तमिल सिनेमा में जब भी रजनीकांत की कोई फिल्म रिलीज होती है, वह सिर्फ एक सिनेमाई घटना नहीं होती, बल्कि एक उत्सव का रूप ले लेती है। सिनेमाघरों के बाहर कटआउट, दूध से नहलाने की रस्म, फैंस की सीटियां और तालियां—यह सब रजनीकांत की फिल्मों के साथ आम बात है। साल 2025 में रिलीज हुई लोकेश कनगराज के निर्देशन वाली फिल्म ‘कुली’ भी इसी परंपरा का हिस्सा बनी। रिलीज के साथ ही फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर तूफानी रफ्तार पकड़ी और कुछ ही समय में वर्ल्डवाइड 500 करोड़ रुपये से ज्यादा की कमाई कर डाली।

लेकिन बॉक्स ऑफिस के ये आंकड़े उस वक्त चर्चा में आ गए, जब खुद रजनीकांत की बेटी सौंदर्या रजनीकांत ने इस फिल्म को लेकर अपनी राय खुलकर रखी। सौंदर्या न सिर्फ एक बेटी हैं, बल्कि एक फिल्ममेकर और रजनीकांत की बड़ी फैन भी हैं। ऐसे में उनकी प्रतिक्रिया सिर्फ भावनात्मक नहीं, बल्कि पेशेवर नजरिए से भी देखी गई। उनकी बातों ने यह सवाल खड़ा कर दिया कि क्या सिर्फ कमाई किसी फिल्म की महानता तय कर सकती है।
सौंदर्या की नजर में ‘कुली’: फैन और फिल्ममेकर दोनों का नजरिया
सौंदर्या रजनीकांत ने ‘कुली’ को दो अलग-अलग नजरियों से देखा। एक तरफ वह अपने पिता की सबसे बड़ी फैन हैं, जो पर्दे पर उन्हें ज्यादा से ज्यादा देखना चाहती हैं। दूसरी तरफ वह एक निर्देशक और फिल्ममेकर भी हैं, जो कहानी, किरदारों और ट्रीटमेंट को तकनीकी और रचनात्मक दृष्टि से परखती हैं। उन्होंने साफ कहा कि उनकी प्रतिक्रिया किसी तरह की औपचारिक तारीफ नहीं थी, बल्कि पूरी ईमानदारी से निकला हुआ अनुभव था।
उनका मानना है कि ‘कुली’ ने कई स्तरों पर काम किया, लेकिन यह फिल्म उन्हें पूरी तरह से भावनात्मक और सिनेमाई तौर पर संतुष्ट नहीं कर पाई। यह बयान इसलिए भी अहम हो गया क्योंकि आमतौर पर सुपरस्टार के परिवार से ऐसी सीधी और बेबाक राय कम ही सामने आती है।
500 करोड़ की सफलता, फिर भी अधूरापन
‘कुली’ ने भारत में करीब 318 करोड़ रुपये और दुनियाभर में लगभग 518 करोड़ रुपये का कारोबार किया। यह रजनीकांत के करियर की टॉप-10 सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्मों में शामिल हो गई। आमिर खान का कैमियो इस फिल्म का बड़ा सरप्राइज फैक्टर रहा, जिसने दर्शकों के बीच उत्साह और बढ़ा दिया। बड़े सितारों की मौजूदगी, लोकेश कनगराज का स्टाइलिश निर्देशन और रजनीकांत का शांत लेकिन प्रभावशाली किरदार—इन सबने फिल्म को व्यावसायिक रूप से बेहद सफल बना दिया।
इसके बावजूद सौंदर्या को लगा कि फिल्म में कुछ कमी रह गई। उनका कहना था कि एक थलाइवा फैन होने के नाते उन्हें फिल्म में रजनीकांत की मौजूदगी और ज्यादा चाहिए थी। पुराने दौर की फिल्मों में जहां रजनीकांत का किरदार दमदार और केंद्र में होता था, वहीं ‘कुली’ में उनका रोल काफी नपा-तुला और संयमित नजर आया।
आखिरी 10 मिनट बने सबसे यादगार
सौंदर्या ने इंटरव्यू में यह भी बताया कि फिल्म का कौन सा हिस्सा उन्हें सबसे ज्यादा पसंद आया। उनके मुताबिक, ‘कुली’ के आखिरी 10 मिनट फिल्म का सबसे मजबूत और भावनात्मक हिस्सा थे। इन दृश्यों में डी-एजिंग तकनीक का इस्तेमाल किया गया था, जिसमें रजनीकांत को उनके पुराने लुक में दिखाया गया।
उन्होंने कहा कि तकनीकी तौर पर यह हिस्सा शानदार था और एक बेटी के तौर पर अपने पिता को उस पुराने अंदाज में देखना उनके लिए बेहद भावुक पल था। यही वो क्षण थे, जिन्होंने उन्हें फिल्म से सबसे ज्यादा जोड़ा। बाकी फिल्म की तुलना में वही कुछ मिनट उनके दिल में सबसे गहरी छाप छोड़ पाए।
कम कैमियो, ज्यादा रजनीकांत की चाह
सौंदर्या का मानना है कि फिल्म में मौजूद कैमियो अगर थोड़े कम होते और उस स्क्रीन टाइम को रजनीकांत के किरदार को दिया जाता, तो फिल्म का असर और ज्यादा गहरा हो सकता था। उनके अनुसार, फैंस बड़े पर्दे पर रजनीकांत से वही मास मोमेंट्स उम्मीद करते हैं, जो उनकी पहचान रहे हैं।
उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि ‘कुली’ में रजनीकांत का किरदार शांत और संयमित था, जो कहानी की मांग के हिसाब से सही हो सकता है, लेकिन यह अंदाज उनके क्लासिक अवतार से काफी अलग था। शायद यही वजह रही कि फिल्म, इतनी बड़ी हिट होने के बावजूद, उन्हें व्यक्तिगत तौर पर पूरी तरह संतुष्ट नहीं कर पाई।
टॉप-10 फिल्मों की लिस्ट से बाहर ‘कुली’
सौंदर्या ने बिना किसी हिचक के यह भी कहा कि ‘कुली’ उनके हिसाब से रजनीकांत की टॉप-10 फिल्मों में शामिल नहीं होती। उन्होंने जिन फिल्मों को अपने पिता के करियर की सबसे बेहतरीन कृतियों में गिना, उनमें बाशा, पडयप्पा, शिवाजी, अन्नामलाई और थिल्लू मुल्लू जैसी क्लासिक फिल्मों का नाम लिया।
उनके मुताबिक, ये फिल्में रजनीकांत के असली जादू, करिश्मे और अभिनय की ताकत को पूरी तरह से दर्शाती हैं। एक बेटी और एक फैन, दोनों के रूप में ये फिल्में उनकी यादों और दिल के सबसे करीब हैं।
सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस
सौंदर्या के इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर चर्चा तेज हो गई। कुछ फैंस ने उनकी ईमानदारी की तारीफ की, तो कुछ ने फिल्म का बचाव करते हुए बॉक्स ऑफिस की सफलता को सबसे बड़ा पैमाना बताया। कई लोगों का मानना था कि एक फिल्ममेकर होने के नाते सौंदर्या की राय को गंभीरता से लिया जाना चाहिए, क्योंकि वह सिर्फ भावनाओं में बहकर नहीं, बल्कि पेशेवर नजरिए से बात कर रही थीं।
यह बहस इस बात को भी उजागर करती है कि आज के दौर में दर्शक सिर्फ स्टारडम नहीं, बल्कि कंटेंट और प्रस्तुति को भी उतनी ही अहमियत देते हैं।
आगे क्या: रजनीकांत की अगली बड़ी फिल्म
इन सब चर्चाओं के बीच रजनीकांत अब अपनी अपकमिंग फिल्म ‘जेलर 2’ को लेकर सुर्खियों में हैं। नेल्सन दिलीपकुमार के निर्देशन में बन रही इस फिल्म में मिथुन चक्रवर्ती, राम्या कृष्णन, योगी बाबू और शिवा राजकुमार जैसे कलाकार नजर आएंगे। चर्चा है कि शाहरुख खान भी इस फिल्म का हिस्सा हो सकते हैं, हालांकि अभी इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
फैंस को उम्मीद है कि ‘जेलर 2’ में उन्हें रजनीकांत का वही दमदार और करिश्माई अंदाज देखने को मिलेगा, जिसकी झलक उन्होंने दशकों से बड़े पर्दे पर देखी है।
कमाई से आगे की कहानी
‘कुली’ की कहानी यह साबित करती है कि बॉक्स ऑफिस के आंकड़े किसी फिल्म की सफलता का सिर्फ एक पहलू होते हैं। जब खुद सुपरस्टार की बेटी और एक फिल्ममेकर यह कहती हैं कि फिल्म उन्हें पूरी तरह से इम्प्रेस नहीं कर पाई, तो यह बयान अपने आप में बेहद अहम हो जाता है। यह न सिर्फ रजनीकांत के करियर की विविधता को दिखाता है, बल्कि यह भी बताता है कि सिनेमा में असली जीत दर्शकों के दिल जीतने में होती है, न कि सिर्फ कमाई के आंकड़ों में।
