देश की राजधानी में हाल ही में हुए लाल किला ब्लास्ट केस और उससे जुड़ी आतंकी साजिश की जांच में अब एक और बड़ा मोड़ सामने आया है। जांच एजेंसियों ने गुरुवार को अल-फलाह यूनिवर्सिटी (फरीदाबाद) की पार्किंग से एक संदिग्ध मारुति ब्रेज़ा कार बरामद की है, जो इस पूरे नेटवर्क में इस्तेमाल की गई चौथी गाड़ी बताई जा रही है। यह कार ब्लास्ट की मुख्य साजिश में अहम कड़ी मानी जा रही है। मौके पर तुरंत बम स्क्वॉड को बुलाया गया और पूरे परिसर को घेराबंदी में लेकर जांच शुरू की गई। यूनिवर्सिटी प्रशासन ने जांच में पूर्ण सहयोग देने की बात कही है, वहीं छात्रों में भय और दहशत का माहौल बना हुआ है।

जांच का अब तक का सिलसिला: चार गाड़ियां, कई ठिकाने, और एक गहरी साजिश
दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल और एनआईए की संयुक्त टीम अब तक चार गाड़ियों का पता लगा चुकी है, जो कथित तौर पर इस आतंकी नेटवर्क से जुड़ी हुई थीं। पहली कार लाजपत नगर से, दूसरी नोएडा सेक्टर 62 के पास एक खाली प्लॉट से, तीसरी गाजियाबाद के मोदीनगर इलाके से और अब चौथी अल-फलाह यूनिवर्सिटी फरीदाबाद की पार्किंग से बरामद की गई है। प्रत्येक गाड़ी में या तो एक्टिवेटर, वायर, डिटोनेटर या नकली नंबर प्लेट मिली हैं। यह साफ संकेत हैं कि नेटवर्क बहुत संगठित, तकनीकी रूप से प्रशिक्षित और सुनियोजित तरीके से काम कर रहा था।
यूनिवर्सिटी से क्यों जुड़ा नाम?
अल-फलाह यूनिवर्सिटी हरियाणा की एक प्रसिद्ध निजी शिक्षण संस्था है, जहाँ देशभर से छात्र पढ़ने आते हैं। जांच में यह बात सामने आई है कि गाड़ी फर्जी आईडी के माध्यम से यूनिवर्सिटी के गेट पास से अंदर लाई गई थी। सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि अपराधियों ने कैम्पस के शांत माहौल का फायदा उठाकर गाड़ी पार्क की थी, ताकि किसी को शक न हो। कुछ छात्रों और सुरक्षाकर्मियों से पूछताछ की गई है, जिन्होंने बताया कि यह वाहन कई दिनों से वहां खड़ी थी, लेकिन किसी ने ध्यान नहीं दिया।
बम स्क्वॉड की तत्परता और फोरेंसिक टीम की जांच
गुरुवार सुबह जैसे ही पुलिस को सूचना मिली कि यूनिवर्सिटी की पार्किंग में संदिग्ध गाड़ी खड़ी है, तुरंत मौके पर बम निरोधक दस्ता (Bomb Disposal Squad) पहुँच गया। पूरे क्षेत्र को खाली कराया गया और रोबोटिक आर्म और ड्रोन कैमरे से कार की तलाशी ली गई।
जांच के दौरान कार के डिक्की से कई इलेक्ट्रॉनिक सर्किट्स, वायरिंग, टाइमर और डमी पैकेट्स बरामद किए गए हैं। फोरेंसिक विशेषज्ञों का कहना है कि ये सभी सामग्री विस्फोटक तैयारी के लिए उपयोगी होती हैं। कार से मिले GPS ट्रैकर और मोबाइल सिग्नल रिकॉर्ड अब एनआईए की प्रयोगशाला भेजे गए हैं।
तकनीकी जांच से निकलेंगे बड़े नाम
एनआईए सूत्रों ने बताया है कि चारों कारों से प्राप्त डिजिटल डाटा, CCTV फुटेज और मोबाइल रिकॉर्ड की मदद से अब इस साजिश के ‘मास्टरमाइंड’ तक पहुंचने की कोशिश की जा रही है। माना जा रहा है कि ये नेटवर्क अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संचालित है, और इसके तार पाकिस्तान और दुबई तक जुड़े हो सकते हैं। साइबर टीम ने डार्क वेब पर भी कुछ संदिग्ध चैट ग्रुप्स की पहचान की है, जहाँ “ऑपरेशन लाल दुर्ग” नामक कोड का प्रयोग हुआ था।
जांच एजेंसियों की रणनीति
सुरक्षा एजेंसियों ने दिल्ली-एनसीआर के सभी टोल नाकों, पेट्रोल पंपों और पार्किंग स्थलों पर इंटेंसिव सर्विलांस बढ़ा दिया है। साथ ही, रेलवे स्टेशन और एयरपोर्ट पर भी फेस रिकग्निशन कैमरों की मदद से संदिग्धों की पहचान की जा रही है। एनआईए और आईबी की टीमें लगातार इनपुट्स साझा कर रही हैं। फरीदाबाद पुलिस ने यूनिवर्सिटी के CCTV सर्वर को जब्त कर लिया है ताकि यह पता लगाया जा सके कि गाड़ी कब, किसने, और किस रजिस्ट्रेशन नंबर से प्रवेश की थी।
छात्रों में डर, प्रशासन में सतर्कता
घटना के बाद अल-फलाह यूनिवर्सिटी में अफरा-तफरी मच गई। छात्रों को हॉस्टल में ही रहने की सलाह दी गई और कुछ कक्षाएं अस्थायी रूप से स्थगित कर दी गईं। कई छात्रों ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर कहा कि उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि उनके कैंपस में इस तरह की संदिग्ध गतिविधि हो सकती है। वहीं, यूनिवर्सिटी प्रशासन ने कहा —
“हम पूरी तरह जांच एजेंसियों के साथ हैं। कैंपस में सुरक्षा को और मज़बूत किया जा रहा है, और सभी वाहनों का डिजिटल एंट्री रिकॉर्ड तैयार किया जा रहा है।”
आतंक की नई रणनीति: शिक्षा संस्थानों के जरिए छिपाना
विशेषज्ञों का मानना है कि यह एक नई आतंकी रणनीति है, जिसमें अपराधी शिक्षण संस्थानों, धार्मिक स्थलों और भीड़भाड़ वाले शांत इलाकों का उपयोग कर रहे हैं ताकि संदेह न उठे। इस तरह की घटनाएं पहले भी बेंगलुरु और पुणे में सामने आ चुकी हैं, जहाँ पार्किंग स्थलों का दुरुपयोग कर नेटवर्क ने अपने निशान मिटाने की कोशिश की थी।
सरकार की प्रतिक्रिया
गृह मंत्रालय ने इस पूरे मामले पर दिल्ली पुलिस और एनआईए से विस्तृत रिपोर्ट तलब की है। गृह मंत्री ने कहा कि –
“देश की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। किसी भी कीमत पर आतंकी नेटवर्क को जड़ से उखाड़ फेंका जाएगा।”
दिल्ली और हरियाणा दोनों राज्यों में हाई अलर्ट जारी कर दिया गया है।
निष्कर्ष
इस घटना ने एक बार फिर यह स्पष्ट कर दिया है कि आतंकवादी संगठन अब नये-नये तरीकों से देश के भीतर अपनी गतिविधियां फैलाने की कोशिश कर रहे हैं। हालांकि, देश की सुरक्षा एजेंसियां पहले से अधिक सतर्क और तकनीकी रूप से सक्षम हैं। आने वाले दिनों में इस जांच से कई चौंकाने वाले नाम सामने आ सकते हैं, जो यह बताएंगे कि भारत के खिलाफ यह साजिश कितनी गहरी और संगठित थी।
