दुनिया की सबसे ताकतवर और मूल्यवान टेक कंपनियों में शुमार ऐपल एक बार फिर सुर्खियों में है, लेकिन इस बार वजह उसके नए प्रोडक्ट या बिक्री के आंकड़े नहीं हैं। भारत में कंपनी पर एंटीट्रस्ट नियमों के उल्लंघन को लेकर गंभीर सवाल उठे हैं और हालात ऐसे बन गए हैं कि उस पर अब तक के सबसे बड़े जुर्मानों में से एक लग सकता है। यह मामला केवल एक कानूनी विवाद नहीं है, बल्कि भारत में डिजिटल बाजार की स्वतंत्रता, प्रतिस्पर्धा और उपभोक्ता अधिकारों से जुड़ा हुआ है।

भारत जैसे विशाल और तेजी से बढ़ते डिजिटल बाजार में ऐपल की मौजूदगी लगातार मजबूत हुई है। iPhone, iPad और Mac जैसे प्रीमियम प्रोडक्ट्स के साथ-साथ ऐप स्टोर के जरिए कंपनी करोड़ों यूजर्स और डेवलपर्स को जोड़ती है। लेकिन यही ताकत अब उसके लिए परेशानी का कारण बनती दिख रही है।
एंटीट्रस्ट जांच और सरकार की सख्ती
भारत में प्रतिस्पर्धा से जुड़े नियमों का पालन सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी प्रतिस्पर्धा आयोग की होती है। इसी संस्था ने ऐपल के खिलाफ जांच शुरू की थी, जिसमें यह सामने आया कि कंपनी अपने ऐप स्टोर प्लेटफॉर्म पर अपनी मजबूत स्थिति का दुरुपयोग कर रही है। जांच में यह देखा गया कि iOS इकोसिस्टम में ऐप डेवलपर्स को ऐप स्टोर के नियमों का पालन करने के लिए मजबूर किया जाता है और वैकल्पिक भुगतान प्रणालियों या ऐप वितरण के अन्य रास्तों को सीमित किया जाता है।
सरकारी स्तर पर यह माना गया कि इस तरह की पॉलिसी से प्रतिस्पर्धा प्रभावित होती है और छोटे डेवलपर्स को नुकसान पहुंचता है। यही वजह है कि ऐपल से बार-बार जवाब मांगे गए और वित्तीय जानकारी उपलब्ध कराने को कहा गया, ताकि संभावित जुर्माने का आकलन किया जा सके।
आखिरी चेतावनी और बढ़ता दबाव
मामले से जुड़े दस्तावेजों से यह संकेत मिला है कि सरकार की ओर से कंपनी को आखिरी चेतावनी दी गई है। आरोप है कि ऐपल पिछले एक साल से ज्यादा समय से जांच में पूरा सहयोग नहीं कर रही है और बार-बार समय मांगकर प्रक्रिया को लंबा खींच रही है। अधिकारियों का मानना है कि यह रवैया जांच में बाधा डालने जैसा है।
अक्टूबर 2024 में कंपनी से साफ तौर पर कहा गया था कि वह जांच के नतीजों पर अपनी आपत्तियां दर्ज करे और जुर्माने के आकलन के लिए जरूरी वित्तीय आंकड़े दे। इसके बावजूद, ऐपल की ओर से अपेक्षित जानकारी समय पर उपलब्ध नहीं कराई गई।
38 अरब डॉलर का संभावित जुर्माना क्यों अहम है
अगर जुर्माने की गणना कंपनी के वैश्विक टर्नओवर के आधार पर की जाती है, तो यह रकम 38 अरब डॉलर तक पहुंच सकती है। भारतीय मुद्रा में यह आंकड़ा लगभग ₹34,33,69,90,00,000 बैठता है, जो किसी भी टेक कंपनी के लिए बेहद बड़ा झटका होगा।
यह राशि केवल आर्थिक दंड नहीं है, बल्कि यह एक कड़ा संदेश भी है कि भारत में काम करने वाली वैश्विक कंपनियों को स्थानीय कानूनों और प्रतिस्पर्धा नियमों का पूरी तरह पालन करना होगा। इस तरह का जुर्माना ऐपल की वैश्विक रणनीति और निवेश योजनाओं को भी प्रभावित कर सकता है।
ऐप स्टोर मॉडल पर उठे सवाल
जांच का केंद्र बिंदु ऐपल का ऐप स्टोर मॉडल रहा है। iOS प्लेटफॉर्म पर ऐप डाउनलोड करने का एकमात्र आधिकारिक जरिया ऐप स्टोर है और सभी डेवलपर्स को उसी के जरिए यूजर्स तक पहुंचना पड़ता है। इसके बदले ऐपल कमीशन लेती है, जिसे लेकर लंबे समय से विवाद रहा है।
भारत में जांच के दौरान यह सवाल उठा कि क्या यह मॉडल प्रतिस्पर्धा को सीमित करता है और डेवलपर्स के लिए अनुचित शर्तें तय करता है। आयोग का मानना है कि कंपनी ने अपनी प्रभुत्व वाली स्थिति का फायदा उठाकर बाजार को नियंत्रित करने की कोशिश की।
कोर्ट में चल रही कानूनी लड़ाई
यह मामला फिलहाल अदालत में विचाराधीन है। कंपनी ने जुर्माने से जुड़े नियमों को चुनौती दी है और यह तर्क दिया है कि वैश्विक टर्नओवर के आधार पर जुर्माना तय करना उचित नहीं है। इसके साथ ही, ऐपल ने अदालत से पूरी जांच प्रक्रिया पर रोक लगाने की भी मांग की थी, लेकिन यह मांग स्वीकार नहीं की गई।
दिसंबर के अंत में जारी एक आदेश से यह साफ हुआ कि जांच जारी रहेगी और कंपनी को सहयोग करना ही होगा। इससे यह संकेत मिलता है कि कानूनी प्रक्रिया अब निर्णायक मोड़ की ओर बढ़ रही है।
ऐपल का पक्ष और वैश्विक छवि
ऐपल लगातार यह कहती रही है कि उसने किसी भी तरह के नियमों का उल्लंघन नहीं किया है। कंपनी का तर्क है कि उसका ऐप स्टोर मॉडल यूजर्स की सुरक्षा और प्राइवेसी को ध्यान में रखकर बनाया गया है। इसके अलावा, वह यह भी दावा करती है कि उसने डेवलपर्स के लिए समान अवसर उपलब्ध कराए हैं।
हालांकि, भारत ही नहीं बल्कि दुनिया के कई देशों में ऐपल के इसी मॉडल को लेकर सवाल उठ चुके हैं। यूरोप और अमेरिका में भी कंपनी को नियामकीय चुनौतियों का सामना करना पड़ा है। भारत में चल रही यह जांच उसी वैश्विक ट्रेंड का हिस्सा मानी जा रही है।
भारत का डिजिटल बाजार और नियामक रुख
भारत आज दुनिया के सबसे बड़े डिजिटल बाजारों में से एक है। यहां करोड़ों स्मार्टफोन यूजर्स हैं और ऐप आधारित सेवाओं की मांग लगातार बढ़ रही है। सरकार का फोकस इस बाजार में निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा बनाए रखने पर है, ताकि नए स्टार्टअप्स और डेवलपर्स को भी आगे बढ़ने का मौका मिले।
ऐसे में किसी भी बड़ी कंपनी पर सख्त कार्रवाई यह संदेश देती है कि नियम सभी के लिए समान हैं। विशेषज्ञ मानते हैं कि यह मामला भविष्य में भारत की डिजिटल नीति और विदेशी निवेशकों की रणनीति को भी प्रभावित कर सकता है।
संभावित असर और आगे की राह
अगर ऐपल पर इतना बड़ा जुर्माना लगता है, तो इसका असर सिर्फ कंपनी तक सीमित नहीं रहेगा। इससे भारत में काम कर रही अन्य टेक कंपनियां भी सतर्क हो जाएंगी। साथ ही, ऐप स्टोर और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के संचालन से जुड़े नियमों में बदलाव की संभावना भी बढ़ जाएगी।
फिलहाल सबकी नजरें अदालत के फैसले और प्रतिस्पर्धा आयोग के अगले कदम पर टिकी हुई हैं। यह मामला यह तय करेगा कि भारत में डिजिटल बाजार किस दिशा में आगे बढ़ेगा और वैश्विक कंपनियों को यहां किस तरह की रणनीति अपनानी होगी।
