजमेंट के अनुसार, मौजूदा समय सोना बेचने के लिए सबसे उपयुक्त था। पिछले एक साल में वैश्विक बाजार में भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिला है। अमेरिका में राजनीतिक बदलाव, जियोपॉलिटिकल तनाव और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता ने निवेशकों को शेयर और करेंसी से दूर कर दिया। ऐसे माहौल में सोना एक बार फिर सबसे सुरक्षित निवेश विकल्प के रूप में उभरा।
बीते 12 महीनों में सोने की कीमतों में तेज उछाल आया है। जब बाजार में डर और अस्थिरता बढ़ती है, तो सोने की मांग भी बढ़ती है। इसी ट्रेंड को देखते हुए ग्रैंड एम्परर होटल के मैनेजमेंट ने फैसला किया कि इंटीरियर का हिस्सा बने सोने को अब कैश में बदला जाए। कंपनी का मानना है कि इस फैसले से उनकी वित्तीय स्थिति मजबूत होगी और भविष्य के निवेश के लिए उन्हें अतिरिक्त पूंजी मिलेगी।
मकाऊ की बदलती तस्वीर और कैसीनो इंडस्ट्री का दबाव
मकाऊ को लंबे समय से चीन की गेमिंग कैपिटल कहा जाता है। यह चीन का इकलौता क्षेत्र है जहां कैसीनो कानूनी रूप से संचालित किए जा सकते हैं। इसी वजह से यहां दुनिया के सबसे बड़े और भव्य कैसीनो होटल बने। लेकिन पिछले कुछ वर्षों में स्थिति बदलने लगी है।
बीजिंग सरकार मकाऊ की अर्थव्यवस्था को केवल जुए पर निर्भर नहीं रखना चाहती। सरकार की ओर से लगातार यह दबाव बनाया जा रहा है कि मकाऊ अपनी इकोनॉमी में विविधता लाए और मनोरंजन, पर्यटन व अन्य क्षेत्रों को बढ़ावा दे। इसके साथ ही स्थानीय नियमों को भी सख्त किया गया है, जिससे कई कैसीनो को अपने ऑपरेशन सीमित करने या बंद करने पड़े हैं।
ग्रैंड एम्परर होटल ने भी अक्टूबर 2025 में अपना कैसीनो ऑपरेशन बंद कर दिया था। यह फैसला आसान नहीं था, लेकिन बदलते नियमों और बाजार की सच्चाई को देखते हुए इसे जरूरी माना गया।
कैसीनो बंद होने के बाद बदली रणनीति
कैसीनो बंद होने के बाद ग्रैंड एम्परर होटल ने अपने पूरे बिजनेस मॉडल पर दोबारा विचार किया। अब कंपनी सिर्फ जुआ खेलने वाले ग्राहकों तक सीमित नहीं रहना चाहती। उनका फोकस फैमिली टूरिज्म, जनरल एंटरटेनमेंट और नए अनुभवों पर है।
इसी नई सोच के तहत होटल की लॉबी और अन्य हिस्सों का पुनर्विकास किया जा रहा है। मैनेजमेंट का कहना है कि नए थीम और नए डिजाइन में सोने की ईंटों वाले फर्श की कोई जरूरत नहीं रह गई थी। इसलिए उन्हें हटाना एक व्यावहारिक और आर्थिक रूप से समझदारी भरा फैसला था।
गोल्ड सेल से मिले पैसों का क्या होगा इस्तेमाल
79 किलो सोना बेचकर मिले 117 करोड़ रुपये सिर्फ एक बार की कमाई नहीं हैं, बल्कि होटल के भविष्य की नींव माने जा रहे हैं। कंपनी का इरादा इस रकम का इस्तेमाल नई सुविधाओं को विकसित करने में करना है। होटल के इंफ्रास्ट्रक्चर को पूरी तरह आधुनिक बनाया जाएगा और ऐसे एंटरटेनमेंट सेंटर तैयार किए जाएंगे, जो हर उम्र के पर्यटकों को आकर्षित कर सकें।
होटल अब खुद को एक ऐसे डेस्टिनेशन के रूप में स्थापित करना चाहता है, जहां परिवार के साथ आने वाले पर्यटक भी सहज महसूस करें। लग्जरी के साथ-साथ अनुभव आधारित मनोरंजन को प्राथमिकता दी जाएगी।
क्या मकाऊ के दूसरे होटल भी अपनाएंगे यही रास्ता
एक्सपर्ट्स का मानना है कि ग्रैंड एम्परर होटल का यह कदम अकेला नहीं रहेगा। मकाऊ के अन्य होटल और कैसीनो भी बदलते हालात को देखते हुए बड़े फैसले ले सकते हैं। जिन होटलों की पहचान अब तक जुए और भव्यता से जुड़ी थी, वे अब नए दौर के हिसाब से खुद को ढालने की कोशिश कर रहे हैं।
सोने की कीमतों में उछाल ने कई कंपनियों को अपनी संपत्तियों पर दोबारा सोचने के लिए मजबूर कर दिया है। ऐसे में ग्रैंड एम्परर होटल का यह फैसला आने वाले समय में एक ट्रेंड बन सकता है।
एक युग का अंत और नए दौर की शुरुआत
ग्रैंड एम्परर होटल का ‘गोल्डन पाथवे’ सिर्फ एक इंटीरियर डिजाइन नहीं था, बल्कि मकाऊ की उस चमकदार पहचान का प्रतीक था, जब कैसीनो और लग्जरी ही सब कुछ थे। अब उस फर्श के नीचे दबा सोना बाहर आ चुका है और उसकी जगह एक नई सोच ले रही है।
यह कहानी दिखाती है कि समय के साथ सबसे भव्य प्रतीकों को भी बदलना पड़ता है। बाजार की सच्चाई, वैश्विक हालात और भविष्य की योजनाएं मिलकर ऐसे फैसले करवाती हैं, जो पहली नजर में चौंकाने वाले लगते हैं, लेकिन गहराई से देखें तो बेहद व्यावहारिक होते हैं।
