भारत और पाकिस्तान के बीच राजनीतिक और कूटनीतिक तनाव कोई नई बात नहीं है, लेकिन इसका असर जब खेल जगत, खासकर क्रिकेट जैसे लोकप्रिय खेल पर पड़ने लगे तो यह करोड़ों प्रशंसकों के लिए चिंता का विषय बन जाता है। ताजा संकेत यही बता रहे हैं कि दोनों देशों के बीच जारी विवाद का प्रभाव अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद के बड़े टूर्नामेंटों पर पड़ सकता है। चर्चा है कि 2029 की चैंपियंस ट्रॉफी और 2031 के वनडे वर्ल्ड कप की मेजबानी भारत से बाहर शिफ्ट की जा सकती है।

यह संभावना इसलिए उभर रही है क्योंकि भारत और पाकिस्तान अब एक-दूसरे के देश में खेलने से इनकार कर चुके हैं और आईसीसी टूर्नामेंटों में उनके मुकाबले तटस्थ स्थानों पर आयोजित किए जाते हैं। इस व्यवस्था से जुड़े लॉजिस्टिक, सुरक्षा और आयोजन संबंधी कई जटिल सवाल सामने आए हैं, जिनसे बचने के लिए आईसीसी वैकल्पिक विकल्पों पर विचार कर रही है।
भारत और पाकिस्तान: केवल आईसीसी मंच पर आमना-सामना
पिछले कुछ वर्षों से भारत और पाकिस्तान की टीमें द्विपक्षीय सीरीज नहीं खेलतीं। दोनों का आमना-सामना केवल आईसीसी इवेंट्स या बहुराष्ट्रीय टूर्नामेंटों में होता है। हालांकि इन टूर्नामेंटों में भी अब यह तय हो चुका है कि दोनों टीमें एक-दूसरे के देश में मैच नहीं खेलेंगी। यदि टूर्नामेंट किसी एक देश में आयोजित होता है, तो प्रतिद्वंद्वी टीम के मैच किसी तटस्थ स्थल पर शिफ्ट कर दिए जाते हैं।
इस मॉडल के चलते आयोजन समिति को अलग-अलग स्थानों पर मैच आयोजित करने पड़ते हैं, जिससे यात्रा, सुरक्षा, प्रसारण और टिकटिंग जैसी व्यवस्थाओं में अतिरिक्त चुनौतियां पैदा होती हैं। यही कारण है कि आईसीसी अब भविष्य के बड़े टूर्नामेंटों की मेजबानी को लेकर नए सिरे से विचार कर रही है।
2029 चैंपियंस ट्रॉफी और 2031 वर्ल्ड कप पर खतरा
खबरों के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद 2029 की चैंपियंस ट्रॉफी और 2031 के वनडे विश्व कप को भारत से बाहर स्थानांतरित करने की संभावना पर विचार कर रही है। यह निर्णय अभी अंतिम नहीं है, लेकिन चर्चाओं ने भारतीय क्रिकेट प्रेमियों के बीच चिंता बढ़ा दी है।
रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि यदि इन टूर्नामेंटों को भारत से शिफ्ट किया जाता है, तो मेजबानी के लिए ऑस्ट्रेलिया का नाम प्रमुख दावेदार के रूप में सामने आ सकता है। ऑस्ट्रेलिया पहले भी 2015 में वनडे विश्व कप और 2022 में टी-20 विश्व कप की सफल मेजबानी कर चुका है। वहां की तैयारियां, बुनियादी ढांचा और आयोजन क्षमता को देखते हुए उसे सुरक्षित विकल्प माना जा रहा है।
ऑस्ट्रेलिया क्यों है मजबूत दावेदार
ऑस्ट्रेलिया के पास बड़े आईसीसी इवेंट आयोजित करने का अनुभव है। वहां के स्टेडियम आधुनिक सुविधाओं से लैस हैं और सुरक्षा व्यवस्था मजबूत मानी जाती है। यदि भारत और पाकिस्तान के बीच मैचों को लेकर जटिलताएं बनी रहती हैं, तो ऑस्ट्रेलिया जैसे देश में पूरे टूर्नामेंट को आयोजित करना अपेक्षाकृत सरल हो सकता है।
इसके अलावा, ऑस्ट्रेलिया की भौगोलिक स्थिति ऐसी है कि एशियाई टीमों के लिए यात्रा प्रबंधन संभव है और वहां पहले भी बहु-देशीय टूर्नामेंट सफलतापूर्वक आयोजित हो चुके हैं।
भारत-पाकिस्तान के बीच समझौता
भारत और पाकिस्तान ने पहले आईसीसी के साथ एक समझौता किया था, जिसके तहत वैश्विक टूर्नामेंटों में दोनों टीमें एक-दूसरे के देश में खेलने नहीं जाएंगी। यह समझौता उस समय हुआ था जब भारत ने 2025 की चैंपियंस ट्रॉफी के लिए पाकिस्तान जाने से इनकार कर दिया था।
मौजूदा व्यवस्था के अनुसार, यह समझौता 2027 तक लागू माना जा रहा है। लेकिन अब संभावना जताई जा रही है कि इसे आगे भी बढ़ाया जा सकता है। यदि ऐसा होता है, तो भविष्य के आईसीसी टूर्नामेंटों की मेजबानी योजना पर व्यापक प्रभाव पड़ सकता है।
लॉजिस्टिक चुनौतियां और आर्थिक असर
जब टूर्नामेंट किसी एक देश को आवंटित होता है, तो पूरा कार्यक्रम उसी देश की मेजबानी में आयोजित करने की योजना बनाई जाती है। लेकिन यदि भारत और पाकिस्तान एक-दूसरे के देश में खेलने से इनकार करते हैं, तो मैचों को तटस्थ स्थल पर शिफ्ट करना पड़ता है।
इससे टीमों की यात्रा बढ़ती है, प्रसारण कार्यक्रम में बदलाव करना पड़ता है और दर्शकों की उपस्थिति पर भी असर पड़ सकता है। आयोजन लागत भी बढ़ जाती है। आईसीसी के लिए यह एक बड़ा प्रबंधन संकट बन सकता है, खासकर तब जब टूर्नामेंट विश्व कप जैसे बड़े स्तर का हो।
मौजूदा टी-20 विश्व कप का उदाहरण
भारत और श्रीलंका की संयुक्त मेजबानी में जारी टी-20 विश्व कप 2026 इसका ताजा उदाहरण है। इस टूर्नामेंट में पाकिस्तान अपनी सभी मैच कोलंबो में खेल रही है। भारत के साथ उसका मुकाबला भी कोलंबो में आयोजित किया गया था। भारतीय टीम ने पाकिस्तान से मैच खेलने के लिए श्रीलंका का दौरा किया।
इस मुकाबले में पाकिस्तान को करारी हार का सामना करना पड़ा। लेकिन महत्वपूर्ण बात यह है कि यदि टूर्नामेंट के सेमीफाइनल या फाइनल में भी भारत और पाकिस्तान आमने-सामने होते हैं, तो वह मैच भी कोलंबो में ही खेला जाएगा। इससे यह स्पष्ट होता है कि तटस्थ स्थल मॉडल पहले से लागू है।
भारतीय प्रशंसकों के लिए संभावित झटका
यदि 2029 और 2031 के बड़े टूर्नामेंट भारत से बाहर चले जाते हैं, तो यह भारतीय प्रशंसकों के लिए बड़ा झटका होगा। विश्व कप जैसे आयोजन केवल खेल नहीं, बल्कि उत्सव होते हैं। घरेलू मैदान पर विश्व कप देखने का अवसर लाखों दर्शकों के लिए जीवन भर की याद बन जाता है।
इसके अलावा, ऐसे टूर्नामेंट देश की अर्थव्यवस्था के लिए भी फायदेमंद होते हैं। पर्यटन, होटल उद्योग, परिवहन और स्थानीय व्यवसायों को बड़ा लाभ मिलता है। यदि मेजबानी छिनती है, तो इन संभावित आर्थिक लाभों पर भी असर पड़ेगा।
आईसीसी की दुविधा
आईसीसी के सामने चुनौती यह है कि वह खेल को राजनीतिक विवादों से अलग रखे, लेकिन साथ ही आयोजन की व्यावहारिक समस्याओं का समाधान भी निकाले। भारत और पाकिस्तान के बीच मैच हमेशा से सबसे अधिक दर्शक जुटाते हैं और प्रसारण अधिकारों की दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण होते हैं।
ऐसे में यदि हर बड़े टूर्नामेंट में तटस्थ स्थल की व्यवस्था करनी पड़े, तो इससे योजना और बजट दोनों प्रभावित होंगे। संभव है कि आईसीसी भविष्य में टूर्नामेंट आवंटन के समय इन कारकों को प्राथमिकता दे।
भविष्य की संभावनाएं
हालांकि अभी कोई अंतिम निर्णय नहीं हुआ है, लेकिन चर्चाओं से संकेत मिलते हैं कि आईसीसी दीर्घकालिक समाधान तलाश रही है। यदि भारत और पाकिस्तान के बीच समझौता आगे भी जारी रहता है, तो भविष्य के टूर्नामेंटों की मेजबानी संरचना में बदलाव हो सकता है।
यह भी संभव है कि संयुक्त मेजबानी या बहु-देशीय मॉडल पर अधिक जोर दिया जाए, ताकि किसी एक देश पर पूरा आयोजन निर्भर न रहे। लेकिन यह सब आने वाले समय में स्पष्ट होगा।
निष्कर्ष
भारत और पाकिस्तान के बीच जारी तनाव का असर अब क्रिकेट जैसे वैश्विक खेल पर भी दिखने लगा है। 2029 की चैंपियंस ट्रॉफी और 2031 के वनडे वर्ल्ड कप की मेजबानी पर मंडराता खतरा इसी का संकेत है। तटस्थ स्थल पर मैचों की व्यवस्था ने आईसीसी को नए सिरे से सोचने पर मजबूर किया है।
यदि मेजबानी भारत से बाहर जाती है, तो यह खेल प्रेमियों के लिए निराशाजनक होगा। लेकिन अंतिम फैसला अभी बाकी है। आने वाले महीनों में आईसीसी की रणनीति और दोनों देशों के रुख से स्थिति और स्पष्ट होगी।
