मध्य प्रदेश की औद्योगिक राजधानी इंदौर एक बार फिर सुर्खियों में है — लेकिन इस बार किसी विकास कार्य या नागरिक सुविधा के कारण नहीं, बल्कि एक ऐसे सियासी और कानूनी घटनाक्रम के कारण जिसने शहर की राजनीति में हलचल मचा दी है। नगर निगम इंदौर के वार्ड क्रमांक 58 से पार्षद अनवर कादरी को उनके पद से हटा दिया गया है। उन पर ‘लव जिहाद के लिए फंडिंग’ के गंभीर आरोप लगे थे, और कानूनी समीक्षा के बाद प्रशासन ने यह बड़ा फैसला लिया।

संभागायुक्त डॉ. सुदाम खाड़े ने आदेश जारी करते हुए न केवल उनकी पार्षदी समाप्त की, बल्कि उन्हें अगले पांच वर्षों तक किसी भी चुनाव लड़ने के लिए अयोग्य घोषित कर दिया। यह कदम न केवल नगर निगम की साख और नैतिकता की रक्षा के लिए बताया जा रहा है, बल्कि इसे सामाजिक सौहार्द और सार्वजनिक हित के लिए आवश्यक कदम भी माना जा रहा है।
कैसे शुरू हुआ मामला: आरोपों की कहानी
अनवर कादरी का नाम पहली बार तब सामने आया जब शहर में कुछ ऐसे नेटवर्क का खुलासा हुआ, जिन पर ‘लव जिहाद’ जैसी गतिविधियों के लिए फंडिंग करने के आरोप लगे थे। सूत्रों के मुताबिक, कादरी पर आरोप था कि वे स्थानीय धार्मिक संगठनों और संदिग्ध नेटवर्क के माध्यम से फंड ट्रांसफर कर रहे थे, जिससे कथित तौर पर ऐसे मामलों को बढ़ावा मिल रहा था जो धार्मिक और सामाजिक सौहार्द के लिए खतरा बन सकते थे।
इंदौर पुलिस की जांच में यह भी सामने आया कि कादरी के खिलाफ पहले से ही कई आपराधिक मुकदमे दर्ज थे — जिनमें हत्या, हत्या के प्रयास, अवैध हथियार रखने और धार्मिक स्वतंत्रता अधिनियम का उल्लंघन शामिल है। इन सभी मामलों को ध्यान में रखते हुए नगर निगम प्रशासन ने उनकी आचरण रिपोर्ट मांगी, जिसके बाद मामला संभागायुक्त के पास पहुंचा।
महापौर और निगम परिषद का रुख
इंदौर के महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने कादरी के खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश करते हुए कहा कि —
“नगर निगम की गरिमा बनाए रखना हमारी जिम्मेदारी है। किसी ऐसे व्यक्ति को पद पर बनाए रखना, जिस पर गंभीर आपराधिक आरोप हों, सार्वजनिक विश्वास के साथ धोखा होगा।”
इसके बाद नगर निगम परिषद का विशेष सम्मेलन बुलाया गया। सभी पार्षदों की उपस्थिति में अनवर कादरी को पद से हटाने का प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित किया गया। यह भी तय किया गया कि पूरे मामले की फाइल संभागायुक्त को सौंपी जाए ताकि कानूनी प्रक्रिया के अनुसार अंतिम निर्णय लिया जा सके।
संभागायुक्त का आदेश और कानूनी आधार
डॉ. सुदाम खाड़े, जो इंदौर संभाग के आयुक्त हैं, ने विस्तृत जांच रिपोर्ट और दस्तावेजों की समीक्षा के बाद अपना निर्णय सुनाया। उन्होंने अपने आदेश में लिखा —
“कादरी का पार्षद पद पर बने रहना सार्वजनिक हित के विपरीत है। उनके विरुद्ध दर्ज गंभीर आपराधिक प्रकरणों और उनके आचरण ने नगर निगम की साख को नुकसान पहुँचाया है। साथ ही इससे शहर की सामाजिक सौहार्दता भी प्रभावित हुई है।”
कादरी के खिलाफ कार्रवाई मध्य प्रदेश नगर पालिका निगम अधिनियम, 1956 की धारा 19(1)(अ) के अंतर्गत की गई। इस धारा के अनुसार यदि किसी निर्वाचित प्रतिनिधि का आचरण नगर निगम की गरिमा या सार्वजनिक नैतिकता के खिलाफ पाया जाए, तो उसे पद से हटाया जा सकता है।
कादरी को दी गई सफाई का मौका, लेकिन…
प्रशासन की ओर से कादरी को जवाब देने का अवसर भी दिया गया था। उन्हें नोटिस जारी कर व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने के लिए कहा गया। हालांकि, वे खुद उपस्थित नहीं हुए। उनकी ओर से उनकी पत्नी ने एक लिखित जवाब प्रस्तुत किया, लेकिन उसमें कोई ठोस प्रमाण या दस्तावेज नहीं दिए गए जिससे उनके खिलाफ लगे आरोपों को निरस्त किया जा सके। परिणामस्वरूप, प्रशासन ने यह माना कि कादरी ने आरोपों का संतोषजनक खंडन नहीं किया और उनके आचरण को सार्वजनिक जीवन के लिए अनुपयुक्त पाया गया।
23 आपराधिक प्रकरणों में नाम दर्ज
जानकारी के अनुसार, अनवर कादरी के खिलाफ शहर के विभिन्न थानों में 23 आपराधिक प्रकरण दर्ज हैं।
इनमें निम्न गंभीर धाराएँ शामिल हैं —
- हत्या (IPC 302)
- हत्या का प्रयास (IPC 307)
- आर्म्स एक्ट के तहत अवैध हथियार रखना
- मध्य प्रदेश धार्मिक स्वतंत्रता अधिनियम का उल्लंघन
इतनी बड़ी संख्या में अपराधों में नाम होने के बावजूद कादरी राजनीति में सक्रिय थे और वार्ड 58 से पार्षद का चुनाव जीतकर नगर निगम में पहुंचे थे।
राजनीतिक और सामाजिक हलचल
इस कार्रवाई ने इंदौर की राजनीति में हलचल मचा दी है। कुछ नेताओं ने इसे “न्यायोचित और आवश्यक कदम” बताया, वहीं कुछ लोगों का कहना है कि यह राजनीतिक दबाव का परिणाम हो सकता है। हालांकि, प्रशासनिक अधिकारियों ने साफ किया कि फैसला पूरी तरह कानूनी प्रक्रिया और दस्तावेज़ों पर आधारित है। इंदौर के नागरिकों में भी इस खबर पर विभाजित प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं — एक वर्ग ने कहा कि “ऐसे लोगों को राजनीति से बाहर करना जरूरी है”, जबकि कुछ ने इसे “चुनावी बदले की कार्रवाई” कहा।
सामाजिक सौहार्द पर असर
इंदौर शहर धार्मिक विविधता और सांस्कृतिक एकता के लिए जाना जाता है। ऐसे में इस तरह के मामलों का असर सामाजिक सौहार्द पर पड़ता है। डॉ. खाड़े ने अपने आदेश में लिखा —
“लोकतांत्रिक संस्थाओं की साख और शहर की सांप्रदायिक शांति बनाए रखना हमारी प्राथमिक जिम्मेदारी है। कोई भी व्यक्ति, चाहे उसका राजनीतिक कद कितना भी बड़ा क्यों न हो, यदि समाज में विभाजन की भावना फैलाने वाला पाया जाता है, तो उसके खिलाफ कार्रवाई अवश्य होगी।”
राजनीतिक भविष्य पर असर
अब अनवर कादरी पांच साल तक कोई चुनाव नहीं लड़ सकेंगे। यह प्रतिबंध उनके राजनीतिक करियर पर बड़ा झटका माना जा रहा है।
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि —
“ऐसी कार्रवाई आने वाले समय में राजनीति में पारदर्शिता और जवाबदेही की नई मिसाल बन सकती है। अगर ऐसे मामलों में प्रशासन सख्त रहेगा, तो जनता का विश्वास बढ़ेगा।”
निष्कर्ष: एक मिसाल या विवाद?
इंदौर प्रशासन का यह कदम एक मिसाल भी है और एक विवाद भी। मिसाल इसलिए क्योंकि इसने यह संदेश दिया कि पद से ऊपर कानून है। और विवाद इसलिए क्योंकि राजनीतिक गलियारों में इसे लेकर सवाल उठेंगे ही। फिर भी, शहर में यह बात अब स्थापित हो गई है कि कानून से ऊपर कोई नहीं, चाहे वह जनप्रतिनिधि ही क्यों न हो।
