देश के प्रतिष्ठित इंजीनियरिंग संस्थानों में गिने जाने वाले आईआईटी भिलाई से मंगलवार की सुबह एक ऐसी खबर आई जिसने छात्रों, अभिभावकों और पूरे शिक्षावर्ग को हिला कर रख दिया। नर्मदापुरम (मध्यप्रदेश) निवासी 18 वर्षीय सौमिल साहू, जो आईआईटी भिलाई में बीटेक (इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग) के प्रथम वर्ष के छात्र थे, की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। बताया जा रहा है कि सोमवार को उन्हें हल्का बुखार और कमजोरी महसूस हो रही थी, लेकिन अचानक उनकी हालत बिगड़ी और उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।

इस घटना ने न केवल छात्रों के बीच भय और आक्रोश का माहौल पैदा कर दिया है, बल्कि यह सवाल भी उठ खड़ा किया है — क्या संस्थान में छात्रों की सेहत और मानसिक स्थिति की निगरानी के लिए पर्याप्त व्यवस्था है?
मामले की शुरुआती जानकारी — ‘बुखार’ से शुरू हुई कहानी, मौत पर कई सवाल
परिवार के मुताबिक, सौमिल की तबीयत सोमवार रात को खराब हुई थी। हॉस्टल के दोस्तों ने बताया कि उन्हें हल्का बुखार और सिर दर्द था। रात में उन्होंने कॉलेज की डिस्पेंसरी से कुछ दवाइयां लीं और कमरे में आराम करने चले गए। लेकिन मंगलवार सुबह जब रूममेट ने उन्हें उठाने की कोशिश की, तो वे अचेत पाए गए।
घबराए छात्रों ने तुरंत कॉलेज प्रशासन को सूचना दी। प्रशासन की टीम ने उन्हें सुपेला के स्पर्श अस्पताल पहुंचाया, लेकिन डॉक्टरों ने बताया कि सौमिल की पहले ही मौत हो चुकी थी। अस्पताल की प्रारंभिक रिपोर्ट में “कार्डियक अरेस्ट” का संदेह जताया गया है, लेकिन परिजन इसे स्वीकार करने को तैयार नहीं हैं।
परिजनों की मांग – “सिर्फ बुखार से मौत कैसे?”
नर्मदापुरम में सौमिल का परिवार गहरे सदमे में है। उनके पिता ने सवाल उठाया है,
“हमारा बेटा बिल्कुल स्वस्थ था। एक दिन पहले ही उसने हमसे वीडियो कॉल पर बात की थी। उसने बताया था कि थोड़ी कमजोरी है, लेकिन ठीक हो जाएगा। अचानक ऐसा क्या हुआ कि उसकी मौत हो गई? हम स्वतंत्र जांच चाहते हैं।”
परिवार ने स्थानीय प्रशासन से पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट सार्वजनिक करने और कॉलेज के चिकित्सीय ढांचे की जांच कराने की मांग की है।
संस्थान की प्रतिक्रिया — ‘छात्र को तत्काल चिकित्सा सहायता दी गई’
आईआईटी भिलाई प्रशासन ने एक संक्षिप्त बयान जारी किया है —
“हमें अत्यंत दुख है कि हमारे छात्र सौमिल साहू का आकस्मिक निधन हुआ। उन्हें मंगलवार सुबह अस्वस्थ अवस्था में पाया गया था। तत्काल चिकित्सीय सहायता दी गई, लेकिन दुर्भाग्यवश उन्हें बचाया नहीं जा सका। प्रशासन परिवार के संपर्क में है और हर संभव सहायता प्रदान कर रहा है।”
हालांकि, कॉलेज ने अभी तक आंतरिक जांच समिति गठित करने या विस्तृत रिपोर्ट जारी करने की घोषणा नहीं की है।
छात्रों में भय और असंतोष — “कैंपस में मेडिकल सुविधाएं बेहद कमजोर”
आईआईटी के कई छात्रों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि कॉलेज में मेडिकल आपात स्थिति से निपटने की सुविधाएं बेहद सीमित हैं। डिस्पेंसरी में न तो पर्याप्त दवाइयां हैं और न ही 24 घंटे कोई योग्य डॉक्टर उपलब्ध रहता है। एक छात्र ने कहा,
“हमारे हॉस्टल में किसी की तबीयत बिगड़ जाए तो अस्पताल ले जाने में आधा घंटा लग जाता है। सौमिल के केस में भी यही हुआ। अगर मौके पर ऑक्सीजन या डॉक्टर होता, तो शायद उसे बचाया जा सकता था।”
मानसिक स्वास्थ्य की अनदेखी — आईआईटी में बढ़ रही आत्महत्या और तनाव की घटनाएं
भारत के प्रमुख तकनीकी संस्थानों में छात्रों की आत्महत्या, अवसाद और रहस्यमयी मौतों की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। पिछले 3 वर्षों में आईआईटी बॉम्बे, कानपुर, खड़गपुर और मद्रास जैसे संस्थानों में कई छात्रों ने अपनी जान गंवाई है। विशेषज्ञों का कहना है कि शैक्षणिक दबाव, प्रतियोगिता, और मानसिक तनाव छात्रों को अंदर से तोड़ देता है। सौमिल की मौत भी उसी ढांचे की ओर इशारा करती है — जहां विद्यार्थी अकादमिक श्रेष्ठता की दौड़ में अपना मानसिक संतुलन खो देते हैं।
मामले की जांच शुरू, पुलिस ने कॉलेज रिकॉर्ड सीज किया
भिलाई पुलिस ने इस घटना को गंभीरता से लेते हुए जांच शुरू कर दी है। सुपेला थाने के प्रभारी ने बताया कि पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट आने के बाद ही मौत का असली कारण स्पष्ट हो पाएगा। फिलहाल पुलिस ने कॉलेज के मेडिकल लॉगबुक, हॉस्टल रिकॉर्ड और सीसीटीवी फुटेज जब्त कर लिए हैं। वहीं, अस्पताल से भी सभी मेडिकल रिकॉर्ड मांगे गए हैं।
साथियों की प्रतिक्रिया — “हमने उसे हंसते हुए देखा था”
सौमिल के बैचमेट और दोस्त बताते हैं कि वह बेहद शांत और प्रतिभाशाली छात्र था। गणित और इलेक्ट्रॉनिक्स में गहरी रुचि रखता था।
एक दोस्त ने कहा —
“वह हमेशा मुस्कुराता रहता था। सोमवार को भी क्लास में आया था, मजाक किया था। कभी नहीं लगा कि वह अस्वस्थ है। उसकी मौत हमें अंदर तक झकझोर गई है।”
परिवार का दर्द — ‘आईआईटी भेजा था सपनों के लिए, मिला शोक संदेश’
सौमिल के पिता का कहना है कि उन्होंने अपने बेटे को इंजीनियर बनने के सपने के साथ भिलाई भेजा था। वे कहते हैं —
“हमने सोचा था कि बेटा पढ़-लिखकर परिवार का नाम रोशन करेगा। लेकिन हमें उसकी लाश मिली। हम तब तक शांत नहीं बैठेंगे जब तक पूरी सच्चाई सामने नहीं आ जाती।”
आईआईटी भिलाई की साख पर सवाल
यह पहली बार नहीं है जब आईआईटी भिलाई में छात्र की संदिग्ध मौत हुई हो। 2022 में भी एक छात्र की हॉस्टल रूम में मौत हुई थी, जिसे तब आत्महत्या बताया गया था। लेकिन उस मामले की रिपोर्ट अब तक सार्वजनिक नहीं हुई। इस बार भी प्रशासन की चुप्पी ने अभिभावकों के मन में शंका पैदा की है।
विशेषज्ञों की राय — ‘इंजीनियरिंग संस्थानों में स्वास्थ्य मॉनिटरिंग जरूरी’
शैक्षणिक मनोवैज्ञानिकों का कहना है कि ऐसे मामलों को रोकने के लिए कॉलेजों में 24×7 हेल्थ मॉनिटरिंग सिस्टम, काउंसलिंग सेंटर और मेडिकल इमरजेंसी टीम अनिवार्य होनी चाहिए। डॉ. रीमा चौबे (मनोचिकित्सक, भोपाल) का कहना है —
“आईआईटी जैसे उच्च संस्थानों में बच्चों पर असफलता का डर बहुत गहरा होता है। संस्थान को चाहिए कि वे हर छात्र की मानसिक और शारीरिक स्थिति पर नजर रखें।”
अंतिम संस्कार और जांच की दिशा
सौमिल का शव पोस्टमॉर्टम के बाद बुधवार को उनके पैतृक शहर नर्मदापुरम लाया गया, जहां भारी भीड़ ने नम आंखों से उन्हें विदा किया। जिला प्रशासन ने इस मामले में जांच समिति गठित करने की घोषणा की है। उम्मीद की जा रही है कि आने वाले दिनों में पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट और पुलिस जांच से इस रहस्य पर से पर्दा उठेगा।
समाप्ति — एक सवाल जो बाकी रह गया
क्या वास्तव में सौमिल की मौत केवल एक “स्वाभाविक” चिकित्सा कारण थी या इसके पीछे कोई और कहानी छिपी है? यह सवाल न केवल सौमिल के परिवार का है, बल्कि हर उस भारतीय अभिभावक का भी है जो अपने बच्चों को बेहतर भविष्य के लिए घर से दूर भेजता है।
