मध्य प्रदेश के इंदौर शहर में डॉक्टरों की एक टीम ने जटिल और दुर्लभ सर्जरी को सफलतापूर्वक अंजाम देते हुए 45 वर्षीय महिला को नया जीवन दिया। यह मामला केवल एक ऑपरेशन की सफलता नहीं, बल्कि धैर्य, आधुनिक चिकित्सा तकनीक और समय पर लिए गए सही फैसले का उदाहरण भी है। महिला पिछले दो वर्षों से लगातार बढ़ती शारीरिक परेशानी से जूझ रही थी। उसके पेट में सूजन धीरे-धीरे बढ़ती जा रही थी और स्थिति इतनी गंभीर हो गई थी कि उसे भोजन करना और यहां तक कि पानी पीना भी मुश्किल हो गया था। जो भी वह खाती या पीती, उसे तुरंत उल्टियां होने लगती थीं।

ग्राम पिपल्दा की रहने वाली इस महिला के परिवार ने शुरू में सामान्य बीमारी समझकर स्थानीय स्तर पर उपचार कराया। दवाइयां ली गईं, कई अस्पतालों के चक्कर लगाए गए, लेकिन राहत नहीं मिली। समय बीतने के साथ परेशानी बढ़ती गई। पेट की सूजन स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगी और कमजोरी भी बढ़ने लगी। आखिरकार परिजन उसे इंदौर के एक बड़े अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां विशेषज्ञों ने उसकी विस्तृत जांच शुरू की।
लगातार बढ़ती सूजन ने बढ़ाई चिंता
महिला को पिछले दो सालों से पेट में भारीपन और सूजन की समस्या थी। शुरुआत में इसे गैस, अपच या सामान्य पेट संबंधी समस्या समझा गया। लेकिन जब सूजन लगातार बढ़ने लगी और उल्टियों की समस्या गंभीर हो गई, तब परिवार को स्थिति की गंभीरता का अंदाजा हुआ। परिजन राधेश्याम ने बताया कि महिला की हालत ऐसी हो गई थी कि वह सामान्य भोजन भी नहीं कर पा रही थी। थोड़ी सी मात्रा में खाना या पानी लेने पर भी उसे उल्टी हो जाती थी।
लगातार कमजोरी और असहजता के कारण उसका दैनिक जीवन प्रभावित हो चुका था। घर के कामकाज तो दूर, सामान्य गतिविधियां भी मुश्किल हो गई थीं। यह स्थिति परिवार के लिए मानसिक रूप से भी बेहद कठिन थी।
जांच में सामने आया बड़ा खतरा
अस्पताल में वरिष्ठ स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. रितिका मालवीय ने महिला की शारीरिक जांच की। इसके बाद अल्ट्रासोनोग्राफी और सीटी स्कैन कराया गया। जांच रिपोर्ट में जो सामने आया, उसने डॉक्टरों को भी गंभीरता से सोचने पर मजबूर कर दिया। महिला की दायीं ओवरी में एक बड़ा सीरस सिस्टेडेनोमा ट्यूमर विकसित हो चुका था। इसका आकार लगभग 12×12×17 सेंटीमीटर था और वजन करीब 4 किलोग्राम था।
ट्यूमर इतना बड़ा हो चुका था कि वह पेट के अन्य अंगों पर दबाव डाल रहा था। यही कारण था कि महिला को उल्टियां हो रही थीं और पाचन प्रक्रिया बाधित हो रही थी। डॉक्टरों ने स्पष्ट किया कि यदि समय रहते सर्जरी नहीं की जाती, तो ट्यूमर के फटने या कैंसर में बदलने का गंभीर खतरा हो सकता था।
तत्काल सर्जरी का निर्णय
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए डॉक्टरों ने परिजनों को पूरी जानकारी दी और सर्जरी की आवश्यकता बताई। परिवार की सहमति मिलने के बाद तुरंत ऑपरेशन का निर्णय लिया गया। यह सर्जरी आसान नहीं थी, क्योंकि ट्यूमर का आकार बड़ा था और आसपास के अंगों पर दबाव बना हुआ था।
डॉक्टरों की टीम ने लेप्रोस्कोपी और एंडोसुचरिंग तकनीक का उपयोग करने का निर्णय लिया। यह आधुनिक और कम आक्रामक तकनीक है, जिसमें बड़े चीरे की आवश्यकता नहीं होती। लगभग तीन घंटे तक चली इस जटिल सर्जरी में केवल 1 सेंटीमीटर के चार छोटे चीरे लगाए गए और सावधानीपूर्वक 4 किलो वजनी ट्यूमर को बाहर निकाला गया।
ऑपरेशन के दौरान एनेस्थीसिया विभाग की टीम ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। पूरे समय मरीज की स्थिति पर लगातार नजर रखी गई और हर कदम अत्यंत सावधानी से उठाया गया।
तेजी से सुधार और नई शुरुआत
सर्जरी के बाद महिला की हालत में तेजी से सुधार देखा गया। कुछ ही दिनों में वह सामान्य रूप से भोजन लेने लगी और उल्टियों की समस्या पूरी तरह समाप्त हो गई। डॉक्टरों के अनुसार, समय पर जांच, सटीक निदान, आधुनिक तकनीक और मरीज की इच्छाशक्ति ने इस सफलता में अहम भूमिका निभाई।
स्वस्थ होने के बाद महिला को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। परिवार ने डॉक्टरों और पूरे मेडिकल स्टाफ का आभार व्यक्त किया। अस्पताल प्रबंधन ने भी टीमवर्क की सराहना की और इसे चिकित्सा क्षेत्र में समर्पण और दक्षता का उदाहरण बताया।
महिला स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता की जरूरत
यह मामला केवल एक सफल ऑपरेशन की कहानी नहीं, बल्कि महिला स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता का संदेश भी है। अक्सर पेट की सूजन या अनियमित लक्षणों को नजरअंदाज कर दिया जाता है। लेकिन यदि समय पर जांच न कराई जाए, तो छोटी समस्या भी गंभीर रूप ले सकती है।
सीरस सिस्टेडेनोमा आमतौर पर ओवरी में विकसित होने वाला सिस्टिक ट्यूमर है, जो शुरुआत में बिना लक्षण के बढ़ सकता है। नियमित स्वास्थ्य जांच और लक्षणों को गंभीरता से लेना बेहद जरूरी है।
इंदौर की यह घटना बताती है कि आधुनिक चिकित्सा तकनीक और विशेषज्ञों की तत्परता से जटिल से जटिल समस्या का समाधान संभव है। दो साल की पीड़ा के बाद मिली यह राहत न केवल एक परिवार के लिए खुशी का कारण है, बल्कि समाज के लिए भी प्रेरणा है कि स्वास्थ्य को कभी नजरअंदाज न करें।
