प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में बुधवार को हुई कैबिनेट बैठक भारत की आर्थिक नीति के इतिहास में एक बड़ा मोड़ साबित हो सकती है। सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक इस बैठक में सरकार ने कई बड़े और बहुप्रतीक्षित फैसलों को मंजूरी दी है। इन फैसलों का असर न केवल निर्यात (Export) पर पड़ेगा, बल्कि खनिज क्षेत्र (Mining), मैन्युफैक्चरिंग, रोजगार और पूंजी निवेश जैसे कई सेक्टरों पर दूरगामी प्रभाव डालेगा।

₹25,000 करोड़ का नया मिशन — बनेगा भारत का एक्सपोर्ट इंजन
भारत सरकार एक नया Export Promotion Mission (EPM) लॉन्च करने जा रही है, जिसकी अनुमानित लागत ₹25,000 करोड़ है। इस महत्वाकांक्षी मिशन का मकसद भारत को वैश्विक निर्यात बाजार में अग्रणी बनाना है।
मिशन के तहत दो प्रमुख योजनाएँ:
- Niryat Protsahan (निर्यात प्रोत्साहन योजना)
- इस स्कीम के तहत एक्सपोर्टर्स को ब्याज समानता (Interest Equalisation) के रूप में आर्थिक सहायता दी जाएगी।
- सरकार छोटे और मझोले एक्सपोर्टर्स (MSME) के लिए ₹5,000 करोड़ से अधिक की सब्सिडी देगी।
- इससे भारतीय एक्सपोर्टर्स को सस्ता फंड मिलेगा और वे ग्लोबल मार्केट में प्रतिस्पर्धा कर सकेंगे।
- ब्याज दरों में कमी से उनकी उत्पादन लागत घटेगी और मुनाफा बढ़ेगा।
- Niryat Disha (निर्यात दिशा योजना)
- इस योजना का लक्ष्य केवल फाइनेंस देना नहीं, बल्कि एक्सपोर्ट इकोसिस्टम को आधुनिक बनाना है।
- इसमें ब्रांडिंग, पैकेजिंग, ग्लोबल मार्केटिंग, वेयरहाउसिंग, लॉजिस्टिक्स सपोर्ट जैसी सुविधाएं शामिल हैं।
- इसका मकसद है कि भारत केवल “मेड इन इंडिया” उत्पाद बनाए ही नहीं, बल्कि उन्हें “ब्रांड इंडिया” के नाम से दुनिया भर में बेचे।
‘ब्रांड इंडिया’ की दिशा में निर्णायक कदम
सरकार का उद्देश्य है कि भारत अगले पांच वर्षों में अपने एक्सपोर्ट को $1 ट्रिलियन तक पहुंचाए। यह तभी संभव होगा जब छोटे और मध्यम उद्यमों को अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा में समान अवसर मिले। EPM के जरिए भारत “वैल्यू ऐडेड एक्सपोर्ट्स” की दिशा में बढ़ेगा — यानी अब केवल कच्चा माल नहीं, बल्कि ब्रांडेड और तैयार उत्पाद निर्यात किए जाएंगे।
खनिज नीति में बड़ा सुधार — रॉयल्टी दरों में कटौती
कैबिनेट ने Graphite, Caesium और Zirconium जैसे दुर्लभ खनिजों पर रॉयल्टी दर कम करने की मंजूरी भी दी है। ये खनिज भारत की नई औद्योगिक क्रांति के मूल में हैं — विशेष रूप से EV बैटरी, स्पेशल स्टील, स्पेस टेक्नोलॉजी, और डिफेंस सेक्टर में इनका व्यापक उपयोग होता है।
रॉयल्टी कटौती के फायदे:
- निजी निवेशकों के लिए खनन सस्ता होगा।
- उत्पादन लागत घटेगी और माइनिंग कंपनियों का मुनाफा बढ़ेगा।
- देश में “आत्मनिर्भर माइनिंग इकोसिस्टम” विकसित होगा।
- EV और रक्षा उद्योग को आवश्यक कच्चा माल सस्ते में मिलेगा।
इस सुधार के बाद भारत इन खनिजों के आयात पर निर्भरता कम करेगा, जो वर्तमान में चीन और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों से आता है।
IIFCL का IPO — इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश में नई ऊर्जा
एक और महत्वपूर्ण निर्णय में सरकार ने India Infrastructure Finance Company Ltd (IIFCL) के IPO को मंजूरी देने का संकेत दिया है। यह निर्णय देश की डिसइन्वेस्टमेंट नीति को गति देगा और इंफ्रास्ट्रक्चर क्षेत्र में नई पूंजी लाएगा।
क्यों खास है IIFCL का IPO?
- IIFCL हाईवे, एयरपोर्ट, पोर्ट, रेल कॉरिडोर जैसे मेगा प्रोजेक्ट्स को फंड करता है।
- IPO के ज़रिए जुटाई गई पूंजी से सरकार और निजी निवेश दोनों को लाभ मिलेगा।
- इससे “नेशनल इंफ्रास्ट्रक्चर पाइपलाइन (NIP)” जैसे मिशनों को रफ्तार मिलेगी।
- सरकार को डिसइन्वेस्टमेंट से राजस्व मिलेगा और निवेशकों को विश्वसनीय अवसर।
कृषि और MSME क्षेत्र को भी मिलेगा अप्रत्यक्ष लाभ
एक्सपोर्ट मिशन से कृषि उत्पादों के निर्यात में भी नई जान आएगी। भारत के चावल, मसाले, दालें, और ऑर्गेनिक उत्पाद अब बेहतर ब्रांडिंग और सप्लाई चेन के साथ विदेशी बाजारों तक पहुंचेंगे। MSME सेक्टर, जो भारत के कुल एक्सपोर्ट में लगभग 40% का योगदान देता है, को ब्याज सहायता और लॉजिस्टिक सपोर्ट से बड़ा प्रोत्साहन मिलेगा।
ग्लोबल परिप्रेक्ष्य — भारत बनाम चीन
दुनिया भर में भारत को अब चीन के विकल्प के रूप में देखा जा रहा है। भारत की उत्पादन क्षमता, स्थिर राजनीतिक व्यवस्था और किफायती श्रमबल इसे “मैन्युफैक्चरिंग हब” बना रहे हैं। EPM के जरिए भारत उस दिशा में निर्णायक कदम बढ़ा रहा है जहाँ “मेक इन इंडिया” से “सेल फ्रॉम इंडिया” की ओर परिवर्तन होगा।
कैबिनेट के अन्य संभावित फैसले
सूत्रों के अनुसार, कैबिनेट बैठक में निम्न प्रस्तावों पर भी चर्चा हुई:
- Green Hydrogen Policy 2.0 की रूपरेखा पर मंजूरी।
- Renewable Energy Transmission Network के लिए ₹10,000 करोड़ की अतिरिक्त सहायता।
- सेमीकंडक्टर मिशन के तहत नई कंपनियों को प्रोत्साहन पैकेज।
- Skill India 2.0 में निर्यात उन्मुख ट्रेनिंग मॉड्यूल।
निष्कर्ष — आत्मनिर्भर भारत का नया अध्याय
यह कैबिनेट बैठक सिर्फ नीतियों की घोषणा नहीं थी, बल्कि भारत की आर्थिक सोच का पुनर्परिभाषण थी। ₹25,000 करोड़ के EPM मिशन से लेकर IIFCL के IPO तक — हर निर्णय इस बात की ओर इशारा करता है कि भारत अब निवेश, उत्पादन और निर्यात — तीनों मोर्चों पर आत्मनिर्भर बनना चाहता है। यह भारत के आर्थिक पुनर्जागरण की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है। एक ऐसा कदम जो न केवल एक्सपोर्ट को बढ़ाएगा, बल्कि करोड़ों युवाओं को रोजगार के नए अवसर देगा।
