इंदौर शहर के बाणगंगा थाना क्षेत्र में सामने आई एक घटना ने न केवल स्थानीय स्तर पर बल्कि व्यापक स्तर पर भी चिंता पैदा कर दी है। एक निजी अस्पताल में कार्यरत असिस्टेंट मैनेजर और चिकित्सक डॉ. नीरज के लिए स्ट्रीट डॉग से जुड़ी एक साधारण प्रशासनिक शिकायत अचानक तनाव और भय का कारण बन गई। नगर निगम की हेल्पलाइन पर दर्ज कराई गई शिकायत के बाद उन्हें एक अंतरराष्ट्रीय इंटरनेट कॉल के माध्यम से धमकी दी गई। कॉल करने वाले ने खुद को ‘दाऊद भाई’ से जुड़ा व्यक्ति बताते हुए कहा कि “दाऊद जी एक ही बार बोलते हैं।” इस एक वाक्य ने पूरे घटनाक्रम को सनसनीखेज बना दिया।

घटना की शुरुआत एक डॉग बाइट की घटना से हुई थी। जानकारी के अनुसार, संबंधित क्षेत्र में एक व्यक्ति को कुत्ते ने काट लिया था। इसके बाद डॉ. नीरज ने नगर निगम की हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज कराई। शिकायत के आधार पर नगर निगम की टीम मौके पर पहुंची और वहां मौजूद अन्य कुत्तों को भी अपने साथ ले गई। इस प्रक्रिया को प्रशासनिक कार्रवाई के रूप में देखा जाना चाहिए था, लेकिन कुछ समय बाद यह मामला अप्रत्याशित मोड़ ले बैठा।
डॉ. नीरज के अनुसार, उन्हें एक इंटरनेट कॉल प्राप्त हुआ, जिसमें कॉलर ने खुद को न्यूयॉर्क से बोलने वाला बताया। कॉल के दौरान उसने कहा कि उनकी शिकायत प्राप्त हुई है और पूछा कि कुत्ते को बोरी में भरकर कहां फेंका गया तथा इसकी अनुमति किसने दी। यह सवाल अपने आप में गंभीर था, क्योंकि डॉक्टर ने ऐसी किसी भी अवैध कार्रवाई से इनकार किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि उन्होंने केवल निगम को सूचना दी थी और आगे की कार्रवाई प्रशासन ने की।
कॉलर ने बातचीत को यहीं नहीं रोका। उसने डॉक्टर की शादी और बच्चों का जिक्र करते हुए अप्रत्यक्ष रूप से उन्हें डराने की कोशिश की। यह व्यक्तिगत जानकारी का उल्लेख इस बात की ओर संकेत करता है कि कॉलर ने मनोवैज्ञानिक दबाव बनाने की रणनीति अपनाई। इतना ही नहीं, अस्पताल के मैनेजर राजीव का नाम लेकर उन्हें भी “समझाने” की बात कही गई। इस प्रकार कॉल का स्वर केवल प्रश्न पूछने तक सीमित नहीं था, बल्कि स्पष्ट रूप से धमकीपूर्ण था।
इस घटना ने तब और तूल पकड़ लिया जब संबंधित वीडियो एक एनजीओ द्वारा सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया गया। वीडियो वायरल होने के बाद देशभर से फोन कॉल आने लगे। एडिशनल डीसीपी जोन-3 रामसनेही मिश्रा के अनुसार, ‘दाऊद’ के नाम से आया कॉल भी इसी क्रम में सामने आया और इसे गंभीरता से लिया गया है। पुलिस ने स्पष्ट किया कि मामले की जांच तकनीकी आधार पर की जाएगी और इंटरनेट कॉल की वास्तविक लोकेशन का पता लगाया जाएगा।
बाणगंगा पुलिस ने प्रकरण दर्ज कर लिया है और साइबर सेल को जांच में शामिल किया गया है। इंटरनेट कॉल की प्रकृति ऐसी होती है कि कॉलर अपनी वास्तविक पहचान और स्थान छिपा सकता है। इसलिए तकनीकी विश्लेषण के बिना यह कहना कठिन है कि कॉल वास्तव में विदेश से किया गया या केवल ऐसा दिखाया गया। साइबर विशेषज्ञ कॉल डेटा, आईपी एड्रेस और अन्य डिजिटल ट्रेस के आधार पर स्रोत का पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं।
यह घटना केवल एक डॉक्टर को मिली धमकी तक सीमित नहीं है, बल्कि यह डिजिटल युग में उभरती नई चुनौतियों की ओर भी संकेत करती है। इंटरनेट आधारित कॉलिंग एप्लीकेशन के माध्यम से किसी भी देश का नंबर प्रदर्शित किया जा सकता है। इससे अपराधियों को पहचान छिपाने में सुविधा मिलती है। यदि इस प्रकार के कॉल का उपयोग लोगों को डराने के लिए किया जाता है, तो यह कानून व्यवस्था के लिए गंभीर चुनौती है।
सामाजिक स्तर पर भी यह मामला बहस का विषय बन गया है। एक ओर पशु अधिकारों से जुड़े समूह स्ट्रीट डॉग्स के प्रति संवेदनशीलता की बात करते हैं, तो दूसरी ओर नागरिक सुरक्षा और सार्वजनिक स्वास्थ्य का मुद्दा भी उतना ही महत्वपूर्ण है। डॉग बाइट की घटनाएं कई बार गंभीर परिणाम दे सकती हैं, इसलिए शिकायत दर्ज कराना एक वैध प्रक्रिया है। ऐसे में शिकायतकर्ता को धमकी मिलना चिंताजनक है।
घटना के बाद शहर में सनसनी फैल गई। सोशल मीडिया पर लोगों ने अलग-अलग दृष्टिकोण सामने रखे। कुछ लोगों ने डॉक्टर के समर्थन में आवाज उठाई, तो कुछ ने घटना की निष्पक्ष जांच की मांग की। इस पूरे घटनाक्रम ने यह स्पष्ट कर दिया कि डिजिटल माध्यमों का प्रभाव अब स्थानीय घटनाओं को भी राष्ट्रीय चर्चा में बदल सकता है।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि तकनीकी जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि कॉल कहां से और किसने किया। यदि यह किसी संगठित समूह की शरारत है, तो संबंधित धाराओं में कार्रवाई की जाएगी। वहीं यदि यह केवल किसी व्यक्ति द्वारा डराने की कोशिश है, तब भी कानून के तहत सख्त कदम उठाए जाएंगे।
यह घटना एक महत्वपूर्ण सवाल भी खड़ा करती है कि क्या सोशल मीडिया पर वायरल होने वाले वीडियो कभी-कभी अनावश्यक तनाव और भ्रम को जन्म देते हैं। जब कोई वीडियो संदर्भ से हटकर फैलता है, तो उसकी व्याख्या अलग-अलग तरीकों से की जाती है। इससे गलतफहमियां बढ़ सकती हैं और संबंधित पक्षों को खतरा महसूस हो सकता है।
इंदौर की यह घटना साइबर सुरक्षा, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और सामाजिक जिम्मेदारी के बीच संतुलन की आवश्यकता को रेखांकित करती है। शिकायत करना एक नागरिक अधिकार है, लेकिन उस शिकायत के बाद धमकी मिलना कानून के शासन पर प्रश्नचिह्न लगाता है। पुलिस और साइबर सेल की जांच से ही यह स्पष्ट होगा कि इस कॉल के पीछे कौन है और उसका उद्देश्य क्या था।
फिलहाल, डॉ. नीरज और उनके परिवार की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं। अस्पताल प्रशासन भी स्थिति पर नजर बनाए हुए है। शहर में इस मामले को लेकर चर्चा जारी है और लोग जांच के निष्कर्ष का इंतजार कर रहे हैं।
डिजिटल युग में जहां सूचना का प्रवाह तेज है, वहीं अफवाह और भय भी तेजी से फैल सकते हैं। ऐसे में आवश्यक है कि तकनीकी जांच के आधार पर तथ्य सामने आएं और दोषी के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो। इंदौर की यह घटना एक चेतावनी है कि साइबर माध्यमों का दुरुपयोग समाज में असुरक्षा की भावना पैदा कर सकता है। कानून व्यवस्था और डिजिटल सुरक्षा तंत्र को मजबूत करना समय की मांग है।
