मध्य प्रदेश में सरकारी स्कूलों से जुड़ी कार्यप्रणाली को आधुनिक और पारदर्शी बनाने के उद्देश्य से “हमारे शिक्षक” मोबाइल एप को जुलाई 2025 से अनिवार्य रूप से लागू किया गया था। इसका मुख्य उद्देश्य शिक्षकों की वास्तविक उपस्थिति को डिजिटल रूप में दर्ज करना, स्कूलों में समयबद्ध गतिविधियों को सुनिश्चित करना और शिक्षा व्यवस्था को नए युग की तकनीकी मांगों के अनुरूप बनाना था।

हालांकि, इस व्यवस्था के लागू होने के कुछ महीनों बाद ही स्कूल शिक्षा विभाग ने पाया कि बड़ी संख्या में शिक्षक इस एप के माध्यम से उपस्थिति दर्ज कराने से बच रहे हैं। इसके लिए वे सबसे अधिक जिस कारण का सहारा लेते हैं, वह है—“नेटवर्क उपलब्ध नहीं था।” यह बहाना कुछ क्षेत्रों में वास्तविक हो सकता है, लेकिन विभाग का कहना है कि कई स्थानों पर यह सिर्फ अनुशासन से बचने की कोशिश है।
जुलाई से अक्टूबर तक की स्थिति देखने पर विभाग को पता चला कि लगभग 52% शिक्षक ही नियमित रूप से ऑनलाइन हाजिरी दर्ज कर रहे हैं, जबकि अतिथि शिक्षक 90% से अधिक अनुपालन कर रहे हैं। यह असमानता शिक्षा विभाग को चौंकाने वाली लगी, क्योंकि नियमित शिक्षकों से उच्च अपेक्षा रखी जाती है।
हाईकोर्ट के आदेश के बाद विभाग एक्शन में आया
स्कूल शिक्षा विभाग ने कई महीनों तक लचीला रवैया अपनाए रखा। नेटवर्क समस्या, ऐप की तकनीकी समस्याओं और अन्य बाधाओं को संज्ञान में लेकर शिक्षकों को समय दिया गया। लेकिन जब सूचीबद्ध शिकायतों की संख्या अधिक होने लगी और हाजिरी दर्ज न करने का बहाना बार-बार दोहराया जाने लगा, तब मामला मध्य प्रदेश हाईकोर्ट (जबलपुर) तक पहुंच गया।
हाईकोर्ट ने इस मामले पर कड़ा रुख अपनाते हुए विभाग से पूछा कि जब डिजिटल उपस्थिति अनिवार्य की जा चुकी है, तो इसे सभी शिक्षकों द्वारा सुनिश्चित क्यों नहीं कराया जा रहा? कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि सरकारी जिम्मेदारियों को निभाने में उदासीनता स्वीकार्य नहीं है।
कोर्ट के आदेश के बाद विभाग तुरंत सक्रिय हुआ और पूरे प्रदेश के जिला शिक्षा अधिकारियों को निर्देश जारी कर दिए गए।
मुख्य निर्देश इस प्रकार हैं —
- सभी शिक्षक प्रतिदिन “हमारे शिक्षक” एप से हाजिरी लगाएंगे।
- यदि कोणो शिक्षक ने एप से उपस्थिति दर्ज नहीं की है, तो उस दिन का वेतन रोका जाएगा।
- विकासखंड अधिकारी स्कूलों का निरीक्षण करेंगे और यह जांचेंगे कि नेटवर्क वास्तविक समस्या है या नहीं।
- तीन दिनों के भीतर प्रत्येक जिला अधिकारी को रिपोर्ट जमा करनी होगी।
- जहां भी नेटवर्क की समस्या वास्तविक है, वहां तुरंत तकनीकी सुधार कराए जाएंगे।
राज्य के चार लाख से अधिक शिक्षक प्रभावित
मध्य प्रदेश में लगभग चार लाख नियमित और अतिथि शिक्षक सरकारी स्कूलों में कार्यरत हैं। इन सभी के लिए डिजिटल उपस्थिति अब बाध्यकारी है।
आंकड़े बताते हैं—
- 52% नियमित शिक्षक ही एप से हाजिरी डाल रहे हैं
- 90%+ अतिथि शिक्षक ऐप से हाजिरी लगा रहे हैं
यह अंतर विभाग के लिए चिंता का विषय बना हुआ है।
विभाग का मानना है कि अतिथि शिक्षक नौकरी के प्रति अधिक सजग रहते हैं, क्योंकि उनकी नियुक्तियां अस्थायी हैं और निगरानी भी अधिक होती है। इसके विपरीत, नियमित शिक्षक स्थिरता के कारण प्रणाली का पालन करने में आनाकानी करते हैं।
नेटवर्क न होने की शिकायत—कितनी वास्तविक, कितनी बनाई हुई?
जिला विकासखंड अधिकारियों के अनुसार, कुछ स्कूल ऐसे हैं जहां नेटवर्क की समस्या वास्तव में मौजूद है। विशेषकर जंगल क्षेत्रों, पहाड़ी अंचलों और ग्रामीण इलाकों में कई बार मोबाइल कनेक्टिविटी कमजोर रहती है।
लेकिन जांच में यह भी पाया गया कि—
- कई शिक्षक स्कूल पहुंचने के बाद बाहर जाकर हाजिरी लगा देते हैं
- कुछ शिक्षक सिर्फ आदत के कारण डिजिटल हाजिरी से बचते हैं
- कुछ शिक्षक सुबह समय पर स्कूल नहीं पहुंचते, इसीलिए समय सीमा में हाजिरी नहीं लगा पाते
- कुछ मोबाइल पुराने हैं, जिनमें एप ठीक से नहीं चलता
विभाग ने स्पष्ट कर दिया है कि सभी तकनीकी व वास्तविक समस्याओं का समाधान किया जाएगा, लेकिन डिजिटल उपस्थिति से बचने का मंच अब नहीं मिलेगा।
“हमारे शिक्षक” ऐप क्या है और क्यों है जरूरी?
यह ऐप सरकारी स्कूलों में कार्यरत शिक्षकों की—
✔ उपस्थिति
✔ समय पर स्कूल पहुंचने
✔ कक्षा संचालन के समय
✔ निरीक्षण रिपोर्ट
✔ दिनभर की गतिविधियों
जैसी जानकारियों को रिकॉर्ड करता है।
इसकी वजह से—
- फर्जी उपस्थिति रुकती है
- शिक्षकों की नियमितता बढ़ती है
- स्कूल समय पर चालू होते हैं
- माता-पिता को भरोसा बनता है
- शिक्षा की गुणवत्ता ऊपर जाती है
सरकार की डिजिटल शिक्षा व्यवस्था की यह सबसे महत्वपूर्ण पहल है, इसलिए इसमें कोई ढिलाई स्वीकार नहीं की जाएगी।
वेतन कटौती का डर क्यों लगाया जा रहा है?
विभाग का कहना है कि कई बार बिना कड़ी कार्यवाही के कर्मचारी नियमों का पालन नहीं करते।
जैसे—
- ड्रेस कोड के निर्देश
- समय पर पहुंचने के आदेश
- छुट्टी के लिए उचित प्रोटोकॉल
इसी तरह डिजिटल हाजिरी को लेकर भी विभाग अब कठोर होना चाहता है।
वेतन रोकने की कार्रवाई क्यों प्रभावी मानी जाती है?
क्योंकि—
- इससे तुरंत जिम्मेदारी का एहसास होता है
- बहानेबाजी खत्म होती है
- कर्मचारियों में अनुशासन बढ़ता है
इसीलिए इस बार विभाग ने साफ कहा है— “इस महीने का वेतन ऑनलाइन उपस्थिति के आधार पर ही दिया जाएगा।”
विभागीय अधिकारियों का बयान
लोक शिक्षण संचालनालय के संचालक केके द्विवेदी ने कहा है— “हमारे शिक्षक एप पूरी तरह व्यवस्थित है। नेटवर्क समस्या वाले स्कूलों की सूची तीन दिनों में मांगी गई है। इस माह का वेतन ऑनलाइन उपस्थिति पर ही दिया जाएगा।”
जमीनी स्थिति की समीक्षा
विकासखंड स्तर पर शिक्षा अधिकारियों ने स्कूलों का निरीक्षण शुरू कर दिया है। कई स्कूलों की रिपोर्ट आ चुकी है—
- लगभग 30% क्षेत्रों में नेटवर्क समस्या वास्तविक है
- 45% क्षेत्रों में नेटवर्क उपलब्ध है लेकिन शिक्षक इसका बहाना बना रहे हैं
- 25% मामलों में शिक्षक मोबाइल अपडेट न होने या पुराना मोबाइल होने की बात कह रहे हैं
विभाग ने कहा है कि यदि शिक्षक का मोबाइल पुराना है तो वे स्वयं उसे अपडेट करें, क्योंकि यह व्यक्तिगत साधन है, सरकारी उपकरण नहीं।
किसानों, विद्यार्थियों और समाज पर इसका प्रभाव
सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की उपस्थिति सीधे प्रभावित करती है—
- छात्रों की पढ़ाई
- परीक्षा परिणाम
- स्कूलों की छवि
- ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा की गुणवत्ता
डिजिटल उपस्थिति लागू होने से—
✔ समय पर कक्षा शुरू होगी
✔ अनुशासन बढ़ेगा
✔ बच्चों को अधिक समय पढ़ाई मिलेगी
✔ स्कूलों में बेहतर माहौल बनेगा
निष्कर्ष
सरकार की इस डिजिटल पहल को अब किसी भी स्थिति में रोका नहीं जा सकता। कोर्ट के आदेश के बाद यह और अधिक बाध्यकारी हो गया है। अब चाहे नेटवर्क की सुधार हो, तकनीकी समाधान मिले या शिक्षक स्वयं अपडेट हों— लेकिन हाजिरी अब सिर्फ ऑनलाइन ही स्वीकार की जाएगी।
यह कदम मध्य प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था को नई दिशा देने वाला साबित हो सकता है, बशर्ते सभी शिक्षक इसे सकारात्मक रूप से अपनाएं और अपने कार्य के प्रति अधिक ईमानदारी दिखाएं।
