राजधानी भोपाल के जंबूरी मैदान में मंगलवार को आयोजित मध्यप्रदेश सरपंच महासम्मेलन ने प्रदेश की राजनीति और प्रशासनिक ढांचे में नई हलचल मचा दी। इस सम्मेलन में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का संबोधन उतना ही जोशभरा था जितना स्पष्ट और सख्त। उन्होंने सीधे-सीधे प्रशासनिक अधिकारियों और पंचायत व्यवस्था को संदेश देते हुए कहा — “अगर सचिव काम नहीं करेगा तो उसे हटा दिया जाएगा। सचिव-सहायक सचिव की क्या औकात? जो जनता के हित में काम नहीं करेगा, उसे पद पर रहने का कोई अधिकार नहीं।”

सरपंचों को मिली नई ताकत
डॉ. यादव ने अपने भाषण में कहा कि सरपंच ग्रामीण भारत की आत्मा हैं। उन्होंने कहा कि त्रिस्तरीय शासन प्रणाली में प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री जितने महत्वपूर्ण हैं, उतने ही महत्वपूर्ण गांव के सरपंच भी हैं। “एक सरपंच जो कर सकता है, वो बड़े-बड़े पदों पर बैठे लोग भी नहीं कर सकते,” उन्होंने कहा।
सीएम ने यह भी जोड़ा कि हर पंचायत के पास अपने गांव के हर घर का पूरा रिकॉर्ड होता है — यह प्रशासनिक ताकत का सबसे निचला और सबसे मजबूत स्तर है।
“सरपंचों की शिकायत हमारी जिम्मेदारी”
मुख्यमंत्री ने कहा कि अगर किसी सरपंच को किसी सरकारी निर्णय या अधिकारी के कारण कोई समस्या आती है, तो उसे हल करना सरकार की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा — “अगर कोई निर्णय जमीन पर उतरने में दिक्कत दे रहा है, तो सरकार खुद उसे ठीक करेगी। पंचायतों को किसी से डरने की जरूरत नहीं है।”
दिल्ली ब्लास्ट पीड़ितों को श्रद्धांजलि
मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम की शुरुआत दिल्ली ब्लास्ट में मारे गए निर्दोष लोगों को श्रद्धांजलि देकर की। उन्होंने दो मिनट का मौन रखवाया और कहा, “हम उन निर्दोष लोगों को नहीं भूल सकते जिन्होंने देश की प्रगति की राह में अपनी जान गंवाई। हमारे दुश्मन हमारी तरक्की से परेशान हैं, लेकिन हमें रुकना नहीं है।”
2026 होगा ‘कृषि वर्ष’
डॉ. मोहन यादव ने बड़ा ऐलान करते हुए कहा कि वर्ष 2026 को ‘कृषि वर्ष’ के रूप में मनाया जाएगा। उन्होंने कहा कि सरकार ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए कृषि आधारित उद्योगों और कुटीर उद्योगों को बढ़ावा देगी। सीएम ने कहा — “पंचायतों के माध्यम से हम लघु उद्योगों को जोड़कर एक नई आर्थिक क्रांति लाने जा रहे हैं।”
‘काम करो या पद छोड़ो’ — अफसरों के लिए सख्त संदेश
सीएम यादव का भाषण सिर्फ प्रेरणादायक नहीं था, बल्कि चेतावनी भरा भी था। उन्होंने कहा — “सचिव या सहायक सचिव अगर काम नहीं करेगा, तो उसे हटा दिया जाएगा। अब समय आ गया है जब ग्रामीण विकास सिर्फ कागजों में नहीं, धरातल पर दिखना चाहिए।”
उनका यह बयान प्रशासनिक तंत्र को यह स्पष्ट संकेत देता है कि अब भ्रष्टाचार और लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
गांवों की तकदीर सरपंचों के हाथ
मुख्यमंत्री ने कहा कि “प्रदेश की तस्वीर और तकदीर बदलने का काम सरपंचों के बिना संभव नहीं है। हर गांव की धड़कन पंचायत है और पंचायत का दिल सरपंच है।” उन्होंने सरपंचों से अपील की कि वे अपने गांवों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए नए विचारों पर काम करें।
प्रधानमंत्री मोदी और गृह मंत्री पर भरोसा जताया
मुख्यमंत्री ने कहा कि “इतने बड़े देश में प्रधानमंत्री मोदी ने 10 सालों में जो बदलाव किए हैं, वह ऐतिहासिक हैं। जब ‘लाल सलाम’ को आखिरी सलाम दिया जा रहा है, तब देश को भरोसा है कि आतंकी और माओवादी विचारधारा का अंत निश्चित है।”
कृषि आधारित उद्योगों की दिशा में कदम
डॉ. यादव ने कहा कि अब समय आ गया है कि कृषि सिर्फ फसल उगाने तक सीमित न रहे, बल्कि उससे जुड़ी प्रोसेसिंग यूनिट, फूड पार्क और डेयरी उद्योग गांवों में स्थापित हों। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार एक ऐसी नीति पर काम कर रही है, जिसमें हर पंचायत अपने स्तर पर रोजगार उत्पन्न कर सके।
सरपंचों को ‘ग्राम विकास का योद्धा’ बताया
मुख्यमंत्री ने सरपंचों को संबोधित करते हुए कहा — “आप सिर्फ जनप्रतिनिधि नहीं, बल्कि विकास के योद्धा हैं। आपके पास वो ताकत है जो किसी सचिव या कलेक्टर के पास नहीं। आपकी एक पहल एक गांव की दिशा बदल सकती है।”
पंचायतों में तकनीकी सुधार
सीएम ने कहा कि डिजिटल इंडिया की तर्ज पर अब ‘डिजिटल पंचायत’ का युग शुरू हो चुका है। हर पंचायत को ऑनलाइन कार्य प्रणाली से जोड़ा जाएगा, ताकि पारदर्शिता बढ़े और भ्रष्टाचार कम हो।
सम्मेलन के प्रमुख बिंदु:
- 2026 को कृषि वर्ष घोषित किया गया।
- पंचायतों में सचिवों की जवाबदेही तय करने की बात।
- सरपंचों को अधिक अधिकार और सम्मान देने का वादा।
- दिल्ली ब्लास्ट पीड़ितों के प्रति संवेदना।
- प्रधानमंत्री मोदी और गृह मंत्री के नेतृत्व पर भरोसा।
- कृषि आधारित उद्योगों को बढ़ावा देने की नीति पर जोर।
सम्मेलन का सार
यह महासम्मेलन सिर्फ एक सरकारी कार्यक्रम नहीं था — यह संदेश था कि मध्यप्रदेश अब अपने गांवों की शक्ति को पहचान चुका है। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने स्पष्ट किया कि “अब गांवों का विकास किसी योजना का हिस्सा नहीं, बल्कि प्रदेश की नीति का केंद्र होगा।”
