मनोरंजन की दुनिया चमकदार ज़रूर है, लेकिन इसके पीछे संघर्षों की अनगिनत कहानियाँ छिपी होती हैं। हर हंसी के पीछे दर्द का एक किस्सा होता है, और ऐसा ही एक प्रेरक किस्सा है भारत के सबसे प्यारे कॉमेडियन सुनील ग्रोवर का। ‘गुत्थी’, ‘डॉक्टर मशहूर गुलाटी’ और ‘रिंकू भाभी’ जैसे किरदारों से करोड़ों दिलों में जगह बनाने वाले सुनील ने अपने जीवन में उतने ही गहरे अंधेरे भी देखे हैं जितनी बड़ी रोशनी आज उनके करियर में चमक रही है।

कपिल शर्मा शो से पहले का दौर: जब उम्मीदें धुंधली हो चली थीं
आज भले ही सुनील ग्रोवर को हर घर में लोग जानते हैं, लेकिन कभी ऐसा भी समय था जब उनके पास काम नहीं था। वे एक ऐसे दौर से गुज़रे, जब न तो बड़े प्रोजेक्ट थे, न आर्थिक स्थिरता, और न ही आत्मविश्वास। कॉमेडियन उपासना सिंह, जिन्होंने ‘कपिल शर्मा शो’ में ‘बुआ’ का किरदार निभाया था, ने हाल ही में खुलासा किया कि कपिल के शो से पहले सुनील इतनी गहरी निराशा में थे कि उन्हें डिप्रेशन के कारण अस्पताल में भर्ती होना पड़ा था।
उपासना सिंह का खुलासा: “सुनील बेहद शांत, डरे हुए और खोए हुए थे”
लल्लनटॉप सिनेमा को दिए इंटरव्यू में उपासना ने बताया —
“जब सुनील ने शुरुआत की, वो बहुत धीरे बोलते थे। टीम को लगा कि वो बाकी कलाकारों के साथ तालमेल नहीं बैठा पा रहे। मेकर्स तो उन्हें निकालने तक का सोच चुके थे। लेकिन मैंने कहा, ‘उन्हें मत निकालिए, वो एक बहुत अच्छे एक्टर हैं।’”
उनके इन शब्दों ने शायद सुनील के करियर का सबसे अहम मोड़ तय कर दिया। धीरे-धीरे सुनील ने न केवल टीम का भरोसा जीता बल्कि दर्शकों के दिलों पर राज किया।
डिप्रेशन से अस्पताल तक: एक दर्दनाक मोड़
उपासना ने आगे बताया —
“जब कपिल का शो शुरू हुआ, तब सुनील की तबियत ठीक नहीं थी। उन्होंने बताया कि वो डिप्रेशन की वजह से अस्पताल में भर्ती हुए थे। उनके पास ज्यादा काम नहीं था, और वो अपने भविष्य को लेकर बेहद असमंजस में थे।”
यह बयान सुनकर एक बात साफ हो जाती है कि पर्दे के पीछे का जीवन कितना कठिन हो सकता है। लोगों को हंसाने वाले कलाकार कभी-कभी खुद अंदर से टूटे हुए होते हैं।
रेडियो से टीवी तक: संघर्ष की बुनियाद
कई लोग नहीं जानते कि सुनील ग्रोवर का सफर रेडियो से शुरू हुआ था। उन्होंने “हंसी के फव्वारे” जैसे रेडियो शोज़ में अपनी आवाज़ से लोगों को हंसाया। रेडियो पर सीखे हुए अनुभवों ने ही उन्हें ‘कॉमेडी नाइट्स विद कपिल’ जैसे मंच पर अपनी अलग पहचान दिलाई। उन्हें पता था कि दर्शक क्या सुनना चाहते हैं और कैसे हंसना चाहते हैं।
‘कॉमेडी नाइट्स विद कपिल’ ने दी नई उड़ान
2013 में जब ‘कॉमेडी नाइट्स विद कपिल’ आया, तब सुनील ने ‘गुत्थी’ बनकर लोगों के दिलों में घर कर लिया। उनके हाव-भाव, डायलॉग और मासूम चेहरे की कॉमिक टाइमिंग ने उन्हें देश के सबसे पसंदीदा कॉमेडियन बना दिया। फिर आया ‘डॉक्टर मशहूर गुलाटी’ — और सुनील बन गए ‘कॉमेडी का पर्याय’। लेकिन सफलता की ऊंचाइयों के बीच भी वो कभी अपने संघर्षों को नहीं भूले।
सुनील और कपिल का विवाद: करियर का कठिन मोड़
कपिल शर्मा और सुनील ग्रोवर के बीच 2017 में हुआ विवाद किसी से छिपा नहीं। शो छोड़ने के बाद बहुतों को लगा कि सुनील का करियर खत्म हो जाएगा। लेकिन सुनील ने अपनी मेहनत और सकारात्मक सोच से इसे भी अवसर में बदल दिया।
उन्होंने वेब सीरीज, फिल्मों और स्वतंत्र शो में काम किया। नेटफ्लिक्स के “कपिल शर्मा शो” में वापसी और “डब्बा कार्टेल” में उनका दमदार अभिनय इस बात का प्रमाण है कि एक सच्चा कलाकार कभी हार नहीं मानता।
डिप्रेशन से बाहर आने की प्रेरणा
आज सुनील ग्रोवर उन लाखों लोगों के लिए प्रेरणा हैं जो मानसिक स्वास्थ्य की समस्याओं से जूझ रहे हैं। उनकी कहानी बताती है कि सफलता हमेशा संघर्षों से होकर ही गुजरती है। उन्होंने अपने काम, आत्मविश्वास और दोस्तों के सहारे डिप्रेशन से बाहर निकलने का रास्ता बनाया।
फिल्मों और ओटीटी पर लगातार सक्रिय
‘डब्बा कार्टेल’, ‘भारत’, ‘पटाखा’, ‘तंदूर’, और कई वेब सीरीज में उन्होंने अपने अभिनय का जादू दिखाया। अब वो सिर्फ कॉमेडियन नहीं, बल्कि एक बहुमुखी कलाकार बन चुके हैं।
जीवन का सबक: दर्द को हंसी में बदलना ही असली कला
सुनील की कहानी इस बात का प्रतीक है कि हंसी के पीछे कितनी गहराई छिपी हो सकती है। आज जब वो किसी मंच पर हंसते हैं, तो उनके हर मुस्कुराहट में वो दर्द भी शामिल है जिसे उन्होंने कभी महसूस किया था।
समापन विचार
सुनील ग्रोवर की यह यात्रा सिर्फ एक कॉमेडियन की सफलता की नहीं, बल्कि एक इंसान की आत्म-जीत की कहानी है। वो हर उस व्यक्ति के लिए प्रेरणा हैं जो जीवन की कठिनाइयों से हार मानने वाला होता है। उनका संदेश साफ है —
“अंधेरे से डरो मत, वही रोशनी की असली कीमत सिखाता है।”
