मध्यप्रदेश के छिंदवाड़ा जिले के पांढुर्णा क्षेत्र में पिछले कुछ दिनों से एक अजीब और चिंताजनक हालात बने हुए हैं। ग्राम उमरीकला और हिवरा पृथ्वीराम में चार से पाँच दिनों के भीतर अचानक मवेशियों की मौतों की श्रृंखला शुरू होने से पूरे इलाके में डर और दहशत का माहौल फैल गया है। अब तक कुल 15 जानवरों की मौत हो चुकी है, जिनमें अधिकांश गाय और बैल हैं। इन जानवरों में अचानक तेज़ पेट फूलने, बेचैनी, भूख समाप्त होने और कुछ ही घंटों में गिरकर दम तोड़ देने जैसे लक्षण देखे गए।

इस घटना ने गंभीर रूप तब लिया जब पता चला कि इन मवेशियों के दूध का सेवन करने वाले पाँच लोग—जिनमें दो बच्चे और तीन वयस्क शामिल हैं—अचानक बीमार पड़ गए। ग्रामीणों ने इसकी सूचना जब प्रशासन को दी, तब कलेक्टर नीरज वशिष्ठ ने तुरंत संज्ञान लिया और स्वास्थ्य व पशु चिकित्सा विभागों को तत्काल गांव भेजने के निर्देश दिए।
ग्राम में दहशत और अनिश्चितता की स्थिति
गांव के लोगों के अनुसार, मवेशियों में बीमारी की शुरुआत बिल्कुल सामान्य तरीके से दिखी थी।
कुछ पशुओं ने अचानक खाना पीना छोड़ दिया, कुछ का पेट असामान्य रूप से तेज़ी से फूलने लगा।
ग्रामीणों ने शुरुआत में इसे सामान्य गैस या अपच समझा, लेकिन जब एक के बाद एक पशुओं की मौत होने लगी, तब लोगों के होश उड़ गए।
ग्राम उमरीकला के बुजुर्ग किसान रामनारायण कहते हैं—
“हमने पहले कभी ऐसा नहीं देखा। सुबह तक जो गाय चर रही थी, वही शाम को बेदम पड़ी मिली। ऐसा लगता है जैसे कोई अज्ञात बीमारी फैल रही हो।”
गांव की महिलाओं के बीच भी भय का माहौल है क्योंकि कई परिवार अपने जीवन-यापन के लिए पूर्णतः गाय–भैंसों के दूध पर निर्भर हैं।
संक्रमित दूध से पाँच लोग बीमार
पशु चिकित्सकों के प्राथमिक निरीक्षण में यह सामने आया कि मृत पशुओं में पाए गए बैक्टीरिया ग्राम-पॉजिटिव वर्गाकार प्रकृति के हैं, जो सामान्यतः पशुओं में संक्रमण फैलाते हैं।
हालांकि यह बैक्टीरिया मनुष्यों में कैसे पहुँचा, इसकी विस्तृत जांच अभी जारी है।
बीमार हुए लोगों में हल्का बुखार, कमजोरी, पेट दर्द और उल्टी जैसे लक्षण देखे गए हैं।
सभी पाँच लोगों को जिला अस्पताल ले जाकर आइसोलेशन वार्ड में निगरानी में रखा गया है।
डॉक्टरों का कहना है कि उनकी स्थिति फिलहाल स्थिर है और चिंता की कोई बात नहीं है, परंतु सावधानी बरतना आवश्यक है।
प्रशासन हरकत में आया, 30 लोगों के रक्त नमूने भोपाल भेजे
कलेक्टर नीरज वशिष्ठ ने मामले की गंभीरता को देखते हुए पशु चिकित्सा विभाग को फटकार लगाई और तत्काल गांव में टीम भेजने का निर्देश दिया।
बीएमओ डॉ. दीपेंद्र सलामे, स्वास्थ्य टीम व पशु चिकित्सकों की संयुक्त टीम सुबह ही गांव पहुँची और हालात का जायजा लिया।
टीम ने गाँव में सर्वे करते हुए:
- मृत पशुओं का पोस्टमार्टम कराया
- जीवित पशुओं के स्वास्थ्य परीक्षण किए
- प्रभावित परिवारों से बात की
- दूध के नमूने एकत्र किए
- ग्रामीणों को सतर्कता के निर्देश दिए
इसके साथ ही, मृत जानवरों के संपर्क में आने वाले लगभग 30 लोगों के रक्त नमूने लेकर उन्हें उन्नत जांच के लिए भोपाल भेजा गया है।
कलेक्टर ने कहा: “स्थिति नियंत्रण में है”
कलेक्टर वशिष्ठ ने मीडिया से बातचीत में कहा—
“हमारी टीम तेजी से काम कर रही है। स्थिति नियंत्रण में है। किसी भी तरह की अफवाहों पर ध्यान न दें। परीक्षण रिपोर्ट आने के बाद हम और स्पष्ट रूप से बता पाएंगे कि बीमारी कैसे फैली।”
प्रशासन ने ग्राम पंचायतों को साफ–सफाई पर विशेष ध्यान देने के लिए निर्देशित किया है।
इसके अलावा ग्रामीणों से कहा गया है कि फिलहाल किसी भी जानवर का कच्चा दूध न पिएँ, न बेचें।
पशु चिकित्सकों के अनुसार संभावित कारण
पशु विभाग के विशेषज्ञों ने कुछ संभावित कारण बताए हैं:
- बैक्टीरियल संक्रमण – जो जानवरों में तेजी से फैल सकता है
- चारे में किसी जहरीले तत्व की मौजूदगी
- जल स्रोत में संदूषण
- क्लोस्ट्रीडियम संक्रमण, जिसमें अचानक पेट फूलना सामान्य लक्षण है
- फूड पॉइजनिंग या बासी चारे का उपयोग
हालांकि अंतिम पुष्टि जांच रिपोर्ट आने के बाद ही हो पाएगी।
गांवों में जागरूकता अभियान शुरू
पशु चिकित्सकों ने ग्रामीणों को सलाह दी है कि वे:
- दूध को हमेशा उबालकर ही पिएँ
- बीमार पशु के संपर्क से दूर रहें
- अचानक बीमार पड़ने पर तुरंत डॉक्टर को बुलाएँ
- मृत पशु को खुला न छोड़ें
- गांव में घूम रहे आवारा जानवरों को नियंत्रित करें
टीम ने कई घरों में जाकर मवेशियों की जांच की और दवाइयाँ दीं।
ग्रामीणों की समस्याएँ—आर्थिक बोझ और डर
किसानों के लिए मवेशियों की मौत सिर्फ भावनात्मक क्षति नहीं बल्कि आर्थिक विपदा भी है।
कई परिवारों की रोज़मर्रा की आय दूध पर निर्भर है।
15 मवेशियों की मौत से करोड़ों का नुकसान अनुमानित है।
ग्राम हिवरा के किसान धर्मवीर बताते हैं—
“एक गाय पालने में सालों की मेहनत लगती है। उसकी मौत हमारे परिवार की रोज़ी-रोटी पर सीधा असर डालती है।”
आगे क्या?
जाँच रिपोर्ट आने के बाद प्रशासन आगे की कार्यवाही करेगा और यदि किसी प्रकार का ज़ूनोटिक (जानवर से मानव में संक्रमण) खतरा सामने आता है, तो बड़े स्तर पर स्वास्थ्य प्रोटोकॉल लागू किया जा सकता है।
फिलहाल स्थिति नियंत्रण में बताई जा रही है, लेकिन ग्रामीणों का डर कम नहीं हुआ है।
