भोपाल, मध्यप्रदेश की राजधानी, बुधवार की सुबह एक ऐसा हादसा देखी जिसने हर अभिभावक के दिल में दहशत भर दी। कोलार रोड के चुनाभट्टी इलाके में हुई यह दुर्घटना स्कूल जाने वाले बच्चों के लिए किसी डरावने सपने से कम नहीं थी। मानसरोवर स्कूल की एक वैन, जिसमें कई छोटे बच्चे सवार थे, अचानक अनियंत्रित हो गई और सड़क किनारे खड़े लोडिंग ऑटो से जा टकराई। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि वैन का अगला हिस्सा बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया, लेकिन सौभाग्य से सभी बच्चे सुरक्षित बच गए।

प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, सुबह करीब 8:30 बजे स्कूल वैन तेज रफ्तार में कोलार रोड से गुजर रही थी। तभी अचानक सामने से एक बाइक आने लगी। ड्राइवर ने बाइक को बचाने के लिए वैन को दाईं ओर मोड़ने की कोशिश की, लेकिन वैन अनियंत्रित हो गई और सड़क किनारे खड़े एक लोडिंग ऑटो से जा भिड़ी। टक्कर की आवाज इतनी तेज थी कि आसपास के लोग दौड़कर मौके पर पहुंचे।
वैन में बैठे बच्चे डर के मारे रोने लगे। कुछ बच्चों को हल्की चोटें आईं, जबकि ड्राइवर के सिर पर हल्की चोट बताई जा रही है। हादसे की सूचना मिलते ही चुनाभट्टी पुलिस तुरंत मौके पर पहुंची और घायलों को पास के अस्पताल पहुंचाया। सौभाग्य से किसी की जान को गंभीर खतरा नहीं हुआ।
अभिभावकों की दौड़भाग और दहशत
जैसे ही इस हादसे की खबर इलाके में फैली, बच्चों के अभिभावक परेशान होकर स्कूल और पुलिस थाने की ओर दौड़ पड़े। कई माता-पिता अपने बच्चों को सुरक्षित देखकर फफक पड़े। एक मां ने बताया — “सिर्फ कुछ सेकंड का फर्क था, नहीं तो पता नहीं क्या हो जाता। भगवान का शुक्र है कि हमारे बच्चे सही सलामत हैं।”
पुलिस की त्वरित कार्रवाई
भोपाल पुलिस ने तुरंत घटनास्थल का मुआयना किया। पुलिस ने बताया कि वैन चालक चांद उर्फ सोहेल (20) वैन चला रहा था। उसने स्वीकार किया कि सड़क फिसलन भरी थी और वैन के ब्रेक अचानक फेल हो गए थे। हालांकि, पुलिस ने वाहन को जब्त कर लिया है और फिटनेस रिपोर्ट की जांच शुरू कर दी है।
स्कूल प्रबंधन की सफाई
स्कूल प्रशासन ने इस घटना पर दुख जताते हुए कहा कि वैन नियमित रूप से सर्विस की जाती थी। “हमारे बच्चों की सुरक्षा हमारी प्राथमिकता है,” — स्कूल की प्रिंसिपल ने कहा। उन्होंने यह भी बताया कि ड्राइवर के पास वैध लाइसेंस है और वह लंबे समय से स्कूल के साथ जुड़ा है। स्कूल ने घायलों के इलाज की जिम्मेदारी लेने की भी घोषणा की।
सड़क सुरक्षा पर बड़ा सवाल
यह हादसा भोपाल जैसे विकसित शहर में सड़क सुरक्षा के मानकों पर बड़ा सवाल खड़ा करता है। रोजाना सैकड़ों स्कूल वैन और ऑटो बच्चों को लेकर सड़कों पर निकलते हैं, लेकिन उनमें से कितने वास्तव में फिट हैं? कितने ड्राइवरों के पास प्रशिक्षण है? कितने वाहनों में फर्स्ट एड बॉक्स या अग्निशमन सिलेंडर होते हैं?
राजधानी की सड़कों पर कई जगह अनियंत्रित वाहनों के कारण हादसे हो रहे हैं। पिछले एक साल में भोपाल में ही करीब 100 से अधिक स्कूल वैन दुर्घटनाग्रस्त हो चुकी हैं। इनमें से कई मामलों में ब्रेक फेल, ओवरलोडिंग या ड्राइवर की लापरवाही प्रमुख कारण रहे हैं।
स्थानीय लोगों की नाराजगी
घटना के बाद स्थानीय निवासियों ने प्रशासन पर नाराजगी जताई। उनका कहना था कि इस रोड पर रोजाना दुर्घटनाएं होती हैं, लेकिन प्रशासन की ओर से न तो स्पीड ब्रेकर बनाए गए हैं और न ही ट्रैफिक पुलिस की गश्त बढ़ाई गई है। एक दुकानदार ने कहा, “यहां बच्चे रोजाना सड़क पार करते हैं। ट्रैफिक का कोई नियम नहीं चलता। वैन वाले तेज चलाते हैं। हादसा होना तय है।”
सरकार की पहल और चेतावनी
राज्य परिवहन विभाग ने हाल ही में आदेश जारी किया था कि कोई भी स्कूल वैन 40 किमी/घंटे से अधिक गति से नहीं चलेगी और उसमें GPS ट्रैकिंग सिस्टम अनिवार्य होगा। परंतु यह आदेश अब तक कई निजी स्कूलों ने लागू नहीं किया है।
मध्यप्रदेश के गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा ने इस हादसे पर संज्ञान लेते हुए कहा, “बच्चों की सुरक्षा सर्वोपरि है। ऐसे मामलों में किसी को बख्शा नहीं जाएगा। हर स्कूल वैन की फिटनेस जांच कराई जाएगी।” सरकार ने सभी जिलों के RTO अधिकारियों को आदेश दिया है कि वे अगले 10 दिनों में सभी स्कूल वाहनों की जांच पूरी करें।
परिजनों की भावनाएं
हादसे के बाद कई माता-पिता ने सोशल मीडिया पर अपनी चिंता जाहिर की। एक पिता ने लिखा — “हर सुबह बच्चे को वैन में बैठाते वक्त डर लगता है। क्या हमारे बच्चे सुरक्षित हैं?” यह प्रश्न हर उस अभिभावक का है जो अपने नन्हें बच्चों को भरोसे के साथ स्कूल भेजता है।
सुरक्षा के लिए जरूरी सुझाव
- स्कूल वैन में हमेशा दो वयस्क (ड्राइवर के अलावा एक अटेंडेंट) होना चाहिए।
- हर वाहन में फर्स्ट एड किट और अग्निशमन सिलेंडर होना अनिवार्य किया जाए।
- माता-पिता को GPS ऐप से अपने बच्चे की लोकेशन देखने की सुविधा मिले।
- बच्चों को नियमित रूप से सड़क सुरक्षा के नियम सिखाए जाएं।
- ट्रैफिक पुलिस को स्कूल टाइम पर सख्त निगरानी करनी चाहिए।
भोपाल प्रशासन की कार्रवाई योजना
भोपाल नगर निगम और पुलिस अब एक संयुक्त जांच समिति बना रहे हैं जो सभी स्कूल वाहनों की फिटनेस, चालक की योग्यता और सुरक्षा उपकरणों की जांच करेगी। साथ ही यह तय किया गया है कि हर वाहन पर “स्कूल वैन — स्पीड लिमिट 40” का बोर्ड लगाना अनिवार्य होगा।
अंतिम विचार
यह हादसा हमें याद दिलाता है कि सुरक्षा सिर्फ प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि समाज, स्कूल और अभिभावकों की भी समान भागीदारी है। यदि सभी अपनी भूमिका जिम्मेदारी से निभाएं, तो ऐसे हादसे रुक सकते हैं। आज मासूम बच गए, लेकिन अगली बार कौन सी निर्दोष जान चली जाए — यह कहना मुश्किल है।
