हरदा में इस बार दिसंबर की ठंड एक नई गर्मजोशी लेकर आने वाली है। डॉ. भीमराव अंबेडकर — भारत के संविधान निर्माता, समाज सुधारक और मानवता के महान प्रतीक — के महापरिनिर्वाण दिवस (6 दिसंबर) को लेकर जिले में तैयारियाँ जोरों पर हैं। हरदा की गलियों से लेकर सामाजिक संस्थाओं तक, हर कोई इस दिन को एकता, समानता और मानवाधिकारों के उत्सव के रूप में मनाने की तैयारी में जुटा है।

रविदास मंदिर में हुई ऐतिहासिक बैठक
रविवार शाम हरदा स्थित संत शिरोमणि रविदास मंदिर में अनुसूचित जाति और जनजाति के सभी प्रमुख सामाजिक संगठनों की एक महत्वपूर्ण बैठक हुई। बैठक में समाज के कई प्रतिनिधियों, शिक्षकों, युवाओं और वरिष्ठ नागरिकों ने भाग लिया। सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि 6 दिसंबर को डॉ. अंबेडकर महापरिनिर्वाण दिवस इस बार जिले में अब तक का सबसे भव्य कार्यक्रम होगा।
महापरिनिर्वाण दिवस क्यों विशेष है
डॉ. अंबेडकर का महापरिनिर्वाण दिवस सिर्फ एक स्मृति दिवस नहीं, बल्कि यह विचार और जागरूकता का दिन है। यह दिन हमें याद दिलाता है कि अंबेडकर ने अपने जीवन में समाज के वंचित, शोषित और दलित वर्गों के लिए क्या-क्या संघर्ष किए। उनकी सोच, समानता का सिद्धांत और शिक्षा पर बल आज भी हर वर्ग को दिशा देता है।
6 दिसंबर 1956 को अंबेडकर ने इस दुनिया को अलविदा कहा था, लेकिन उनके विचार आज भी हर नागरिक के मन में जीवित हैं। इस दिन को श्रद्धांजलि देने के लिए देशभर में कार्यक्रम होते हैं, और हरदा का यह आयोजन इस बार विशेष होने वाला है।
कार्यक्रम की रूपरेखा
बैठक में तय किया गया कि इस वर्ष का आयोजन कई चरणों में होगा —
- भव्य प्रभात फेरी – सुबह शहर भर में रैली निकाली जाएगी, जिसमें बच्चे, महिलाएं और युवजन शामिल होंगे।
- सामूहिक पुष्पांजलि समारोह – डॉ. अंबेडकर की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित किए जाएंगे।
- संविधान संकल्प सभा – युवाओं को संविधान की प्रस्तावना पढ़वाकर राष्ट्रनिष्ठा और समानता की शपथ दिलाई जाएगी।
- सांस्कृतिक कार्यक्रम – नाटक, गीत, कविता और भाषणों के माध्यम से बाबा साहेब के जीवन दर्शन को प्रस्तुत किया जाएगा।
- प्रेरक भाषण सत्र – शिक्षाविद, समाजसेवी और प्रशासनिक अधिकारी अंबेडकर के विचारों पर अपने विचार साझा करेंगे।
एकता का प्रतीक बन रहा हरदा
हरदा का यह आयोजन केवल अनुसूचित जाति या जनजाति समुदाय तक सीमित नहीं है। विभिन्न सामाजिक और धार्मिक संगठनों ने भी इसमें भाग लेने की इच्छा जताई है। नगर के युवा क्लब, महिला मंडल, छात्र संगठन और स्थानीय विद्यालयों ने भी सहयोग की घोषणा की है।
इससे यह स्पष्ट है कि अंबेडकर का संदेश केवल एक वर्ग के लिए नहीं, बल्कि पूरे समाज के लिए प्रेरणा बन चुका है। उनकी विचारधारा – “शिक्षित बनो, संगठित रहो, संघर्ष करो” – आज हर नागरिक की पहचान बन गई है।
डॉ. अंबेडकर के विचार आज भी प्रासंगिक
डॉ. अंबेडकर का जीवन संघर्षों से भरा रहा। उन्होंने समाज में समानता और शिक्षा की मशाल जलाई। उन्होंने सिखाया कि किसी समाज की प्रगति उसकी शिक्षा और न्याय व्यवस्था पर निर्भर करती है।
उनकी सोच आज भी हमें कई क्षेत्रों में मार्गदर्शन देती है —
- महिला सशक्तिकरण
- समानता और सामाजिक न्याय
- संविधान की मूल भावना – ‘हम भारत के लोग’
- धर्मनिरपेक्षता और मानवाधिकारों की रक्षा
हरदा के आयोजन का मुख्य उद्देश्य यही है कि समाज को एक बार फिर अंबेडकर के सिद्धांतों की याद दिलाई जाए और युवाओं को उनके आदर्शों से जोड़ा जाए।
बच्चों और युवाओं के लिए विशेष कार्यक्रम
आयोजक समिति ने निर्णय लिया है कि स्कूलों और कॉलेजों में निबंध प्रतियोगिता, चित्रकला प्रदर्शनी और वाद-विवाद प्रतियोगिता आयोजित की जाएंगी। विषय होंगे —
- “डॉ. अंबेडकर और आधुनिक भारत”
- “समानता का अधिकार और संविधान”
- “जातिवाद मुक्त समाज – एक सपना”
इन प्रतियोगिताओं का उद्देश्य है कि नई पीढ़ी सिर्फ अंबेडकर का नाम न जाने, बल्कि उनकी विचारधारा को आत्मसात करे।
श्रद्धांजलि से अधिक – एक जागरण का अवसर
आयोजकों ने कहा कि यह कार्यक्रम केवल श्रद्धांजलि सभा नहीं, बल्कि सामाजिक जागरण का अवसर है। डॉ. अंबेडकर ने जो मार्ग दिखाया, उस पर चलना ही सच्ची श्रद्धांजलि होगी। इस बार आयोजन में “संविधान सम्मान यात्रा” भी निकाली जाएगी, जिसमें लोग संविधान की प्रति लेकर चलेंगे और नागरिक अधिकारों के प्रति जनजागरण करेंगे।
प्रशासन और पुलिस का सहयोग
कार्यक्रम के सुचारू संचालन के लिए जिला प्रशासन और पुलिस विभाग ने भी पूरा सहयोग देने की सहमति दी है। सुरक्षा व्यवस्था, ट्रैफिक प्रबंधन और स्थल व्यवस्था की जिम्मेदारी प्रशासन ने अपने हाथ में ली है।
राष्ट्रीय एकता का संदेश
हरदा का यह आयोजन न केवल स्थानीय महत्व का है, बल्कि यह राष्ट्रीय एकता का प्रतीक भी है। डॉ. अंबेडकर का जीवन हमें यह सिखाता है कि जाति, धर्म और भाषा की सीमाओं से ऊपर उठकर केवल मानवता को अपनाया जाए। यही कारण है कि आयोजन में “हम सब भारतवासी – एक विचार, एक दिशा” का नारा दिया गया है।
निष्कर्ष
डॉ. अंबेडकर का महापरिनिर्वाण दिवस केवल इतिहास की याद नहीं, बल्कि भविष्य की दिशा तय करने का दिन है। हरदा की यह तैयारी दिखाती है कि बाबा साहेब की विचारधारा आज भी समाज के दिलों में जीवित है। हर मोमबत्ती, हर पुष्प, हर गीत इस बात का प्रमाण होगा कि अंबेडकर केवल एक व्यक्ति नहीं, बल्कि एक विचारधारा हैं – जो कभी नहीं मिटेगी।
