रायसेन, मध्यप्रदेश – एक छोटा-सा गांव, जहां रिश्तों की गर्माहट और मिट्टी की खुशबू कभी जीवन की पहचान हुआ करती थी, अब खून और हिंसा की गवाही दे रहा है। यहां एक साधारण-से जमीन विवाद ने ऐसा रूप लिया कि एक वृद्ध की जान चली गई और परिवार के अन्य सदस्य लहूलुहान हो गए। इस घटना ने न केवल रायसेन बल्कि पूरे प्रदेश को झकझोर दिया है।

घटना की शुरुआत – पुरानी रंजिश, नई आग
रायसेन जिले के एक ग्रामीण इलाके में दो परिवारों के बीच लंबे समय से भूमि विवाद चल रहा था। बताया जाता है कि विवादित जमीन लगभग दो बीघा कृषि भूमि की थी, जिस पर दोनों पक्ष अपना-अपना हक जताते थे। मामला पंचायत से लेकर तहसील तक पहुँचा, लेकिन कोई ठोस समाधान नहीं निकला।
बीते सोमवार सुबह, विवादित जमीन के पास दोनों पक्ष आमने-सामने आ गए। बात पहले कहासुनी से शुरू हुई, लेकिन कुछ ही मिनटों में विवाद हिंसा में बदल गया। गुस्से में एक पक्ष के लोगों ने ट्रैक्टर स्टार्ट किया और वृद्ध व्यक्ति को रौंद डाला। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, वृद्ध उस समय खेत की मेड़ पर खड़े थे, जब उन पर अचानक ट्रैक्टर चढ़ा दिया गया।
परिवार पर ताबड़तोड़ हमला
वृद्ध की चीख सुनकर उनके परिजन खेत की ओर दौड़े, लेकिन हमलावरों ने लाठी-डंडे से हमला कर दिया। घटना स्थल पर अफरातफरी मच गई। आसपास के ग्रामीणों ने बीच-बचाव की कोशिश की, मगर हमलावर तब तक अपना कहर बरपा चुके थे। घटना में वृद्ध व्यक्ति की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि उनके बेटे और बहू गंभीर रूप से घायल हैं। दोनों को तत्काल जिला अस्पताल रायसेन ले जाया गया, जहां उनकी हालत फिलहाल स्थिर बताई जा रही है।
पुलिस की कार्रवाई और FIR दर्ज
सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची। थाना प्रभारी ने बताया कि हत्या, मारपीट और शांति भंग करने की धाराओं में मामला दर्ज कर लिया गया है। मुख्य आरोपी और उसके दो सहयोगी फरार हैं। पुलिस ने क्षेत्र में तलाशी अभियान शुरू कर दिया है। पुलिस अधीक्षक ने बताया, “हमने टीम गठित कर दी है। फरार आरोपियों की तलाश जारी है। मामले की गंभीरता को देखते हुए, संबंधित राजस्व अधिकारियों से भी रिपोर्ट मांगी गई है।”
गांव में तनाव का माहौल
घटना के बाद गांव में भारी तनाव फैल गया है। पुलिस बल की तैनाती की गई है ताकि कोई अप्रिय घटना न हो। ग्रामीणों के अनुसार, इस जमीन विवाद को लेकर पहले भी कई बार झगड़े हो चुके थे, लेकिन प्रशासन ने इसे गंभीरता से नहीं लिया। परिणामस्वरूप यह विवाद आज एक खूनखराबे में बदल गया।
जमीन – इंसान का सबसे पुराना लालच
यह घटना केवल एक हत्या की कहानी नहीं है, बल्कि उस सोच का आईना है, जो एक टुकड़ा जमीन के लिए इंसानियत को भी कुचल देती है। मध्यप्रदेश सहित पूरे देश में हर साल हजारों विवाद भूमि के नाम पर दर्ज होते हैं। इनमें से कई विवाद परिवारों के बीच होते हैं — भाई-भाई, चाचा-भतीजा, यहां तक कि पिता-पुत्र तक एक-दूसरे के खिलाफ खड़े हो जाते हैं। रायसेन का यह मामला भी कुछ ऐसा ही था — पहले परिवारों के बीच संबंध मधुर थे, लेकिन जैसे-जैसे संपत्ति का मूल्य बढ़ा, वैसे-वैसे रिश्तों की गर्मी घटती गई।
गांव के लोगों की गवाही
ग्रामीणों का कहना है कि दोनों पक्षों में झगड़ा पिछले कुछ महीनों से बढ़ता जा रहा था। गांव के सरपंच ने बताया, “हमने कई बार समझौता कराने की कोशिश की, लेकिन दोनों परिवार जिद पर अड़े रहे। अब जो हुआ है, वह पूरे गांव के लिए कलंक है।” एक बुजुर्ग ग्रामीण ने आंसू पोंछते हुए कहा, “हमने अपने जीवन में बहुत झगड़े देखे हैं, लेकिन किसी को ट्रैक्टर से कुचल देना… ये तो दरिंदगी है।”
परिवार की व्यथा
मृतक के पुत्र ने रोते हुए बताया कि उन्होंने कई बार पुलिस को आवेदन दिया था कि उनके खेत पर दूसरे पक्ष के लोग कब्जा करने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन किसी ने कार्रवाई नहीं की। “अगर पुलिस ने समय रहते ध्यान दिया होता, तो मेरे पिता आज जिंदा होते,” उन्होंने कहा।
प्रशासन पर सवाल
घटना ने प्रशासन की कार्यशैली पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि दोनों परिवारों के बीच तनाव की जानकारी पहले से थी। बावजूद इसके न तो भूमि मापी कराई गई और न ही विवाद सुलझाने के लिए प्रभावी कदम उठाए गए।
सामाजिक संदेश
यह घटना समाज को यह सोचने पर मजबूर करती है कि आखिर जमीन और संपत्ति के लिए इंसान कब तक अपनी इंसानियत भूलता रहेगा। कुछ एकड़ भूमि के लिए रिश्तों की नींव हिलाना, खून बहाना और एक परिवार को तबाह कर देना — यह सिर्फ कानून का नहीं बल्कि नैतिकता का भी उल्लंघन है।
जमीन विवाद : एक राष्ट्रीय समस्या
राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) के आंकड़ों के अनुसार, भारत में हर साल लगभग 12% हत्याएं भूमि विवाद से जुड़ी होती हैं। यह आंकड़ा बताता है कि यह कोई सामान्य विवाद नहीं, बल्कि एक गंभीर सामाजिक बीमारी बन चुका है। मध्यप्रदेश, उत्तरप्रदेश और बिहार जैसे राज्यों में ग्रामीण स्तर पर यह समस्या और भी गहरी है। जहां एक ओर आधुनिकता की बातें की जाती हैं, वहीं गांवों में जमीन को लेकर अभी भी हिंसा का दौर जारी है।
न्याय की उम्मीद
पीड़ित परिवार अब न्याय की गुहार लगा रहा है। राज्य सरकार ने घटना की जांच के आदेश दे दिए हैं और पीड़ित परिवार को मुआवजे का आश्वासन भी दिया गया है। लेकिन सवाल यह है कि क्या केवल मुआवजा ही इस पीड़ा का इलाज है? जब तक समाज के अंदर लालच और हिंसा का ज़हर रहेगा, तब तक ऐसी घटनाएं होती रहेंगी।
