नई दिल्ली के ऐतिहासिक लाल किले के पास हुए भीषण विस्फोट ने पूरे देश को झकझोर दिया है। सोमवार शाम को हुए इस आतंकी हमले में अब तक 13 लोगों की मौत हो चुकी है और कई गंभीर रूप से घायल हैं। धमाके की तीव्रता इतनी भयानक थी कि आसपास की इमारतों के शीशे टूट गए, गाड़ियाँ पलट गईं और चारों तरफ अफरातफरी मच गई। लेकिन इस त्रासदी के बीच भारत के लिए एक बड़ी राहत यह रही कि दुनिया के प्रमुख मुस्लिम देश — सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई), ईरान, कतर और मालदीव — सभी भारत के समर्थन में उतर आए।

यूएई ने हिंसा और आतंकवाद की कड़ी निंदा की
अबू धाबी स्थित यूएई विदेश मंत्रालय ने एक औपचारिक बयान जारी कर इस हमले की कड़ी निंदा की है। मंत्रालय ने कहा कि,
“संयुक्त अरब अमीरात हिंसा और आतंकवाद के हर रूप को अस्वीकार करता है। जो कोई भी सुरक्षा और स्थिरता को कमजोर करने की कोशिश करेगा, वह मानवता का दुश्मन है।”
यूएई ने भारत सरकार, मृतकों के परिवारों और घायलों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की। मंत्रालय ने घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना करते हुए कहा कि वह भारत के साथ खड़ा है।
सऊदी अरब का भावनात्मक संदेश: दोस्ती और मानवीय एकता का प्रतीक
रियाद में सऊदी विदेश मंत्रालय ने भी एक बयान में भारत के प्रति समर्थन व्यक्त किया।
“किंगडम ऑफ सऊदी अरब भारत सरकार और जनता के साथ इस कठिन समय में एकजुटता से खड़ा है। हम पीड़ित परिवारों के प्रति गहरी संवेदना प्रकट करते हैं और घायलों के जल्द स्वस्थ होने की प्रार्थना करते हैं।”
यह बयान सिर्फ एक औपचारिक प्रतिक्रिया नहीं था, बल्कि यह दिखाता है कि आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में भारत और अरब देश अब पहले से कहीं अधिक साझा दृष्टिकोण रख रहे हैं।
ईरान ने जताई गहरी संवेदना: “यह हमला मानवता पर हमला है”
नई दिल्ली स्थित ईरानी दूतावास ने भारत में हुए इस विस्फोट पर कहा कि,
“भारत के लाल किले के पास हुए विस्फोट में निर्दोष लोगों की जान जाना एक अमानवीय कृत्य है। ईरान इस दुखद घटना पर गहरा शोक व्यक्त करता है।”
ईरान ने कहा कि आतंकवाद की कोई जाति, धर्म या राष्ट्र नहीं होती और यह मानवता के खिलाफ एक वैश्विक चुनौती है। दूतावास ने सभी पीड़ित परिवारों को सांत्वना देते हुए भारत की सुरक्षा एजेंसियों के साहस की सराहना की।
कतर और मालदीव भी भारत के साथ
कतर के विदेश मंत्रालय ने इस हमले को “भयावह आतंकवादी कृत्य” बताते हुए भारत के साथ एकजुटता जताई।
वहीं मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू ने एक्स (पूर्व ट्विटर) पर लिखा:
“दिल्ली के लाल किले के पास हुए विस्फोट में हुई मौतें बेहद दुखद हैं। हमारी संवेदनाएँ भारत की जनता और सरकार के साथ हैं।”
उन्होंने कहा कि आतंकवाद किसी धर्म या भूगोल से नहीं, बल्कि अज्ञानता और नफरत से जन्म लेता है, और इसे केवल वैश्विक एकता से हराया जा सकता है।
भारत को मिल रहा वैश्विक समर्थन
दिल्ली धमाके के बाद न केवल खाड़ी देशों बल्कि इजरायल, फ्रांस, अमेरिका और जापान जैसे देशों ने भी भारत के साथ एकजुटता दिखाई।
अमेरिकी विदेश मंत्री ने कहा,
“भारत को हमारी मदद की जरूरत नहीं, भारतीय एजेंसियाँ बेहतरीन काम कर रही हैं।”
यह बयान भारत की वैश्विक प्रतिष्ठा और सुरक्षा क्षमता का प्रमाण है।
घटना की जांच और सुरक्षा एजेंसियों की कार्रवाई
जांच में पता चला है कि धमाके में इस्तेमाल की गई कार में विस्फोटक पदार्थ RDX और PETN का मिश्रण था।
डीएनए रिपोर्ट में यह भी पुष्टि हुई कि कार में मौजूद आतंकी डॉ. उमर था, जो पिछले कई महीनों से दिल्ली-एनसीआर में सक्रिय एक टेरर मॉड्यूल का हिस्सा था।
सुरक्षा एजेंसियाँ अब उसके नेटवर्क की जाँच कर रही हैं।
विश्व स्तर पर भारत की छवि: आतंकवाद के खिलाफ नेतृत्वकारी भूमिका
भारत लंबे समय से आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक नेतृत्वकारी भूमिका निभा रहा है।
संयुक्त राष्ट्र में भारत ने हमेशा कहा है कि —
“कोई भी देश तब तक सुरक्षित नहीं रह सकता जब तक आतंकवाद का कोई भी रूप दुनिया में जीवित है।”
लाल किले के पास हुए इस हमले ने दुनिया को फिर याद दिलाया कि आतंकवाद के खिलाफ एकजुट होकर काम करना अब समय की मांग है।
निष्कर्ष: त्रासदी में एकता की झलक
यह घटना दुखद है, लेकिन इसके बाद जो वैश्विक प्रतिक्रिया सामने आई, वह उम्मीद जगाती है। सऊदी अरब, यूएई, ईरान, कतर और मालदीव का भारत के साथ खड़ा होना इस बात का संकेत है कि अब धर्म या राजनीति से ऊपर उठकर मानवता के पक्ष में आवाज उठाने का समय आ गया है। भारत की यह लड़ाई सिर्फ उसकी नहीं, बल्कि पूरी दुनिया की है — क्योंकि आतंकवाद किसी का धर्म नहीं, केवल विनाश का प्रतीक है।
