आधुनिक तकनीक और स्वास्थ्य सेवाओं के मेल से फिजियोथेरेपी के क्षेत्र में एक नई क्रांति शुरू हो गई है। भोपाल के जाने-माने फिजियोथेरेपिस्ट आनंद सिंह ने अपने स्टार्टअप रिमोट फिजियो के माध्यम से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) तकनीक से युक्त एक ऐसी डिवाइस विकसित की है, जिससे मरीज घर बैठे ही फिजियोथेरेपी करवा सकते हैं।
इस नई डिवाइस का सार्वजनिक प्रदर्शन इंदौर के ब्रिलियंट कन्वेंशन सेंटर में आयोजित एमपी टेक ग्रोथ कांक्लेव-2 में किया गया। इस आयोजन में राज्यभर के तकनीकी विशेषज्ञ और चिकित्सा पेशेवर उपस्थित थे। डिवाइस की खासियत यह है कि यह एआई आधारित तकनीक के सहारे मरीज के लिए उपयुक्त एक्सरसाइज और उपचार की प्रक्रिया स्वतः निर्धारित कर देती है।

तकनीकी विवरण और उपयोग
इस डिवाइस में चार प्रमुख यूनिट शामिल हैं:
- दर्द राहत यूनिट (Pain Relief Unit) – माइक्रो करंट का उपयोग कर जोड़ों और मांसपेशियों के दर्द को कम करती है।
- मसल रिपेयर यूनिट (Muscle Repair Unit) – मांसपेशियों की मरम्मत और थकान को कम करने में सहायक।
- पेल्विक स्ट्रेंथ यूनिट (Pelvic Strength Unit) – कड़क या टाइट मांसपेशियों को रिलैक्स कर सामान्य स्थिति में लाती है।
- ईएमजी यूनिट (EMG Unit) – मांसपेशियों की ताकत मापने और उपचार प्रगति का डेटा संकलित करने में मदद करती है।
आनंद सिंह ने बताया कि इस डिवाइस का प्रयोग अब तक 150 से अधिक फिजियोथेरेपिस्ट कर रहे हैं और यह विशेष रूप से सर्जरी के बाद के मरीजों, लकवाग्रस्त लोगों और मांसपेशियों के दर्द से पीड़ित व्यक्तियों के लिए लाभकारी है।
ग्रामीण और बुजुर्गों के लिए वरदान
यह तकनीक खासकर ग्रामीण क्षेत्रों और उन लोगों के लिए वरदान साबित होगी, जो क्लीनिक जाकर नियमित फिजियोथेरेपी नहीं कर सकते। नौकरीपेशा लोग भी घर बैठे ही इस सुविधा का लाभ उठा सकते हैं। पारंपरिक फिजियोथेरेपी की तुलना में यह तरीका लगभग 70 प्रतिशत सस्ता है और डाक्टर एक दिन में अधिक मरीजों को देख सकते हैं।
तकनीकी सहयोग और वित्तीय सहायता
इस डिवाइस को विकसित करने में IIT मंडी और बिरला प्रौद्योगिकी एवं विज्ञान संस्थान ने वित्तीय और तकनीकी सहयोग प्रदान किया। यह पहल स्वास्थ्य और तकनीक के मेल का उत्कृष्ट उदाहरण है, जिससे मरीजों को बेहतर और किफायती उपचार मिल रहा है।
डिवाइस के लाभ और कार्यप्रणाली
- घर बैठे ही फिजियोथेरेपी कर सकना।
- समय और पैसों की बचत।
- मांसपेशियों और जोड़ों के दर्द में तेजी से राहत।
- सर्जरी या चोट के बाद रिकवरी में मदद।
- बुजुर्गों और असमर्थ लोगों के लिए आसान उपयोग।
- ईएमजी यूनिट से प्रगति पर निगरानी।
आनंद सिंह ने बताया कि मरीज को केवल डिवाइस से जुड़े ऐप पर लॉगिन करना होगा और फिजियोथेरेपिस्ट ऑनलाइन मार्गदर्शन देंगे। मरीज के प्रदर्शन के आधार पर AI यूनिट खुद एक्सरसाइज और उपचार की प्रक्रिया निर्धारित करेगी।
भविष्य की संभावनाएँ
विशेषज्ञों का कहना है कि यह तकनीक भारत में स्वास्थ्य सेवाओं के डिजिटलीकरण में एक बड़ा कदम है। इससे दूरदराज के क्षेत्रों में चिकित्सा सेवाओं की पहुँच बढ़ेगी और मरीजों का समय और खर्च दोनों बचेंगे।
आने वाले समय में आनंद सिंह का लक्ष्य है कि राज्यभर में 500+ क्लिनिकल सेंटर और 2000+ घरों तक यह डिवाइस पहुँचाई जाए, जिससे ज्यादा से ज्यादा मरीज लाभान्वित हों।
