चना मसूर खरीदी इस समय हरदा जिले के हजारों किसानों के लिए सिर्फ एक सरकारी प्रक्रिया नहीं, बल्कि उनकी सालभर की मेहनत का भरोसा बन चुकी है। खेतों में महीनों पसीना बहाने के बाद जब किसान अपनी उपज को समर्थन मूल्य पर बेच पाते हैं, तभी उनके घर की आर्थिक गाड़ी आगे बढ़ती है। इस बार हरदा जिले में चना मसूर खरीदी को लेकर प्रशासन ने स्पष्ट समयसीमा तय की है, जिससे किसानों को राहत मिली है। 28 मई तक समर्थन मूल्य पर उपार्जन जारी रहेगा और 18 मई तक स्लॉट बुकिंग की सुविधा दी गई है।

यह निर्णय ऐसे समय में आया है जब किसान खरीदी केंद्रों पर समय पर बिक्री, भुगतान और व्यवस्था को लेकर लगातार चिंतित रहते हैं। इस वर्ष 9011 किसानों ने पंजीयन कराया है और अब तक 20 करोड़ रुपये से अधिक की राशि का भुगतान भी किया जा चुका है। यह आंकड़ा केवल सरकारी उपलब्धि नहीं, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था में नकदी के प्रवाह का संकेत भी है।
किसानों के लिए क्यों अहम
रबी सीजन की फसलें किसानों के लिए आय का बड़ा आधार होती हैं। गेहूं के साथ चना और मसूर जैसी दलहनी फसलें मध्यप्रदेश के कई जिलों में मजबूत आर्थिक सहारा बनती हैं। हरदा भी उनमें से एक है, जहां किसान बड़ी संख्या में चना और मसूर की खेती करते हैं।
जब बाजार में निजी व्यापारियों द्वारा कम कीमत दी जाती है, तब समर्थन मूल्य पर सरकारी खरीदी किसानों के लिए सुरक्षा कवच बन जाती है। चना मसूर खरीदी इसी वजह से किसानों के लिए विशेष महत्व रखती है। इससे उन्हें उचित मूल्य मिलता है, बिचौलियों पर निर्भरता घटती है और अगले सीजन की तैयारी के लिए पूंजी उपलब्ध होती है।
28 मई तक जारी खरीदी
कृषि विभाग के निर्देशों के अनुसार विपणन वर्ष 2026-27 के लिए हरदा जिले में चना मसूर खरीदी 28 मई तक चलेगी। प्रशासन ने साफ किया है कि पंजीकृत किसान निर्धारित समय में अपनी उपज बेच सकते हैं। इससे उन किसानों को राहत मिली है जो मौसम, परिवहन या अन्य कारणों से समय पर केंद्र तक नहीं पहुंच पाए थे।
खरीदी अवधि बढ़ने से यह भी सुनिश्चित होगा कि अधिक से अधिक किसान समर्थन मूल्य का लाभ ले सकें। अक्सर अंतिम दिनों में केंद्रों पर भीड़ बढ़ जाती है, ऐसे में समयसीमा स्पष्ट होने से प्रबंधन बेहतर होता है और किसानों को अनावश्यक परेशानी कम झेलनी पड़ती है।
स्लॉट बुकिंग की अंतिम तिथि
चना मसूर खरीदी में इस बार स्लॉट बुकिंग व्यवस्था को विशेष रूप से लागू किया गया है। किसानों को 18 मई तक स्लॉट बुक करना होगा, ताकि केंद्रों पर भीड़ नियंत्रित रहे और उपार्जन व्यवस्थित ढंग से हो सके।
स्लॉट बुकिंग का उद्देश्य केवल समय प्रबंधन नहीं, बल्कि किसानों को लंबी कतारों और घंटों की प्रतीक्षा से बचाना भी है। पहले कई बार किसानों को ट्रैक्टर-ट्रॉली के साथ पूरे दिन केंद्रों पर इंतजार करना पड़ता था। अब डिजिटल व्यवस्था से यह प्रक्रिया अपेक्षाकृत सरल हुई है।
9011 किसानों का पंजीयन
हरदा जिले में इस वर्ष 9011 किसानों ने चना मसूर खरीदी के लिए पंजीयन कराया है। यह संख्या बताती है कि जिले में दलहनी फसलों का दायरा लगातार मजबूत हो रहा है। किसानों का सरकारी व्यवस्था पर भरोसा भी इस आंकड़े में दिखाई देता है।
विशेषज्ञ मानते हैं कि यदि खरीदी प्रक्रिया पारदर्शी और समयबद्ध हो, तो अगले वर्षों में यह संख्या और बढ़ सकती है। पंजीयन का मतलब केवल बिक्री नहीं, बल्कि यह संकेत भी है कि किसान समर्थन मूल्य व्यवस्था को अपने हित में उपयोग करना चाहते हैं।
20 करोड़ से अधिक भुगतान
अब तक किसानों को 20 करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान किया जा चुका है। यह भुगतान सीधे किसानों के खातों में पहुंच रहा है, जिससे पारदर्शिता बनी रहती है और भ्रष्टाचार की संभावना कम होती है।
ग्रामीण क्षेत्रों में यह राशि केवल व्यक्तिगत आय नहीं, बल्कि स्थानीय बाजार की गति भी तय करती है। जब किसान के खाते में पैसा आता है, तो वह बीज, खाद, कृषि उपकरण, बच्चों की पढ़ाई, घरेलू जरूरतों और सामाजिक दायित्वों पर खर्च करता है। इस तरह चना मसूर खरीदी पूरे ग्रामीण आर्थिक चक्र को गति देती है।
ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर असर
हरदा जैसे कृषि प्रधान जिले में खरीदी का सीधा असर बाजारों पर दिखाई देता है। मंडियों में गतिविधि बढ़ती है, परिवहन सेवाएं सक्रिय होती हैं, मजदूरों को काम मिलता है और छोटे व्यापारियों की बिक्री भी बढ़ती है।
चना मसूर खरीदी केवल खेत से मंडी तक की कहानी नहीं है। यह गांव की किराना दुकान से लेकर ट्रैक्टर मैकेनिक तक सभी को प्रभावित करती है। इसलिए समय पर भुगतान और सुचारु खरीदी को ग्रामीण विकास के बड़े संकेतक के रूप में भी देखा जाता है।
किसानों की मुख्य उम्मीदें
किसान चाहते हैं कि खरीदी केंद्रों पर तौल, गुणवत्ता जांच और भुगतान में पारदर्शिता बनी रहे। कई बार शिकायतें आती हैं कि नमी या गुणवत्ता के नाम पर उपज रोक दी जाती है या भुगतान में देरी होती है।
इस बार प्रशासन से अपेक्षा है कि ऐसी समस्याओं पर तुरंत कार्रवाई हो। किसान यह भी चाहते हैं कि केंद्रों पर पेयजल, छाया और बैठने जैसी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध हों, क्योंकि गर्मी के मौसम में घंटों इंतजार करना बेहद कठिन हो जाता है।
प्रशासन की जिम्मेदारी
खरीदी प्रक्रिया को सफल बनाने के लिए केवल घोषणा पर्याप्त नहीं होती। केंद्रों पर पर्याप्त कर्मचारियों की उपलब्धता, मशीनों की कार्यक्षमता, रिकॉर्ड की सटीकता और समय पर भुगतान जरूरी है।
यदि किसी किसान का स्लॉट छूट जाए या तकनीकी समस्या आए, तो उसे तत्काल समाधान मिलना चाहिए। प्रशासन की सक्रियता ही तय करती है कि चना मसूर खरीदी किसानों के लिए राहत बनेगी या परेशानी।
भविष्य की दिशा
विशेषज्ञ मानते हैं कि आने वाले वर्षों में दलहन उत्पादन को और बढ़ावा देना जरूरी होगा। चना और मसूर जैसी फसलें केवल किसानों की आय नहीं बढ़ातीं, बल्कि देश की पोषण और खाद्य सुरक्षा में भी बड़ी भूमिका निभाती हैं।
यदि समर्थन मूल्य, समय पर खरीदी और भुगतान की व्यवस्था मजबूत रहे, तो किसान इन फसलों की ओर और अधिक आकर्षित होंगे। हरदा का यह मॉडल दूसरे जिलों के लिए भी प्रेरक बन सकता है।
चना मसूर खरीदी का बड़ा संदेश
आज जब खेती लागत, मौसम और बाजार की अनिश्चितताओं से घिरी है, तब चना मसूर खरीदी जैसी योजनाएं किसानों को स्थिरता देती हैं। हरदा के 9011 किसानों के लिए यह केवल सरकारी प्रक्रिया नहीं, बल्कि विश्वास की डोर है।
28 मई तक जारी यह उपार्जन और 20 करोड़ से अधिक भुगतान इस बात का संकेत है कि यदि व्यवस्था सही हो, तो किसान और प्रशासन दोनों मिलकर बेहतर परिणाम दे सकते हैं। चना मसूर खरीदी आने वाले समय में सिर्फ आर्थिक राहत नहीं, बल्कि ग्रामीण समृद्धि की मजबूत नींव बन सकती है।
